दावे हवाई, हकीकत जुदा: पेयजल मंत्री के क्षेत्र में ‘प्यासा’ है पूर्व विधायक का पैतृक गांव
सरकारी योजनाओं के बावजूद गांव में पानी की आपूर्ति ठप
बोकारो जिले के कसमार प्रखंड स्थित मुरहुलसुदी पंचायत के पाड़ी गांव और महाराज टोला में गंभीर पेयजल संकट सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार की जलमीनार योजना केवल शोपीस बनकर रह गई है, जबकि पाइपलाइन बिछने के बावजूद घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा।
बोकारो: झारखंड सरकार के विकास और बुनियादी सुविधाओं के दावों की हकीकत बोकारो जिले के कसमार प्रखंड से खुलकर सामने आ रही है। पंचायत के महाराज टोला सहित मुरहुलसुदी पंचायत के पाड़ी गांव की स्थिति यह बताने के लिए काफी है कि योजनाएं कागजों पर चाहे जितनी मजबूत दिखें, ज़मीनी सच्चाई कितनी कमजोर है।
यह वही गांव है, जो गोमिया के पूर्व विधायक लंबोदर महतो का पैतृक गांव भी बताया जाता है। विडंबना यह है कि आज इस गांव के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, जबकि वर्तमान में गोमिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक योगेन्द्र प्रसाद महतो राज्य के पेयजल मंत्री हैं।

चापाकल खराब, मरम्मत ठप: गांव के कई सरकारी चापाकल लंबे समय से खराब पड़े हैं। मरम्मत के लिए न तो कोई ठोस पहल दिख रही है और न ही प्रशासनिक सक्रियता।
सोलर मशीन गायब होने का आरोप: ग्रामीणों का कहना है कि वार्ड सदस्य के घर के सामने लगे एक चापाकल की सोलर मशीन भी रहस्यमय तरीके से गायब हो गई है, जिससे योजना पर और सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों में आक्रोश, पानी के लिए त्राहिमाम: जल संकट से परेशान ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ किसी व्यक्ति या राजनीति का मुद्दा नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व का सवाल है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से साफ शब्दों में कहा है—
राजनीति छोड़िए और हमारी बुनियादी जरूरतों पर ध्यान दीजिए। हमें सिर्फ पानी चाहिए।
सवालों के घेरे में व्यवस्था
पाड़ी गांव की स्थिति एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि जब मंत्री के अपने ही क्षेत्र में पेयजल संकट इतना गंभीर है, तो अन्य ग्रामीण इलाकों की स्थिति क्या होगी।
Susmita Rani is a journalist and content writer associated with Samridh Jharkhand. She regularly writes and reports on grassroots news from Jharkhand, covering social issues, agriculture, administration, public concerns, and daily horoscopes. Her writing focuses on factual accuracy, clarity, and public interest.
