शरीर पर उग आई थी छाल जैसी त्वचा, अब AIIMS में फिर शुरू हुआ 14 साल की बच्ची का इलाज

दंतेवाड़ा की 14 वर्षीय बच्ची दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित

शरीर पर उग आई थी छाल जैसी त्वचा, अब AIIMS में फिर शुरू हुआ 14 साल की बच्ची का इलाज
दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित 14 वर्षीय बच्ची का AIIMS रायपुर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में इलाज शुरू

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की 14 वर्षीय बच्ची, जो दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित है, का उपचार AIIMS रायपुर में फिर से शुरू हो गया है। लंबे समय से बीमारी से जूझ रही बच्ची को अब विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में इलाज और देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है।

रायपुर: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की 14 वर्षीय बालिका, जो एक दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित है, का उपचार एक बार फिर रायपुर स्थित AIIMS में शुरू हो गया है। बच्ची लंबे समय से गंभीर त्वचा संबंधी बीमारी से जूझ रही है, जिसके कारण उसके पूरे शरीर की त्वचा प्रभावित हो गई है।

 रिपोर्ट के अनुसार, बच्ची को अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग इक्थियोसिस हाइक्सट्रिक्स (Ichthyosis Hystrix) है। इस बीमारी में त्वचा असामान्य रूप से मोटी, सूखी और परतदार हो जाती है, जिससे मरीज को दैनिक जीवन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

बताया गया है कि आर्थिक और अन्य कारणों से कुछ समय के लिए उपचार प्रभावित हो गया था, लेकिन अब AIIMS रायपुर में उसका इलाज पुनः शुरू कर दिया गया है। चिकित्सकों की निगरानी में बच्ची को आवश्यक दवाएं और चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है।

परिजनों ने उम्मीद जताई है कि नियमित उपचार से बच्ची के स्वास्थ्य में सुधार होगा। वहीं, स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी परिवार को हरसंभव सहयोग देने की अपील की है।

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विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के दुर्लभ त्वचा रोगों में लंबे समय तक उपचार और विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। AIIMS रायपुर में त्वचा रोग विशेषज्ञों की टीम ऐसे जटिल मामलों के उपचार में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। परिजन अब बच्ची के बेहतर स्वास्थ्य और सामान्य जीवन की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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क्या है इक्थियोसिस हाइस्ट्रिक्स?

विशेषज्ञों के अनुसार, इक्थियोसिस हाइस्ट्रिक्स एक दुर्लभ त्वचा रोग है, जिसमें त्वचा की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है। इसके कारण शरीर पर नई त्वचा तेजी से बनती रहती है, जबकि पुरानी मृत त्वचा समय पर नहीं झड़ती। परिणामस्वरूप त्वचा मोटी, सूखी और परतदार हो जाती है।

बचपन से ही दिखने लगते हैं लक्षण

यह बीमारी आनुवंशिक कारणों से होती है। कई मामलों में इसके लक्षण जन्म के समय ही दिखाई देते हैं, जबकि कुछ बच्चों में उम्र बढ़ने के साथ धीरे-धीरे स्पष्ट होने लगते हैं। यदि परिवार में किसी सदस्य को यह बीमारी हो, तो बच्चों में इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।

शरीर पर क्या असर पड़ता है?

इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। त्वचा अत्यधिक सूखी और मोटी हो जाती है। शरीर में दरारें पड़ सकती हैं, जिससे दर्द और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। हाथ-पैर मोड़ने में तकलीफ होती है और कई बार चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता है। जोड़ों में अकड़न और लगातार असहजता बनी रहती है।

बीमारी की वजह क्या है?

डॉक्टरों के मुताबिक, यह बीमारी जीन में गड़बड़ी के कारण होती है। शरीर में केराटिन नामक प्रोटीन त्वचा को मजबूत और लचीला बनाए रखने का काम करता है। लेकिन इस बीमारी में केराटिन बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है, जिससे त्वचा की संरचना असामान्य हो जाती है।

क्या इसका इलाज संभव है?

इक्थियोसिस हाइस्ट्रिक्स का फिलहाल कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि नियमित उपचार और देखभाल से इसके लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

मरीजों को त्वचा को नम बनाए रखने के लिए विशेष मॉइस्चराइजर और औषधीय क्रीम दी जाती हैं। कई मामलों में रेटिनॉइड दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है, जो त्वचा की परतों को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। इसके अलावा फिजियोथेरेपी भी जरूरी होती है, ताकि जोड़ों में अकड़न कम हो और शरीर की गतिविधियां सामान्य बनी रहें।

क्या कैंसर का खतरा भी होता है?

विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ गंभीर मामलों में लंबे समय बाद त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि यह हर मरीज में नहीं होता। इसलिए नियमित चिकित्सा जांच और विशेषज्ञों की निगरानी जरूरी मानी जाती है।

दुनिया में बेहद कम मामले

इक्थियोसिस हाइस्ट्रिक्स दुनिया की सबसे दुर्लभ त्वचा बीमारियों में गिनी जाती है। इसके मामले बहुत कम संख्या में दर्ज किए गए हैं। भारत में भी ऐसे मरीज बेहद कम हैं, जिसके कारण यह बीमारी अक्सर चर्चा का विषय बन जाती है।

डॉक्टरों की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी से पीड़ित मरीजों को नियमित इलाज, पौष्टिक आहार, त्वचा की विशेष देखभाल और समय-समय पर चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता होती है। सही उपचार और देखभाल से मरीज सामान्य जीवन के काफी करीब रह सकता है।

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Edited By: Mohit Sinha
Mohit Sinha Picture

Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.

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