चेहरे और कंधे में गोली लगी, फिर भी आतंकी को मार गिराया, जानिए कीर्ति चक्र विजेता मीनाक्षी सुंदरम की वीरगाथा

रक्षा अलंकरण समारोह 2026 में राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

चेहरे और कंधे में गोली लगी, फिर भी आतंकी को मार गिराया, जानिए कीर्ति चक्र विजेता मीनाक्षी सुंदरम की वीरगाथा
लांस नायक मीनाक्षी सुंदरम को कृति चक्र से सम्मानित करती राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ।

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान लांस नायक मीनाक्षी सुंदरम ने अद्भुत साहस का परिचय दिया।

नई दिल्ली/कुलगाम: 19 दिसंबर 2024, जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान भारतीय सेना के लांस नायक Meenatchi Sundaram A ने ऐसी बहादुरी दिखाई, जिसने पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। भीषण मुठभेड़ के दौरान उनके चेहरे और दाहिने कंधे में गोली लग गई, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने मोर्चा नहीं छोड़ा और एक आतंकवादी को मार गिराया। उनकी इसी असाधारण वीरता, साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया।

रक्षा अलंकरण समारोह 2026 (फेज-1) में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विभिन्न सैन्य और सुरक्षा बलों के जवानों को वीरता पुरस्कार प्रदान किए। इसी समारोह में लांस नायक मीनाक्षी सुंदरम को देश के दूसरे सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार ‘कीर्ति चक्र’ से नवाजा गया।

जानकारी के अनुसार, कुलगाम में चल रहे आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन के दौरान आतंकियों के साथ हुई भीषण गोलीबारी में लांस नायक सुंदरम गंभीर रूप से घायल हो गए थे। चेहरे और कंधे में गोली लगने के बावजूद उन्होंने अद्भुत साहस का परिचय दिया और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखी। उन्होंने एक आतंकी को मार गिराया तथा अपने साथियों के लिए अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारतीय सेना में उनकी बहादुरी और समर्पण को असाधारण माना जा रहा है। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, लांस नायक सुंदरम ने अपनी जान की परवाह किए बिना मिशन को प्राथमिकता दी और आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई को निर्णायक बनाया।

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कीर्ति चक्र भारत का दूसरा सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है, जो असाधारण साहस, वीरता और आत्मबलिदान के लिए प्रदान किया जाता है। यह सम्मान उन वीर सैनिकों और नागरिकों को दिया जाता है, जिन्होंने कर्तव्य पालन के दौरान अद्वितीय बहादुरी का प्रदर्शन किया हो।

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लांस नायक मीनाक्षी सुंदरम की यह कहानी न केवल भारतीय सेना की वीर परंपरा को दर्शाती है, बल्कि देश के युवाओं को भी राष्ट्रसेवा और साहस का संदेश देती है।

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Edited By: Susmita Rani
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Susmita Rani is a journalist and content writer associated with Samridh Jharkhand. She regularly writes and reports on grassroots news from Jharkhand, covering social issues, agriculture, administration, public concerns, and daily horoscopes. Her writing focuses on factual accuracy, clarity, and public interest.

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