झारखंड की दो टॉपर बेटियां कैसे बनीं 'सॉल्वर'? गरीबी, असफलता और लालच की पूरी कहानी
NEET exam fraud: नीट-यूजी परीक्षा के दौरान सॉल्वर गैंग की टीम में पकड़ी गई झारखंड की पूनम और चंचल कुमारी कभी अपनी मेधा के लिए जानी जाती थीं। दोनों इंटर टॉपर रहीं, लेकिन नीट में सफलता न मिलने पर नर्सिंग कोर्स की राह पकड़नी पड़ी। फिर गरीबी और बार-बार की नाकामी ने उन्हें एक ऐसे जाल में फंसा दिया जिससे निकलना अब मुश्किल है। यह है उनके गिरने की पूरी दास्तान।
रांची: बिहार के लखीसराय में नीट-यूजी सॉल्वर गैंग पकड़ी गई तो उसमें दो नाम सबको चौंका गए। गिरिडीह के बिरनी प्रखंड की पूनम कुमारी और पलामू के हरिहरगंज की चंचल कुमारी। पूनम ने 2021 में झारखंड इंटर साइंस में टॉप किया था और चंचल 2016 में पलामू की जिला टॉपर बनी थी। इंटर टॉपर्स की राज्य सूची में भी चंचल का नाम दर्ज था। दोनों के घरों में बस एक चीज एक जैसी थी तंगी और उसके बावजूद जलती रहने वाली उम्मीद की लौ।
पूनम तीन बार नीट में रहीं असफल
इंटर में टॉप करने के बाद पूनम का सपना डॉक्टर बनने का था। लेकिन तीन बार नीट की परीक्षा देने के बाद भी कामयाबी हाथ नहीं लगी। बार-बार की नाकामी और घर की तंगहाली ने उन्हें 2025 में बीएचयू वाराणसी में बीएससी नर्सिंग कोर्स में दाखिला लेने पर मजबूर कर दिया। परिवार को उनसे बड़ी उम्मीदें थीं लेकिन आर्थिक दबाव ने शायद उन्हें सॉल्वर गैंग के जाल में धकेल दिया।
पिता हर महीने बेटी पूनम को भेजते थे 7000 रुपए

बेटी से मिलने नहीं जाएंगे माता-पिता

चंचल का भी मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं हो सका
चंचल ने 2018 में नीट यूजी पास किया था लेकिन दाखिले में देरी की वजह से मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं मिला। बाद में 2021 में ओडिशा के राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में बीएएमएस में दाखिला लिया और अभी वो अंतिम वर्ष की छात्रा हैं।
चंचल के दोनों भाई लखीसराय पहुंचे
पलामू की चंचल के दोनों भाइयों को लखीसराय थाने में तलब किया गया है और वो वहां पहुंच गए हैं। छोटे भाई सतीश मेहता ने बताया कि करीब दस दिन पहले चंचल घर आई थी और लगता है किसी के बहकावे या लालच में आकर वो इस मामले में उलझ गई। दोनों भाई खुद आयुर्वेद चिकित्सक हैं और अपनी बहन को डॉक्टर बनाना चाहते थे।
पूनम-चंचल के परिजनों से ईओयू करेगी पूछताछ
आर्थिक अपराध शाखा यानी ईओयू ने भी जांच शुरू कर दी है और दोनों के परिजनों से पूछताछ की तैयारी है। परिवार वाले खुद हैरान हैं कि उनकी बेटियां इस गैंग के चंगुल में कैसे आ गईं। दोनों के मोबाइल भी कई दिनों से बंद हैं।
गरीबी और बार-बार की असफलता ने धकेला अंधेरे में
जानकारों का मानना है कि महंगी कोचिंग, बार-बार की नाकामी, गरीबी और आर्थिक दबाव के कारण ही पूनम और चंचल जैसी होनहार लड़कियां सॉल्वर गैंग के जाल में फंस जाती हैं। मेडिकल और नर्सिंग कॉलेज की फीस और रहने का खर्च जुटाना इन परिवारों के लिए किसी पहाड़ से कम नहीं होता। तुरंत पैसे मिलने का लालच भी कई बार ऐसे मेधावी छात्रों को गलत राह पर ले जाता है।
सॉल्वर सिंडिकेट: एक सड़ी हुई मशीनरी
लखीसराय एसपी प्रेरणा कुमार के मुताबिक यह कोई साधारण धोखा नहीं था। यह एक पूरा तंत्र था जो अंदर से खोखला था। सबसे पहले डमी अभ्यर्थी के लिए नकली आधार कार्ड और पहचान पत्र बनाए जाते हैं जिन पर चेहरा डमी का और नाम असली छात्र का होता है। फिर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की बाधा — लेकिन पुलिस ने जांच में 18 ऐसे कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जो खुद इस गिरोह के हिस्से थे। यानी सुरक्षा की आखिरी दीवार भी पहले से ढही हुई थी। इस नेटवर्क के तार बिहार, झारखंड, दिल्ली, मध्यप्रदेश और राजस्थान तक जुड़े हैं और गिरफ्तार लोगों में दिल्ली, मधेपुरा और मुजफ्फरपुर के मेडिकल छात्र भी शामिल हैं।
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