Natasha Dolls: सुइयां, चाकू और एक गुड़िया... चीन से शुरू हुआ विवाद अब दुनिया भर में चर्चा का विषय

Natasha Dolls: सुइयां, चाकू और एक गुड़िया... चीन से शुरू हुआ विवाद अब दुनिया भर में चर्चा का विषय
(IS: CNN)

Natasha Dolls: स्ट्रेस रिलीफ के नाम पर इन नताशा डॉल्स के साथ ऐसी हरकतें हो रही हैं जो लोगों को बेहद परेशान कर रही हैं। सुइयां चुभाना और चाकुओं से काटना — ऐसे वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।

Natasha Dolls: एक सांवले रंग की छोटी गुड़िया को लेकर सोशल मीडिया पर जंग छिड़ गई है। चीनी सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही नताशा डॉल्स ने दुनियाभर में नस्लवाद को लेकर नया आक्रोश जगा दिया है। कुछ वीडियो क्रिएटर्स ज्यादा व्यूज पाने के लिए इन डार्क स्किन वाले खिलौनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। स्ट्रेस रिलीफ के बहाने इन गुड़ियों में सुइयां चुभाई जा रही हैं और चाकुओं से काटा जा रहा है। ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं जो देखने वालों को भीतर तक झकझोर देते हैं। आइए समझते हैं यह पूरा मामला क्या है।

दरअसल नताशा डॉल एक बच्चे के आकार का स्क्वीज टॉय है जो स्लो-राइजिंग मेमोरी फोम या सॉफ्ट थर्मोप्लास्टिक रबर से बना होता है। इस वायरल खिलौने ने पूरी दुनिया को नस्ल को लेकर असहज करने वाले सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है। चीनी सोशल मीडिया से शुरू हुए इस काले रंग के बच्चे जैसे दिखने वाले खिलौने को ऑनलाइन मनोरंजन के नाम पर पीटा, खींचा और कुचला जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह तब शुरू हुआ जब एक व्लॉगर ने मजाक में इस खिलौने को बेटी की तरह माना और नताशा नाम दे दिया। गलती से गिरने पर उसका आकार बिगड़ा और वह क्लिप वायरल हो गई। फिर ऐसे वीडियो की बाढ़ आ गई। विवाद बढ़ने पर कई वीडियो हटाए गए लेकिन इस ट्रेंड ने नस्लवाद और ऑनलाइन मनोरंजन की सीमाओं पर एक बड़ी बहस छेड़ दी।

क्या है नताशा डॉल?

यह बच्चे के आकार का स्क्वीज टॉय है जो मेमोरी फोम या सॉफ्ट रबर से बना होता है। इसमें खिलौने की त्वचा का रंग सांवला है और नस्लीय रूप-रंग को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है।

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नताशा डॉल ने पहले चीन के रेडनोट और डौयिन पर ध्यान खींचा फिर पूरी दुनिया में फैल गई। यह ट्रेंड केवल व्यूज के चक्कर में चल रहा है। ज्यादा व्यूज पाने के लिए कुछ क्रिएटर्स खिलौने को सुइयों और चाकुओं से काटते हुए वीडियो बना रहे हैं।

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क्यों मचा है बवाल?

खिलौने के रंग-रूप के अलावा वीडियो के कैप्शन भी नस्लीय रूढ़िवादिता को हवा देते हैं। हांगकांग में रहने वाले अश्वेत समुदाय ने इन्हें पूरी तरह क्रूर और अमानवीय बताया है। आलोचकों का कहना है कि यह ट्रेंड मनोरंजन के नाम पर अश्वेत शरीर का अपमान करता है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बच्चों पर इसका मनोवैज्ञानिक असर सबसे बड़ी चिंता है। जब अश्वेत बच्चे अपने जैसे दिखने वाले खिलौनों को पिटते देखते हैं तो उनके मन में यह बैठ जाता है कि दुनिया उन्हें इसी नजर से देखती है। आवाज उठाने वालों का कहना है कि ऐसी गुड़िया बनाना और बेचना 'ब्लैक लाइव्स मैटर' जैसे आंदोलनों की जरूरत को ही उजागर करता है।

हांगकांग के लांताउ में रहने वाली दक्षिण अफ्रीकी अभिनेत्री लोंडीवे न्गुबेनी ने बताया कि उन्होंने एक सुपरमार्केट में एक बच्ची को यह गुड़िया खरीदते और उसे खींचते, दबाते, आंखों में चुभाते देखा। बच्ची ने कहा यह तनाव दूर करने वाला खिलौना है। एक अश्वेत बच्चे जैसी गुड़िया को तकलीफ देकर तनाव दूर करना कैसे स्वीकार्य हो सकता है।

अधिकारियों ने क्या किया?

चीन के कंज्यूमर एसोसिएशन और मार्केट रेगुलेशन प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया है। सीएनएन के अनुसार उन्होंने कहा कि ये वीडियो हिंसा को बढ़ावा देते हैं और नाबालिगों के लिए हानिकारक हैं। ऐसे वीडियो सोशल मीडिया से हटाए जा रहे हैं हालांकि ई-कॉमर्स साइट्स पर यह खिलौना अभी भी उपलब्ध है।

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Edited By: Samridh Media Desk
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