खेत प्यासे, किसान बेहाल: साहिबगंज में धान रोपनी पर सूखे का साया

बारिश की कमी से खेतों में नहीं पहुंची नमी, मुरझाने लगा बिचड़ा

खेत प्यासे, किसान बेहाल: साहिबगंज में धान रोपनी पर सूखे का साया
साहिबगंज में बारिश की कमी से धान रोपनी पर गहराया संकट।

साहिबगंज जिले में कम बारिश के कारण धान रोपनी पर संकट गहराने लगा है। जून माह में सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे खेतों में नमी की भारी कमी हो गई है। किसान रोहनी नक्षत्र में डाले गए बिचड़े के सूखने से चिंतित हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने अल नीनो के प्रभाव के कारण सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई है।

✍️ संजना कुमारी

साहिबगंज: "आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं, पर बादल है कि बरसते ही नहीं।" साहिबगंज के किसानों की यह पीड़ा अब गहरी चिंता में बदल चुकी है। जिले में कहीं-कहीं छिटपुट बूंदाबांदी तो हुई, लेकिन अधिकतर इलाके अब भी बारिश को तरस रहे हैं। नतीजा, धान रोपनी का सुनहरा वक्त हाथ से फिसल रहा है और खेतों में पपड़ी जमने के साथ दरारें भी चौड़ी होने लगी हैं।

हल नहीं चल रहा, रोपनी कैसे हो?  

किसानों का दर्द यही है कि खेतों में हल चलाने लायक नमी तक नहीं है। मिट्टी सूखकर पत्थर हो गई है। रोहनी नक्षत्र में बड़े अरमानों से बिचड़ा गिराया था, पर अब वही बिचड़ा खेतों में मुरझा रहा है। सावन का महीना सिर पर है, पर खेत अब तक प्यासे हैं। तालाब-डोभा भी सूखे पड़े हैं, जिससे सिंचाई का सहारा भी नहीं बचा। कई किसान डीजल पंप से काम चलाने की सोच रहे हैं, पर डीजल की कीमत और पानी की कमी दोनों जेब पर भारी पड़ रही है।

अल नीनो का असर, वैज्ञानिकों की चेतावनी  

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने साफ चेतावनी दी है कि जुलाई से अल नीनो का असर दिखना शुरू हो गया है। इसका सीधा मतलब है सामान्य से कम बारिश। अगर यही ट्रेंड रहा तो जिले में 49 हजार हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि कम पानी में तैयार होने वाली धान की प्रजातियां लगाएं और खेत की मेड़बंदी मजबूत करें ताकि जब भी बारिश हो, पानी खेत में रुक सके।

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आंकड़े भी डरा रहे, बरहेट सबसे ज्यादा बेहाल  

कृषि विभाग के आंकड़े किसानों की बेचैनी बढ़ा रहे हैं। जून में जिले में सामान्य वर्षापात 225 मिलीमीटर होना चाहिए था, लेकिन दर्ज हुई सिर्फ 134.89 मिलीमीटर बारिश। यानी लगभग 40 प्रतिशत कम। प्रखंडवार हाल देखें तो जिला मुख्यालय में सबसे ज्यादा 205 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि बरहेट प्रखंड में बादल सबसे ज्यादा कंजूस रहे, यहां सिर्फ 43.20 मिलीमीटर ही पानी बरसा। बोरियो में 98 मिमी., पतना में 112 मिमी. और तालझारी में 145 मिमी. बारिश रिकॉर्ड की गई। 

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मानसून आया पर झूमकर बरसा नहीं  

12 जून को मानसून ने झारखंड में दस्तक तो दे दी, पर साहिबगंज में झमाझम बारिश का इंतजार अब भी जारी है। धान रोपनी के लिए खेत में 5-6 इंच पानी का भराव जरूरी है, जो ज्यादातर जगह नदारद है। मौसम विभाग का अनुमान भी फिलहाल राहत देने वाला नहीं है। अगले एक हफ्ते तक सिर्फ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। अगर जल्द मूसलाधार बारिश नहीं हुई, तो साहिबगंज में धान की खेती पर सूखे का ग्रहण लगना तय है। इसका सीधा असर किसानों की आमदनी और जिले की खाद्य सुरक्षा पर पड़ेगा। फिलहाल किसान अब भी आसमान की ओर देख रहे हैं, इस उम्मीद में कि बादल रहम करें और उनकी महीनों की मेहनत और पूंजी बर्बाद न हो।

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Edited By: Mohit Sinha
Mohit Sinha Picture

Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.

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