Sahebganj News: कुलपति सम्मेलन में मॉडल कॉलेज राजमहल की बड़ी मांग, झारखंड उच्च शिक्षा अधिनियम 2026 में जुड़ेंगे 3 नए प्रावधान
छात्राओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालयों में लागू होंगे नए नियम
झारखंड उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित कुलपति सम्मेलन में मॉडल कॉलेज राजमहल, साहिबगंज के प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने झारखंड अधिनियम 2026 में 3 बड़े प्रावधान जोड़ने की मांग रखी। राज्यपाल, शिक्षा मंत्री और प्रधान सचिव राहुल कुमार पुरवार की उपस्थिति में डॉ. सिंह ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 'मदर केयर सेंटर' की स्थापना को अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया, ताकि छोटी बच्ची वाली छात्राओं और महिला कर्मचारियों को स्तनपान व शिशुओं की देखभाल के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिल सके।
साहिबगंज: उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, झारखंड द्वारा आयोजित कुलपति सम्मेलन में मॉडल कॉलेज राजमहल, साहिबगंज के प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने उच्च शिक्षा को छात्र हितैषी, सुरक्षित और शोधोन्मुख बनाने के लिए झारखंड अधिनियम 2026 में 3 बड़े प्रावधान जोड़ने की मांग रखी। सम्मेलन में राज्यपाल, शिक्षा मंत्री तथा राहुल कुमार पुरवार (प्रधान सचिव- उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग) भी सम्मिलित हुए।
डॉ. सिंह ने कहा कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में मदर केयर सेंटर की स्थापना अनिवार्य की जाए। इससे छोटी बच्ची वाली छात्राओं और महिला कर्मियों को स्तनपान, देखभाल और सुरक्षित माहौल मिलेगा। मातृत्व या पारिवारिक जिम्मेदारी के कारण प्रतिभाशाली छात्राओं की पढ़ाई बीच में नहीं छूटेगी और महिलाओं की निजता, सम्मान, मातृत्व गरिमा और आत्मविश्वास सुरक्षित रहेगा। उन्होंने बताया कि मॉडल कॉलेज राजमहल में इसकी पहल पहले ही की जा चुकी है। डॉ. सिंह ने कहा कि यह केंद्र लैंगिक समानता और समावेशी शिक्षा को मजबूत करेगा।

डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने कहा कि अगर ये तीन प्रावधान झारखंड अधिनियम 2026 में शामिल होते हैं, तो राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था आधुनिक, सुरक्षित, संवेदनशील, शोधोन्मुख और छात्रहितैषी बनेगी। ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के बच्चे भी मुख्यधारा की शिक्षा और रिसर्च से जुड़ पाएंगे।
कुलपति सम्मेलन में अक्सर फाइलों की बात होती है। पर राजमहल से आई ये आवाज जमीन से जुड़ी है। मदर केयर सेंटर से लेकर बस सेवा तक- हर सुझाव उस छात्रा के लिए है जो बच्चा गोद में लेकर कॉलेज आती है, या उस छात्र के लिए जो 20 किलोमीटर चलकर पढ़ने आता है।
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