साहिबगंज बना 'दारू मंडी', गांव-गली में खुलेआम बिक रहा जहर, प्रशासन मौन, माफियाओं के हौसले बुलंद
जिला स्थापना दिवस पर विकास के साथ उठा अवैध शराब का मुद्दा
साहिबगंज जिले में अवैध शराब कारोबार को लेकर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है। विभिन्न क्षेत्रों से अवैध शराब निर्माण और बिक्री की शिकायतें सामने आने के बाद आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
संजय कुमार धीरज
साहिबगंज: जिला स्थापना के 42 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन कानून-व्यवस्था आज भी गंभीर चुनौतियों से जूझती दिखाई देती है। झारखंड के साहिबगंज जिले से एक बार फिर सिस्टम पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल आबकारी विभाग पर, सवाल पुलिस प्रशासन पर और सवाल उस प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर, जिसके सामने कथित तौर पर शराब माफियाओं के हौसले बुलंद नजर आते हैं।
ग्राउंड जीरो: जहां कानून से बड़ा दिखता है अवैध कारोबार

लोगों का कहना है कि कार्रवाई के नाम पर कभी-कभार छापेमारी होती है, लेकिन अवैध कारोबार पर स्थायी रोक नहीं लग पाती।
सबसे बड़ा आरोप: मिलीभगत का खेल?
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कुछ क्षेत्रों में अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत के कारण माफियाओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। वहीं, उत्पाद विभाग में बड़ी संख्या में पद रिक्त होने की बात भी सामने आती रही है, जिससे निगरानी और कार्रवाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
जनता में आक्रोश
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन चाहे तो अवैध शराब नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई संभव है। कई लोगों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन को उन क्षेत्रों की जानकारी है, जहां अवैध शराब का कारोबार संचालित होता है।
लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि यदि अवैध शराब का कारोबार जारी रहेगा, तो सरकारी राजस्व को भी नुकसान होगा। साथ ही जहरीली शराब से होने वाली संभावित घटनाएं सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर गंभीर प्रभाव छोड़ सकती हैं।
आबकारी विभाग और पुलिस पर उठ रहे सवाल
जिले में लाइसेंसी दुकानों के साथ-साथ अवैध शराब के कथित अड्डों की संख्या को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि जिले में विशेष अभियान चलाकर अवैध शराब कारोबार पर अंकुश लगाया जाना चाहिए।
उनकी मांग है कि जिन क्षेत्रों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं, वहां जवाबदेही तय की जाए और दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो।
आखिरी सवाल: कब मुक्त होगा साहिबगंज?
जिला स्थापना दिवस के अवसर पर विकास की चर्चा के बीच अवैध शराब का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया है। आम लोगों का मानना है कि जब तक गांव-गांव में नशे का अवैध कारोबार जारी रहेगा, तब तक सामाजिक विकास अधूरा रहेगा।
अब देखना होगा कि आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन इस चुनौती से निपटने के लिए क्या कदम उठाते हैं और अवैध शराब कारोबार के खिलाफ कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
