"गड्ढा एक्सप्रेसवे:" साहिबगंज की सड़कों पर गड्ढे नहीं, मुफ्त मसाज सेंटर
मानसून की पहली बारिश में सड़कें बनीं तालाब, राहगीरों और वाहन चालकों की बढ़ी परेशानी
साहिबगंज की बदहाल सड़कों और जगह-जगह बने गड्ढों को लेकर ‘शनिवारी सर्वे’ में इस सप्ताह तीखे सवाल उठाए गए हैं। मानसून की बारिश के बाद कई सड़कों की स्थिति और खराब हो गई है। साहिबगंज-सकरीगली मार्ग पर गड्ढों के कारण वाहन चालकों और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
संजय कुमार धीरज
साहिबगंज: साहिबगंज की सड़कों पर अब गड्ढे नहीं बचे। अब वहां "प्राकृतिक स्पीड ब्रेकर" और "सरकारी मसाज सेंटर" खुल गए हैं। मानसून की पहली बारिश हुई नहीं कि हमारी सड़कें तालाब बन गईं और तालाब में कमल नहीं, गड्ढे खिल गए। बाइक वाला उछलता है, कार वाला झूमता है, और बस वाला तो सीधा योगा करवा देता है।

सबसे मजेदार बात - मरीज को अस्पताल पहुंचाने में 1 घंटा लगना चाहिए। सड़क की वजह से 3 घंटे लग जाते हैं। डॉक्टर कहते हैं "समय पर लाओ, जान बच जाएगी।" हम कहें "सड़क पर लाओ, गाड़ी बच जाएगी।"
अंत में एक सवाल: विदेश में सड़क पर गड्ढा हुआ तो 24 घंटे में ठीक। यहां 24 महीने में फीता कटता है। क्या हम "विकसित भारत" के लिए "विकसित गड्ढे" डिजर्व करते हैं? आप अपनी गाड़ी का हाल और सस्पेंशन का बिल संभाल कर रखिए। अगली बार जब कोई बोले "विकास हुआ है", तो बिल दिखा देना।









