Hazaribagh News: विनोबा भावे विश्वविद्यालय में विश्व जनजाति दिवस की पूर्व संध्या पर समारोह आयोजित
विभागाध्यक्ष डॉ. जॉनी रूफीना तिर्की का स्वागत
हजारीबाग के विनोबा भावे विश्वविद्यालय के मानवविज्ञान विभाग द्वारा आर्यभट्ट सभागार में विश्व जनजाति दिवस की पूर्व संध्या पर विशेष समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान विश्वविद्यालय के वक्ताओं, शोधार्थियों और शिक्षकों ने जनजातीय संस्कृति, इतिहास, औषधि ज्ञान और उनके संरक्षण के महत्व पर अपने विचार साझा किए।
हजारीबाग: विनोबा भावे विश्वविद्यालय मानवविज्ञान विभाग के तत्वाधान शनिवार को विश्व जनजाति दिवस की पूर्व संध्या पर एक समारोह का आयोजन किया गया। आर्यभट्ट सभागार में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ जॉनी रूफीना तिर्की ने किया। बतौर मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के छात्रकल्याण संकायाध्यक्ष डॉ विकास कुमार ने कहा कि ऐसा नहीं कहा जाना चाहिए कि जनजाति लोग मुख्यधारा में नहीं है। अध्ययन से हम पाएंगे कि जनजातीय लोग ही मुख्यधारा में है।
उन्होंने कहा कि यह लोग कई मामलों में अन्य लोगों से भिन्न है और इन्हें भिन्न होने का अधिकार है। लेकिन यह लोग हमसे अलग नहीं है। हम सब मिलकर ही वर्तमान समय का समाज है। उन्होंने इस संबंध में 'जनजातीय' शब्द की परिभाषा तथा 'एथनींसिटी' शब्द के अर्थ की भी व्याख्या की। इस संबंध में उन्होंने स्वयं द्वारा संपादित पुस्तक "Why can't we coexist? की भी चर्चा की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यूसेट की श्रीमती अर्चना रीना धान ने जनजाति समाज के इतिहास एवं योगदान की चर्चा की। बताया कि झारखंड के जनजातीयों ने हमेशा साहस के साथ न्याय के पक्ष में संघर्ष किया है।
शोधार्थी विकास कुमार यादव ने बताया की वर्तमान विश्व की सभी समस्याओं का समाधान आदिवासी ज्ञान और जीवन शैली में उपलब्ध है। राजनीति विज्ञान विभाग के विद्यार्थी राहुल कुमार ने कहा कि हमें जनजातीय लोगों को पिछड़ा समझने की गलती नहीं करनी चाहिए। वस्तुत वह हमसे काफी आगे है। उन्होंने जनजातीय औषधि ज्ञान की भी चर्चा की।
गृह विज्ञान की प्राध्यापिका डॉ ममता कश्यप ने बताया कि अभी भी जनजाति समाज के साथ न्याय नहीं हो पा रहा है। समाज की भाषा संस्कृति लुप्त हो रही है। उन्होंने सामूहिक जीवन शैली से भटकाव को इसका करण बताया। कहा कि जनजाति समाज को संरक्षित करने की आवश्यकता है। कहा की यह ऐसी संस्कृति है जिसमें जीवन जीने की अद्भुत सूत्र समाहित है।
पूर्व विभागाध्यक्ष एवं लाइब्रेरी साइंस विभाग के निदेशक डॉ विनोद रंजन ने 2026 के विश्व जनजाति दिवस के थीम "स्वदेशी दाइयों को सम्मान: जीवन और कल्याण की सुरक्षा" की चर्चा की। उन्होंने धन्यवाद भी ज्ञापित किया। कार्यक्रम में अच्छी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित हुए।
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