Sahibganj News: फेरी सेवा बंद, ओवरलोड नावों में 'मौत का सफर' करने को मजबूर हजारों यात्री
1 अप्रैल 2026 से बंद है मनिहारी-साहिबगंज फेरी सेवा
मनिहारी-साहिबगंज फेरी सेवा बंद होने के बाद हजारों लोग रोज छोटी नावों में ओवरलोड होकर गंगा पार करने को मजबूर हैं। क्षमता से कई गुना अधिक यात्रियों और मोटरसाइकिलों के साथ नावों का संचालन हो रहा है, जबकि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं हैं। मरीज, छात्र और व्यापारी सबसे अधिक प्रभावित हैं। फेरी सेवा बंद होने से व्यापार पर भी असर पड़ा है।
साहिबगंज: मनिहारी-साहिबगंज के बीच फेरी सेवा बंद हुए महीनों बीत गए, लेकिन अब तक प्रशासन द्वारा कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। नतीजा, हजारों लोग रोज जान हथेली पर रखकर गंगा पार कर रहे हैं। 8-10 सवारी की क्षमता वाली छोटी नावों में 20-25 लोग और थोड़ी बड़ी नाव में 40-50 लोगों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया जा रहा है, साथ ही 5-7 मोटरसाइकिलें भी अलग से लाद ली जाती हैं। यात्रियों के पास न तो लाइफ जैकेट होती है और न ही सुरक्षा के कोई अन्य इंतज़ाम। एक तरफ बरसात में उफनती गंगा हर सफर में हादसे को दावत दे रही है तो वहीं दूसरी तरफ यात्रियों को जरूरत के समय नाव यात्रा करने की मजबूरी।
‘मजबूरी है, जाना तो पड़ेगा’
छात्र राकेश कुमार ने बताया कि मनिहारी में कोचिंग है। फेरी बंद है तो नाव से जाना मजबूरी है। बाढ़ के दिनों में नाव की सवारी करना खतरनाक है हम भी डरते हैं, पर पढ़ाई नहीं छोड़ सकते। वहीं, किडनी मरीज 65 वर्षीय सुनीता देवी के बेटे ने कहा कि मां को डायलिसिस के लिए हफ्ते-दस में एक बार कटिहार ले जाना पड़ता है। नाव हिलती है तो लगता है कि अब जान गई, लेकिन दूसरा रास्ता ही नहीं है।
वीडियो वायरल, फिर भी नहीं जागा प्रशासन

नाम न छापने की शर्त पर एक नाविक ने कहा कि फेरी सेवा बंद है तो सारी भीड़ हम पर है। डीजल महंगा है। कम सवारी बैठाएंगे तो घर कैसे चलेगा। प्रशासन को फेरी चलानी चाहिए, हम भी चाहते हैं कि यात्रियों की सुरक्षित यात्रा के लिए उचित व्यवस्था हो। नाविकों ने जल्द फेरी सेवा शुरू करने की मांग प्रशासन से की है।
फेरी सेवा 1 अप्रैल 2026 से बंद
बता दें कि बिहार और झारखंड के बीच रोटेशन सिस्टम से फेरी सेवा चलती है। 31 मार्च 2026 को साहिबगंज (झारखंड) की अवधि खत्म हुई। इस बार बंदोबस्ती की जिम्मेदारी कटिहार जिला प्रशासन (बिहार) की थी। लेकिन अब तक दो बार निविदा जारी की गई, फिर भी कोई बोली लगाने वाला नहीं आया। इसीलिए पिछले एक अप्रैल 2026 से यात्री और मालवाहक जहाजों का संचालन पूरी तरह बंद है। इस बार घाट की बंदोबस्ती राशि 11.26 करोड़ रुपये प्रति वर्ष तय की गई थी। यानी 2 साल के लिए 22.53 करोड़ से ज्यादा। साथ ही फिटनेस, इंश्योरेंस, टिकट घर, विश्राम गृह, पार्किंग जैसी नई सख्त शर्तें लगा दी गईं। इसी वजह से कोई एजेंसी निविदा में शामिल नहीं हुई। कटिहार प्रशासन का कहना है कि निर्धारित राशि जमा नहीं होने और कागजी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण परवाना निर्गत नहीं हो सका। इसी वजह से यात्री नाव का परिचालन भी बंद कर दिया गया।
यात्रियों की परेशानी
हजारों लोग रोजाना इसी रास्ते से आते-जाते थे। अब भागलपुर होकर लंबा सड़क मार्ग लेना पड़ रहा है। कई लोग जान जोखिम में डालकर नाव से पार कर रहे हैं। साहिबगंज से कटिहार जाने वाली रेत, गिट्टी, सीमेंट, पत्थर की सप्लाई रुक गई। विक्रमशिला सेतु पुल पहले से क्षतिग्रस्त है। फेरी बंद होने से नदी मार्ग पर निर्भरता और बढ़ गई है। कटिहार प्रशासन ने 12 मार्च, 18 मार्च और 24 मार्च को फिर से नीलामी की तारीख तय की थी। मनिहारी के लोग आज भी धरना-प्रदर्शन कर सेवा बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
क्या कहते हैं मनिहारी विधायक
मनिहारी विद्यायक मनोहर प्रसाद सिंह ने कहा कि फेरी संचालन के लिए नई एजेंसी का चयन किया जा रहा है, टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। सुरक्षा ऑडिट और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद सेवा बहाल कर दी जाएगी। तब तक नावों पर ओवरलोडिंग रोकने के लिए अनुमंडल पदाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल हालात जस के तस हैं। गंगा नदी द्वारा हर दिन हजारों लोग भगवान भरोसे सफर कर रहे हैं और किसी बड़े हादसे का इंतजार हो रहा है।









