दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रतिमा का किया अनावरण
विकास मेला-सह-पारितोषिक वितरण कार्यक्रम आयोजित
रामगढ़ जिले के लुकैयाटांड़ में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनकी भव्य प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर आयोजित विकास मेला सह पारितोषिक वितरण समारोह में सीएम ने समाज को एकजुट रहने और महापुरुषों के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।
रांची: विशेष रूप से मेरे एवं मेरे पूरे परिवार के लिए, अत्यंत भावुक और भारी दिन है, लेकिन यह पीड़ा केवल हमारे परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे झारखंड प्रदेश के साथ-साथ देश के समस्त आदिवासी, दलित, शोषित और पिछड़े समाज के लिए यह अत्यंत दुःखद और भावुक कर देने वाला क्षण है। पिछले वर्ष आज ही के दिन आदरणीय बाबा दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी ने अंतिम सांस ली थी और पंचतत्व में विलीन हुए थे। इस सृष्टि का यही शाश्वत सत्य है कि जिसने इस धरा पर जन्म लिया है, उसे कालचक्र के विधान अनुसार एक दिन प्रकृति में लीन होना ही पड़ता है।
आदरणीय गुरुजी ने भी उसी कालचक्र को पूरा किया। कभी-कभी कुछ घटनाओं और समय के चक्र के कारण हमारे प्रिय लोग हमारे बीच से बिछड़ जाते हैं। आज हम सबने लुकैयाटांड़ (बरलंगा) स्थित सोना-सोबरन विद्यालय परिसर में आदरणीय गुरुजी की एक भव्य प्रतिमा का अनावरण किया है। इस प्रतिमा की स्थापना का उद्देश्य यही है कि हम और हमारी आने वाली पीढ़ियाँ अपने इतिहास और जड़ों को कभी न भूलें।

समाज की असली ताकत एकजुटता में निहित, शहीदों के आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए
बड़ी चिंता का विषय यह है कि आज भी वे असामाजिक तत्व एक नए रूप और नए चेहरे के साथ हमारे समाज में विद्यमान हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज एक तरफ जहाँ हम चाँद पर पहुँचने के सपने को पूरा कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ शहरों से लेकर दूर-दराज़ के गाँवों और कस्बों तक ऐसी असामाजिक ताकतें लगातार पनप रही हैं।
ये ताकतें हमारे सीधे-सादे आम नागरिकों—चाहे वे बुजुर्ग हों, महिलाएँ हों या नौजवान हों—उन्हें गुमराह करने और निशाना बनाने का काम करती है। मुझे लगता है कि इस समस्या का एक ही स्थायी समाधान है—हमारी अटूट एकजुटता और एक-दूसरे के प्रति आपसी सम्मान। जब तक हम आपस में सम्मान और भाईचारे का भाव नहीं रखेंगे, तब तक हम छोटी-छोटी बातों पर आपस में लड़ते रहेंगे। इसलिए आपसी भाईचारे का भाव और मानवीय भावना जागृत करनी होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दौर नई युवा पीढ़ी का दौर है। हमारी युवा पीढ़ी बड़ी ऊर्जा और ताकत के साथ आगे बढ़ रही है, लेकिन इस ताकत के साथ जहाँ अच्छाइयाँ और अपार संभावनाएँ हैं। हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि हम अपनी नई पीढ़ी को सही मार्ग पर बनाए रखें, ताकि वे भटकाव के रास्ते से कोसो दूर रहें। उन्होंने कहा कि आज आदरणीय "गुरुजी" के विचार और आदर्श केवल उनकी जन्मस्थली, पंचायत या गाँव तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राज्यभर व देश में आज उन्हें बड़े आदर और श्रद्धा के साथ याद किया जा रहा है।
दिशोम गुरु स्मृति शेष-स्व० शिबू सोरेन जी ने अलग झारखंड राज्य के सपने को साकार किया
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि बारिश का मौसम होने के बावजूद आज पूरे राज्यभर में आदरणीय गुरुजी की याद में लोग स्वतःस्फूर्त एकत्रित हो रहे हैं। राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर हर जिले में समाज के लोग एकजुट हो रहे हैं। आदरणीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी ने अपने आंदोलन के माध्यम से न केवल झारखंड को एक विशिष्ट पहचान दी, बल्कि एक महान जननायक के रूप में अमूल्य योगदान दिया।
वे राजनीति की पारंपरिक सीमाओं से बहुत आगे निकल चुके थे—एक ऐसा व्यक्तित्व जिसके समक्ष पद, नेता, विधायक और मंत्री सब फीके पड़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि गुरुजी जैसे वीर सपूतों ने अपने खून-पसीने से सींचकर हमें यह अलग राज्य बनाकर दिया है, लेकिन आज इस राज्य को सजाने और संवारने की एक भारी-भरकम ज़िम्मेदारी हम सबके कंधों पर है। एक ज़िम्मेदार सरकार होने के नाते हमारा यह निरंतर प्रयास है कि राज्य के अंतिम व्यक्ति तक सरकार की आवाज़ और सुविधाएँ पहुँचे और आपकी आवाज़ सीधी सरकार तक आए। हम सब मिलकर राज्य के उज्ज्वल भविष्य के लिए क्या बेहतर हो सकता है, इसका मार्ग प्रशस्त करें।
महान आत्माओं की याद को अपने दिल में बसाने का दिन
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि पूर्व में हम सब इस लुकैयाटांड़ में अमर शहीद सोबरन मांझी जी की याद में एकत्रित होते रहे हैं। अब आदरणीय गुरुजी के सम्मान में भी हम सब यहाँ निरंतर जुटेंगे। हमारा पैतृक गाँव नेमरा यहाँ से बिल्कुल समीप ही है, जहाँ आदरणीय गुरुजी का जन्म हुआ था। चूँकि इतने सारे लोगों को उस छोटे से गाँव में समायोजित करना कठिन था, इसीलिए आप सबों के लिए इस स्थल को चिह्नित किया गया, ताकि आने वाले समय में हम बड़ी-से-बड़ी संख्या में यहाँ एकत्रित होकर अपने महान नायकों को याद कर सकें और उनकी प्रेरणा को आगे बढ़ाने का संकल्प ले सकें।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आज का दिन औपचारिक भाषण देने का नहीं है। आज प्रथम पुण्यतिथि पर मूर्ति के अनावरण के साथ-साथ ऐसे महान आत्माओं की याद को अपने दिल और आत्मा के अंदर बसाने का दिन है। भले ही वे शारीरिक रूप से आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका दिखाया संघर्ष और मार्ग आज भी हम सबों के सामने स्पष्ट दिखाई देता है।
झारखंड वीरों की पावन भूमि
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड की इस पावन धरा पर धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू, निर्मल महतो, विनोद बिहारी महतो और आदरणीय गुरुजी जैसे अनगिनत महापुरुषों का जन्म हुआ। इन महापुरुषों के त्याग के कारण ही झारखंड एक राज्य के साथ-साथ वीरों की पावन भूमि के रूप में स्थापित है। इसके हर कोने में कोई न कोई वीर सपूत दिखाई और उनका प्रेरणादायक संदेश सुनाई देगा।
हम सब उन महान वीर पुरुषों के वंशज और सपूत हैं। वीरों की इस धरती पर हम सभी वीर हैं, और यह वीरता की लड़ाई हमें आपस में नहीं, बल्कि अपने दुश्मनों से लड़नी है। उन्होंने कहा कि हमें अपने राज्य के इतिहास को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। उन्होंने विपरीत परिस्थिति में दिशोम गुरू के प्रथम पुण्यतिथि पर यहां पधारने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति आभार जताया और धन्यवाद! तथा जोहार! कहा।
प्रथम पुण्यतिथि पर राज्य के मंत्री राधा कृष्ण किशोर, मंत्री संजय प्रसाद यादव, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, मंत्री योगेंद्र प्रसाद, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, सांसद राज्यसभा महुआ माजी, विधायक उमाकांत रजक, विधायक कुमार जयमंगल सिंह, विधायक अमित महतो, विधायक ममता देवी, पूर्व मंत्री बेबी देवी, मुख्य सचिव अविनाश कुमार सहित राज्य सरकार के वरीय अधिकारीगण, विशिष्ट अतिथिगण सहित बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।
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