स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने स्वास्थ्य व्यवस्था रसातल में ले जाने का टेंडर उठाया, शोभा यादव का पलटवार
अधिकारियों पर कार्रवाई कर पल्ला नहीं झाड़ सकती सरकार
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता शोभा यादव ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य की 108 एंबुलेंस और चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे जनता को भारी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
रांची: भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता शोभा यादव ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी का बयान राज्य सरकार की विफलताओं को स्वीकार करने के बजाय उनसे ध्यान भटकाने का प्रयास प्रतीत होता है। मंत्री इरफान अंसारी ने स्वास्थ्य व्यवस्था को ना UP, ना DOWN बल्कि पूरी तरह रसातल में ले जाने का टेंडर उठा रखा है।
प्रदेश प्रवक्ता ने कहा की राज्य की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। प्रतिदिन इस कुव्यवस्था के कारण मौत हो रही हैं। कहा कि यदि 108 एंबुलेंस सेवा में इतनी गंभीर अनियमितताएँ थीं कि एजेंसी पर प्राथमिकी दर्ज करने और सिविल सर्जन को शोकॉज नोटिस देने की आवश्यकता पड़ गई, तो सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर यह स्थिति बनने ही क्यों दी गई?


ऐसे समय में जनता को समाधान चाहिए, न कि केवल बयान और घोषणाएँ। यदि सरकार को नई एजेंसी नियुक्त करनी थी, नई एंबुलेंस खरीदनी थी और व्यवस्था में बदलाव करना था, तो इन सभी प्रक्रियाओं की समय पर योजना क्यों नहीं बनाई गई? अब जब व्यवस्था प्रभावित हुई है, तब तात्कालिक फैसलों को उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील व्यवस्था में जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। सरकार को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि 108 एंबुलेंस सेवा कितने समय से प्रभावित थी, किन कारणों से प्रभावित हुई, अब तक कितने लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा, और ऐसी स्थिति दोबारा न हो इसके लिए क्या स्थायी एवं पारदर्शी व्यवस्था बनाई जा रही है। जनता को यह भी जानने का अधिकार है कि नई एजेंसी के चयन, नई एंबुलेंस की खरीद और पूरी व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने की निश्चित समय-सीमा क्या है।
भाजपा का स्पष्ट मत है कि स्वास्थ्य सेवाएँ किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होती हैं। जनता को दोषारोपण, राजनीतिक बयानबाज़ी और प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं, बल्कि समय पर एंबुलेंस, बेहतर अस्पताल, पर्याप्त दवाइयाँ, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और प्रभावी स्वास्थ्य व्यवस्था चाहिए।
सरकार को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पारदर्शिता के साथ कार्य करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में किसी भी नागरिक को स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। झारखंड की जनता केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाले परिणाम चाहती है।
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