यूनेस्को रिपोर्ट पर कांग्रेस नेता अमित पांडे का हमला, बोले- शिक्षा क्षेत्र में बढ़े ड्रॉपआउट के लिए केंद्र जिम्मेदार
माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर बढ़ते ड्रॉपआउट पर चिंता
पलामू जिला कांग्रेस कमेटी के विधि विभाग के अध्यक्ष अमित पांडे ने यूनेस्को की 'ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग रिपोर्ट 2026' का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर बढ़ती ड्रॉपआउट दर गंभीर चिंता का विषय है और यह शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को दर्शाती है।
पलामू: मेदिनीनगर यूनेस्को (UNESCO) की 'ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग रिपोर्ट 2026' में भारत की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सामने आए आंकड़ों पर पलामू जिला कांग्रेस कमेटी के विधि विभाग के अध्यक्ष अमित पांडे ने गहरी चिंता व्यक्त की है。 उन्होंने एक प्रेस बयान जारी कर कहा कि रिपोर्ट में उजागर हुए तथ्य केंद्र सरकार की शिक्षा के प्रति घोर उदासीनता और नीतियों की विफलता को दर्शाते हैं।
माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर बड़ी चुनौती
अमित पांडे ने यूनेस्को की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि भारत में प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद लगभग 6 प्रतिशत बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं। वहीं, लोअर सेकेंडरी स्तर के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 12 प्रतिशत हो जाता है। सबसे भयावह स्थिति अपर सेकेंडरी स्तर (दसवीं कक्षा के बाद) में देखने को मिलती है, जहाँ 42 प्रतिशत छात्र-छात्राएँ स्कूल छोड़ (ड्रॉपआउट) देते हैं।

युवाओं के भविष्य और देश के विकास पर संकट

जेंडर गैप में सुधार का स्वागत, पर कमियों को छिपाना गलत
अमित पांडे ने यह भी स्पष्ट किया कि यूनेस्को की इस रिपोर्ट में शिक्षा के क्षेत्र में जेंडर गैप (लैंगिक असमानता) को कम करने को लेकर भारत द्वारा की गई प्रगति का उल्लेख सकारात्मक है, जिसका वे स्वागत करते हैं।
"लैंगिक अंतर को कम करना एक अच्छी उपलब्धि है, लेकिन केवल इस एक पहलू की आड़ में शिक्षा व्यवस्था की इतनी बड़ी कमियों और भारी ड्रॉपआउट दर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार को इस दिशा में ठोस, पारदर्शी और प्रभावी नीति अपनानी होगी।" अमित पांडे, अध्यक्ष (विधि विभाग), पलामू जिला कांग्रेस कमेटी
विकसित भारत की नींव है शिक्षा
बयान के अंत में उन्होंने कहा कि शिक्षा ही किसी भी राष्ट्र के समग्र विकास की असली आधारशिला होती है। इसलिए सरकार की प्राथमिकता ऐसी होनी चाहिए कि देश का कोई भी बच्चा चाहे वह किसी भी आर्थिक या सामाजिक पृष्ठभूमि से आता हो, संसाधन विहीन होने के कारण अपनी पढ़ाई न छोड़े। शिक्षा के बजट में बढ़ोतरी और सही निवेश ही एक मजबूत और सचमुच 'विकसित भारत' का निर्माण कर सकता है
Susmita Rani is a journalist and content writer associated with Samridh Jharkhand. She regularly writes and reports on grassroots news from Jharkhand, covering social issues, agriculture, administration, public concerns, and daily horoscopes. Her writing focuses on factual accuracy, clarity, and public interest.


