संगीत नाटक अकादमी के नाट्य महोत्सव में कलाकारों ने मंच पर उतारा 1857 का पलामू विद्रोह

संगीत नाटक अकादमी और नगर निगम के सहयोग से हुआ आयोजन

संगीत नाटक अकादमी के नाट्य महोत्सव में कलाकारों ने मंच पर उतारा 1857 का पलामू विद्रोह
मेदिनीनगर में आयोजित नाट्य महोत्सव में पलामू के स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित नाटक का मंचन करते कलाकार।

मेदिनीनगर में संगीत नाटक अकादमी और नगर निगम के सहयोग से आयोजित नाट्य महोत्सव में मासूम आर्ट ग्रुप ने 'सोचो कि आजादी के असली नायक कौन रहे थे और बोलो वंदे मातरम्' नाटक का प्रभावशाली मंचन किया।

पलामू: मेदिनीनगर पलामू बुधवार की शाम पलामू की आजादी का इतिहास उस समय जीवंत हो उठा जब कलाकारों ने अपनी अद्भुत प्रदर्शन से दर्शकों की आंखें नम कर दी। मौका था मासूम आर्ट ग्रुप द्वारा नाटक सोचो कि आजादी के असली नायक कौन रहे थे और बोलो बंदे मातरम के मंचन का। संगीत नाटक अकादमी द्वारा और मेदिनीनगर नगर निगम के सहयोग से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। राष्ट्रगान वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने और महाकवि कालिदास जयंती के अवसर पर देश के 150 शहरों में यह आयोजन कराया गया था, जिसमे एक मेदिनीनगर भी शामिल था , जहां मासूम आर्ट ग्रुप ने अपनी नाटक प्रस्तुत की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रशिक्षु आईएएस रित्विक मेहता व मेयर अरुणा शंकर तथा संगीत नाटक अकादमी के सदस्य नंदलाल नायक, नाट्यकार राकेश रमन, संत मरियम स्कूल के निदेशक सह मासूम के संरक्षक अविनाश देव, बीजेपी के जिलाध्यक्ष अमित तिवारी, कवि रविशंकर पाण्डेय , पूर्व सैनिक ब्रजेश शुक्ला आदि मौजूद थे। इस अवसर पर प्रशिक्षु आईएएस रित्विक मेहता ने कहा कि इस नाटक को देखने के बाद उन्हें पलामू का इतिहास के बारे में कई जानकारियां मिली। मेयर अरुणा शंकर ने कहा कि जिस शिद्दत से कलाकारों ने पलामू के इतिहास को जीवंत बनाया वो प्रशंसनीय है। संगीत नाटक अकादमी के सदस्य नंदलाल नायक ने कहा कि मासूम आर्ट ग्रुप के कलाकारों ने साबित किया है कि उन्हें अगर मंच मिले तो कही भी नाटक से दर्शकों को बांध कर रख सकते है। उन्होंने कहा कि संगीत नाटक अकादमी द्वारा जो पहल किया गया है वो सराहनीय है। कार्यक्रम का संचालन शिव शंकर प्रसाद एवं शालिनी श्रीवास्तव ने की। 

क्या दिखाया गया नाटक में 

नाटक में सन 1857 के सिपाही विद्रोह के समय पलामू में हुई जनक्रांति की धधकती ज्वाला को दिखाया गया है। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ नीलांबर - पीताम्बर, राजा भवानी बक्स राय, परमानंद भोक्ता, रानी चंद्रावती कुंवर सहित उस समय पलामू के अन्य चेरो, भोक्ता, खरवार विद्रोहियों के संग्राम का सशक्त चित्रण नाटक के माध्यम से किया गया है। साथ ही कॉर्नेल डाल्टन, मेजर मैकडॉनल्ड जैसे अंग्रेजी हुक्मरानों की अत्याचार को भी दर्शाया गया है। इतिहास के पन्नो को मंच तक साकार करने में कलाकारों के अभिनय के साथ साथ विनय चौहान का प्रकाश व्यवस्था, राजा सिन्हा, विजय राम, सिकंदर कुमार, आनंद रवि और अदनान कासिफ का म्यूजिक की भी अहम भूमिका रही। मंच सज्जा संजीत प्रजापति का था। जीवन प्रकाश का ध्वनि व्यवस्था भी सराहनीय रही। 

ये थे कलाकार 

प्रस्तुत नाटक में राजा भवानी बक्स राय की भूमिका में सैकत चटर्जी, बूढ़ा बाबा की भूमिका में कामरूप सिन्हा, रंगलाल भेदिया की भूमिका में राज प्रतीक पाल, मेजर मैकडॉनल्ड की भूमिका में राहुल कुमार, रानी चंद्रावती कुंवर की भूमिका में मुनमुन चक्रवर्ती की काफी सराहना हुई। इसके अलावा अन्य भूमिकाओं में उज्ज्वल सिन्हा, अमर्त्य पंडित, अरिंदम पंडित, प्रकाश संगम, संजीव कुमार राम, गिरेंद्र यादव, आनंद प्रजापति, अमर कुमार भांजा, श्यामली घोष, आनंद गुप्ता, कनक लता तिर्की, परिणीता पाल, आदर्श पांडेय, मो नसीम, शहजादा तालिब, प्रकाश ठाकुर, मुकेश विश्वकर्मा आदि शामिल थे। सहयोग अविनाश तिवारी का था।

इन्हें किया गया सम्मानित

कार्यक्रम में संगीत नाटक अकादमी के सदस्य नंदलाल नायक, पलामू की आजादी की लड़ाई को लेकर कई पुस्तक के रचयिता प्रो राकेश कुमार सिंह, डॉ रमेश चंचल, नाट्यकार राकेश रमण, ट्राइवल फैशन डिजाइनर सुमंगल नाग, बॉक्स पापुली के क्रिएटिव हेड सर्वेश मिश्रा, लाइट डिजाइनर विनय चौहान, ध्वनि व्यवस्थापक जीवन प्रकाश को सम्मानित किया गया।

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Edited By: Susmita Rani
Susmita Rani Picture

Susmita Rani is a journalist and content writer associated with Samridh Jharkhand. She regularly writes and reports on grassroots news from Jharkhand, covering social issues, agriculture, administration, public concerns, and daily horoscopes. Her writing focuses on factual accuracy, clarity, and public interest.

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