Pakur News: बाल संरक्षण को लेकर संवेदनशीलता कार्यक्रम, 80 प्रतिभागियों ने लिया सुरक्षित बचपन का संकल्प
मानव तस्करी, बाल विवाह और बाल श्रम की रोकथाम के लिए सामूहिक निगरानी पर जोर
पाकुड़ के अंबाजोड़ा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में बाल संरक्षण को लेकर एक दिवसीय संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पंचायत, आंगनबाड़ी, SHG, विद्यालय प्रबंधन समिति, PLV और पारंपरिक धर्मगुरुओं समेत करीब 80 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
पाकुड़: बच्चों को शोषण, मानव तस्करी, बाल विवाह और बाल श्रम जैसी समस्याओं से बचाने के उद्देश्य से झारखंड विकास परिषद द्वारा संचालित ‘सुरक्षित बचपन के लिए दामिन पहल’ परियोजना के तहत अम्बाजोड़ा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में एक दिवसीय संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्राम स्तर पर कार्यरत विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और बाल संरक्षण को सामुदायिक जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, पंचायती राज संस्थाओं के सदस्य, स्वयं सहायता समूह (SHG), विद्यालय प्रबंधन समिति, पैरालीगल वालंटियर (PLV) और पारंपरिक धर्मगुरु सहित अन्य ग्राम स्तरीय संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।ग्राम स्तर पर मजबूत होगा बाल संरक्षण तंत्र
प्रतिनिधियों ने बताई अपनी जिम्मेदारी
SHG अध्यक्ष असूनता मरांडी और आंगनबाड़ी सेविका कर्मिला मरांडी ने कहा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाएं गांव-गांव जाकर लोगों से जुड़ी रहती हैं। ऐसे में मानव तस्करी और दलालों की पहचान को लेकर महिलाओं को सक्रिय किया जाएगा। बच्चों को बहला-फुसलाकर ले जाने जैसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना संबंधित हेल्पलाइन या प्रशासन को देने की बात कही गई।
विद्यालय प्रबंधन समिति की सदस्य राखी हांसदा ने कहा कि विद्यालय की बैठकों में बच्चों की नियमित उपस्थिति को प्रमुखता दी जाएगी। अभिभावक-शिक्षक बैठकों के माध्यम से माता-पिता को बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
पारंपरिक धर्मगुरु नुनुजी हांसदा ने कहा कि समाज में धर्मगुरुओं की बात का प्रभाव होता है। इसलिए पूजा-पाठ और ग्राम बैठकों के माध्यम से शिक्षा के महत्व, बाल तस्करी और बाल विवाह के दुष्परिणामों को लेकर लोगों को लगातार जागरूक किया जाएगा।
बाल संरक्षण कानून और रिपोर्टिंग तंत्र की दी जानकारी
प्रशिक्षण एवं चर्चा सत्र का संचालन परियोजना समन्वयक मनोरंजन सिंह ने किया। इस दौरान ग्राम स्तरीय संस्थानों की भूमिका, बाल संरक्षण कानून, मानव तस्करी की पहचान और रोकथाम, सरकारी योजनाओं तथा बाल अधिकार उल्लंघन की स्थिति में रिपोर्टिंग तंत्र पर विस्तार से जानकारी दी गई।
प्रतिभागियों को पॉक्सो अधिनियम, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम और बाल श्रम निषेध कानून की प्रमुख जानकारियों से अवगत कराया गया। साथ ही मानव तस्करी के संभावित तरीकों, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और बच्चों की सहायता के लिए उपलब्ध तंत्र की जानकारी दी गई।
इसके अलावा जरूरतमंद बच्चों को फोस्टर केयर, स्पॉन्सरशिप और किशोरी सशक्तिकरण जैसी योजनाओं से जोड़ने पर भी चर्चा हुई। बाल अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में पंचायत, थाना और जिला बाल संरक्षण इकाई तक सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया समझाई गई।
‘बाल मैत्री गांव’ बनाने पर जोर
मनोरंजन सिंह ने कहा कि जब आंगनबाड़ी, पंचायत, स्वयं सहायता समूह, विद्यालय और धर्मगुरु मिलकर काम करेंगे, तभी गांव को वास्तविक रूप से ‘बाल मैत्री गांव’ बनाया जा सकेगा। उन्होंने सभी संस्थानों से बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
80 प्रतिभागियों ने लिया संकल्प
कार्यक्रम में अंबाजोड़ा गांव के लगभग 80 प्रतिभागियों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने संस्थानों के माध्यम से बाल संरक्षण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने और बच्चों को शोषण, तस्करी, बाल विवाह एवं बाल श्रम से बचाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
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