पाकुड़ के बासतेकुंडी गांव का लातार टोला व छापा टोला आजाद की 74 सालों बाद भी सड़क व बुनियादी सुविधाओं से वंचित
सरकार व अधिकारियों से गुहार लगाने का भी नहीं होता कोई असर
गर्भवती महिलाओं, रोगियों व बुजुर्ग एवं बच्चों को होती है काफी दिक्कत

@HemantSorenJMM @HansdakVijay @ProfStephenM @dcpakur और प्रखंड विकास पदाधिकरी,पकुड़िया के नाम ट्विट आवेदन,मोबाइल नंबर आवेदन में संलग्न.
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के बिना उन्हें काफी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है.सभी सिर्फ अश्वासन ही देते आये है.लेकिन सड़क कोई नही बना रहा है. pic.twitter.com/W2Yru0O1fk— SACHCHIDANAND SOREN (@Sachchidanand_S) August 14, 2020
यहां के विधायक स्टीफन मरांडी और सांसद विजय हांसदा हैं. ग्रामीणों ने पिछली सरकार के समय मुख्यमंत्री तक सड़क का गुहार लगायी थी, लेकिन सड़क नहीं बनी. ग्रामीणों ने इसके साथ-साथ उपायुक्त और प्रखंड विकास पदाधिकारी से भी गुहार लगायी है, लेकिन पक्की सड़क का निर्माण नहीं किया जा रहा है. यह कच्ची सड़क मात्र दो किलोमीटर दूरी की है, जो शिबू मोड़ से भागड़ नदी तक पड़ती है.
माननीय मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM @JharkhandCMO जी 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर में ग्रामीणों के सड़क मांग को पूरा करने का कृपा करे.गांव-बासेतकुण्डी,पंचायत-बासेतकुण्डी,प्रखंड-पकुड़िया,जिला-पाकुड़ | विधान सभा-महेशपुर, लोक सभा-राजमहल |
ग्रामीणों का आवेदन संलग्न | pic.twitter.com/FFNSLTgBc6— SACHCHIDANAND SOREN (@Sachchidanand_S) August 14, 2020
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षा में हम ग्रामीणों को मुख्य मार्ग तक जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. वर्षा से कच्ची सड़क इतनी ख़राब हो जाती है कि उस पर गाय, बैल, इंसान, मोटर साइकिल तक चलना मुश्किल हो जाता है. ग्रामीणों यह भी कहते हैं कि सभी राजनीतिक पार्टिया चुनाव के समय वोट लेने आती हैं और कहती हैं कि सड़क बन जाएगी, लेकिन चुनाव के बाद कोई नहीं आता है और सड़क भी नहीं बनती है.
@HemantSorenJMM @JharkhandCMO @HansdakVijay @ProfStephenM @dcpakur @JMM_Pakur ग्रामीण आवेदन लिखते हुए और संताली में यह बताये की यह सड़क के लिये आवेदन नेट दुवारा भेजा जाएगा। pic.twitter.com/C6whJNuWzW
— SACHCHIDANAND SOREN (@Sachchidanand_S) August 14, 2020
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इस वक्त कोई बीमार पड़ जाये या गर्भवती को हॉस्पिटल ले जाना पड़े तो कोई गाड़ी या एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती है. ऐसी हालत में ग्रामीणों को खटिया के माध्यम से दो किलोमीटर दूर मुख्य मार्ग तक मरीज व गर्भवती को ले कर जाना पड़ता है. तभी किसी गाड़ी या एंबुलेंस के माध्यम से उन्हें अस्पताल ले जाते हैं. ग्रामीणों ने लॉकडाउन में सामाजिक कार्यकर्ता के द्वारा ट्विटर के माध्यम से मुख्यमंत्री, विधायक, सांसद, उपायुक्त, प्रखंड विकास पदाधिकारी से पक्की सड़क बनाने कि मांग की है.
स्वतन्त्रा दिवस पर गांव भ्रमण का एक दृश्य :
साहब देश तो आजाद हो गया.74वां स्वतंत्रता दिवस का झंडा फर गया लेकिन साहब हम लोगो को मुख्यधारा में कब जोड़ियेगा?
साहब अबुवा दिसोम अबुवा राज(हमारे देश मे हमारा राज) कब आएगा?हमें पीने का पानी का अधिकार कब मिलेगा?हमे सड़को से कब जोड़ियेगा ? pic.twitter.com/pA5WefIZUy— SACHCHIDANAND SOREN (@Sachchidanand_S) August 15, 2020
इस मौके पर ग्राम प्रधान परमेश्वर मुर्मू के साथ रामसोना मरांडी, गणेश रविदास, कोरनेल हेम्ब्रोम, नरेश हेम्ब्रोम, बबलू मरांडी, जगदीश बास्की, नागेन सोरेन आदि उपस्थित थे.
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