Koderma News: राष्ट्रीय उर्दू सेमिनार का भव्य आयोजन, "समकालीन समस्याएं और संभावनाएं" विषय पर जुटे देशभर के शिक्षाविद
भाषाई शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए झारखंड में बने 'लैंग्वेज यूनिवर्सिटी
कोडरमा के रांची-पटना रोड स्थित विवाह भवन में अंजुमन तरक्की उर्दू हिंद, कोडरमा के तत्वावधान में "उर्दू : समकालीन समस्याएं और संभावनाएं" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी के प्रो. डॉ. सफदर इमाम कादरी की अध्यक्षता में आयोजित इस सेमिनार में वक्ताओं ने थानों, ब्लॉकों और जिला मुख्यालयों में उर्दू अनुवादकों की बहाली न होने पर चिंता जताई और राज्य में लैंग्वेज यूनिवर्सिटी की स्थापना की मांग की। इस अवसर पर उर्दू को डिजिटल तकनीक व विज्ञान से जोड़ने की वकालत की गई तथा मैट्रिक व इंटर के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।
कोडरमा: अंजुमन तरक्की उर्दू हिंद, कोडरमा के तत्वावधान में रांची-पटना रोड स्थित विवाह भवन में रविवार को एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “उर्दू : समकालीन समस्याएं और संभावनाएं” रहा, जिसमें उर्दू भाषा की वर्तमान चुनौतियों, शिक्षा, रोजगार और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी, पटना के प्रो. डॉ. सफदर इमाम कादरी ने की, जबकि मंच संचालन मास्टर सज्जाद हुसैन ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. मोहम्मद सिराज मिस्बाही के स्वागत भाषण से हुई। अंजुमन तरक्की उर्दू कोडरमा के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद अहमद जमी मिस्बाही ने सेमिनार के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।

राष्ट्रीय जन क्रांति मोर्चा के सुप्रीमो मौलाना अब्दुल मोबीन रिजवी ने कहा कि उर्दू भारत की गंगा-जमुनी तहजीब और साझा संस्कृति की पहचान है। डॉ. साजिद हुसैन नदवी ने उर्दू शिक्षा की स्थिति पर चिंता जताई, जबकि मौलाना नूरुद्दीन अजहरी ने घरों और सोशल मीडिया के माध्यम से उर्दू को बढ़ावा देने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में उर्दू विषय में बेहतर अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को मेडल एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने नई पीढ़ी को उर्दू भाषा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया।
सेमिनार में बतौर शोध पत्र लेखक और वक्ता मास्टर मोहम्मद परवेज मुशर्रफ, शिक्षिका शमसुन निशा, मास्टर मोहम्मद जावेद, शिक्षिका रुखसाना खातून, मास्टर अताउल मुस्तफा, मास्टर मोहम्मद उमर फारूक, मोहम्मद मुबारक, नौशाद आलम,मास्टर अब्दुल सत्तार और मास्टर वसी अहमद खान ने भी अपने विचार साझा किए। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। सेमिनार में उर्दू भाषा के संरक्षण, आधुनिक समय के अनुरूप उसके विकास और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने पर विशेष बल दिया गया।
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