Giridih News : मॉडल अनुमंडल की हकीकत: बस स्टैंड नहीं, शौचालय नहीं, विकास सिर्फ कागजों में
शाम के बाद स्वास्थ्य सुविधा के लिए 60-70 किमी का सफर
सरिया को कागजों पर मॉडल अनुमंडल और नगर पंचायत का दर्जा मिला है, लेकिन जमीनी हकीकत में बस स्टैंड, सार्वजनिक शौचालय और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं का अब भी अभाव है।
सरिया : कल्पना कीजिए एक ऐसा शहर, जहाँ सुबह-सुबह आप ट्रेन से उतरते हैं और सबसे पहला सवाल होता है—“भाई, बस स्टैंड कहाँ है?” और जवाब मिलता है हँसी के साथ—“अरे भाई, बस स्टैंड? वो तो अभी प्लानिंग में है... शायद 2047 तक!”

सरिया को अनुमंडल का दर्जा जरूर मिला है, लेकिन अनुमंडल स्तरीय अस्पताल की सुविधा आज भी लोगों के लिए सपना बनी हुई है। एकमात्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में होम्योपैथिक डॉक्टरों की मौजूदगी तो है, लेकिन एलोपैथिक इलाज की सुविधा लगभग नदारद है। शाम पांच बजे के बाद यदि किसी के साथ दुर्घटना हो जाए तो लोगों को 72 किलोमीटर दूर गिरिडीह या 62 किलोमीटर दूर हजारीबाग का रुख करना पड़ता है।
शहर में स्ट्रीट लाइटें जरूर लगाई गई हैं। शुरुआत में उनकी तस्वीरें खींचकर सोशल मीडिया पर खूब साझा भी की गईं, लेकिन कुछ ही महीनों में अधिकांश लाइटें बंद हो चुकी हैं। अब रात के समय पूरा इलाका अंधेरे में डूबा रहता है, मानो किसी भूतिया फिल्म का दृश्य हो। स्थानीय लोग मजाक में कहते हैं—“यहाँ बिजली विभाग का नारा है—रोशनी तभी, जब वोट चाहिए!”
हाल ही में नगर पंचायत का चुनाव भी हुआ और भारी मतों से अध्यक्ष चुने गए। भाषणों में कहा गया कि अब विकास की नई सुबह होगी। लेकिन स्थानीय लोग आपस में फुसफुसाते हैं कि सुबह तो हो गई, मगर बस स्टैंड, शौचालय, अस्पताल और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं अभी भी अंधेरे में ही सो रही हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यही वह ‘मॉडल अनुमंडल’ है, जहाँ कागजों पर सब कुछ मौजूद है—अनुमंडल, नगर पंचायत, अध्यक्ष और स्ट्रीट लाइट—लेकिन जमीन पर बुनियादी सुविधाओं का अब भी इंतजार है।
