Giridih News : मॉडल अनुमंडल की हकीकत: बस स्टैंड नहीं, शौचालय नहीं, विकास सिर्फ कागजों में
शाम के बाद स्वास्थ्य सुविधा के लिए 60-70 किमी का सफर
सरिया को कागजों पर मॉडल अनुमंडल और नगर पंचायत का दर्जा मिला है, लेकिन जमीनी हकीकत में बस स्टैंड, सार्वजनिक शौचालय और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं का अब भी अभाव है।
सरिया : कल्पना कीजिए एक ऐसा शहर, जहाँ सुबह-सुबह आप ट्रेन से उतरते हैं और सबसे पहला सवाल होता है—“भाई, बस स्टैंड कहाँ है?” और जवाब मिलता है हँसी के साथ—“अरे भाई, बस स्टैंड? वो तो अभी प्लानिंग में है... शायद 2047 तक!”
पेशाब लगने पर आप पूरे 20 हजार आबादी वाले इस ‘नगर पंचायत’ में इधर-उधर भटकते रहते हैं, लेकिन एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं मिलता। आखिरकार कोई बुजुर्ग दया दिखाते हुए कहता है, “बेटा, नदी के किनारे चले जाओ... वही हमारा पब्लिक टॉयलेट है।” स्वच्छ भारत अभियान का झंडा यहाँ पोस्टरों पर जरूर लहराता है, लेकिन जमीनी हकीकत में ‘स्वच्छ’ शब्द कहीं नजर नहीं आता।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यही वह ‘मॉडल अनुमंडल’ है, जहाँ कागजों पर सब कुछ मौजूद है—अनुमंडल, नगर पंचायत, अध्यक्ष और स्ट्रीट लाइट—लेकिन जमीन पर बुनियादी सुविधाओं का अब भी इंतजार है।
