Pax Silica Alliance में भारत शामिल, AI-चिप सप्लाई चेन में बड़ा कदम
नई दिल्ली: भारत ने शुक्रवार को अमेरिका की अगुवाई वाले पैक्स सिलिका गठबंधन में औपचारिक रूप से कदम रखा दिया। दिल्ली में आयोजित AI इंपैक्ट समिट के दौरान केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए, जो तकनीकी क्षेत्र में दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई देगा।

पैक्स सिलिका का पूरा बैकग्राउंड

इस गठबंधन का मकसद खदानों से चिप फैक्ट्री तक और फिर डेटा सेंटर्स तक पूरी सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना है। चीन रेयर अर्थ एलिमेंट्स और क्रिटिकल मिनरल्स में 90 फीसदी से ज्यादा कंट्रोल रखता है, जिससे पश्चिमी देशों को खतरा महसूस हो रहा था। अब यह अलायंस उन देशों को जोड़ रहा है जो तकनीक के लिए भरोसेमंद पार्टनर बन सकें।

कौन-कौन से देश हैं इसमें शामिल?
शुरुआत में दिसंबर 2025 के समिट पर अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, यूनाइटेड किंगडम ने डिक्लेरेशन साइन किया। बाद में नीदरलैंड्स, इजरायल, यूएई, कतर और ग्रीस जैसे देश जुड़े। भारत अब 12वें सदस्य के तौर पर एंटर हुआ है, जिससे इसकी ताकत और बढ़ गई।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि भारत की इंजीनियरिंग स्किल्स, मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी और क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग की ताकत इस गठबंधन के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। समिट में अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग भी मौजूद थे।

भारत-अमेरिका रिश्तों पर क्या असर?
भारत का यह कदम तब आया जब दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर कुछ तनाव था, लेकिन हाल ही में इंटरिम एग्रीमेंट पर सहमति बनी। विशेषज्ञ मानते हैं कि पैक्स सिलिका से द्विपक्षीय सहयोग गहरा होगा, खासकर इमर्जिंग टेक और सप्लाई चेन रेजिलिएंस में। इससे चीन को बैलेंस करने में भारत की स्ट्रैटेजिक भूमिका मजबूत हो जाएगी।
भारत जैसे देश के जुड़ने से ग्लोबल AI इकोनॉमी में नई संभावनाएं खुलेंगी, जहां एनर्जी, मिनरल्स और हार्डवेयर की डिमांड आसमान छू रही है। यह स्टेप इंडिया-यूएस ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को और मजबूत करेगा।
