क्या फिर भाजपा अकेले दम पर महाराष्ट्र में सरकार बना लेगी?

क्या फिर भाजपा अकेले दम पर महाराष्ट्र में सरकार बना लेगी?

 

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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर शिवसेना के तीखे तेवर पर भाजपा ने आज बड़ा दाव चल दिया है. भाजपा की ओर से खुद राज्य में पार्टी का चेहरा व निवर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मोर्चा संभाल लिया है. फडणवीस ने आज शिवसेना की मांग और कटाक्ष पर अपने विनम्र अंदाज में कठोर जवाब दिया. फडणवीस ने इसके साथ ही यह भी संकेत दे दिया कि शिवसेना अगर अपनी जिद पर अड़ी रही तो वे अकेले दम पर सरकार गठन की ओर बढ जाएंगे.

 

देवेंद्र फडवणीस ने शिवसेना के ढाई-ढाई साल के सीएम पद बंटवारे की मांग पर कहा कि उनके सामने शिवसेना के साथ इस संबंध में कभी कोई बात ही नहीं हुई है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह व शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बीच ऐसी कोई गोपनीय वार्ता हुई हो तो वे इसके बारे में नहीं कह सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना की किसी मांग पर वे मेरिट के आधार पर ही विचार करेंगे.

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उल्लेखनीय है कि 288 विधानसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में भाजपा को 105, उसकी सहयोगी शिवसेना को 56 सीटें आयी हैं. वहीं, विपक्षी गठजोड़ में शरद पवार की एनसीपी को 54 व कांग्रेस को 42 सीटें प्राप्त हुई है. पिछली बार की तुलना में इस बार भाजपा की 17 तो शिवसेना की सात सीटें कम हैं. वहीं, एनसीपी को 13 व कांग्रेस को दो अधिक सीटें प्राप्त हुई हैं.

 

भाजपा शेष तीनों प्रमुख पार्टियों में किसी में भी टूट-फूट नहीं होती है तो अकेले दम पर सरकार नहीं बना पाएगी. भाजपा के सांसद संजय ककाडे ने यह कह कर हलचल पैदा कर दी कि शिवसेना के नवनिर्वाचित 45 विधायक मुख्यमंत्री के संपर्क में हैं और उनके पास साथ मिल कर सरकार बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. वहीं, इसके कुछ देर बाद फडणवीस ने कहा कि 10 निर्दलीय विधायक उनके साथ हैं और पांच और का समर्थन मिलने की उम्मीद है. यानी मुख्यमंत्री ने सहयोगी शिवसेना पर सीधे तौर पर ऐसी टिप्पणी तो नहीं कि लेकिन यह संकेत दे दिया कि वे अकेले दम पर बहुमत के लिए प्रयासरत हैं.

 

ध्यान रहे कि पिछली बार महाराष्ट्र में भाजपा व शिवसेना का गठबंधन विधानसभा चुनाव में टूट गया था और भाजपा अकेले बूते बड़ी पार्टी बन कर सरकार बनाने में सफल रही थी. शिवसेना को मजबूरन बाद में सरकार में शामिल होना पड़ा. निश्चित रूप से इस बार उसके पास पिछली बार से 17 सीटें कम हैं, लेकिन उसने यह संकेत दे दिया है कि वह जरूरी 41 विधायकों की संख्या को जुटाने के लिए कोई भी चाल सकती है. ऐसे में शिवसेना के सामने अपने घर को बचाये रखना होगा और भाजपा से सम्मानजनक समझौता करना होगा. भाजपा-शिवसेना के अलावा सरकार गठन का एक विकल्प यह भी है कि भाजपा-एनसीपी की सरकार बने. दूसरा विकल्प यह है कि शिवसेना को एनसीपी-कांग्रेस बाहर से समर्थन दे और वह सरकार बना ले. राजनीति में कुछ भी संभव है, लेकिन अब सभी निगाहें कल अमित शाह एवं उद्धव ठाकरे के बीच होने वाली मुलाकात पर टिकी है.

 

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Edited By: Samridh Jharkhand

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