Climate कहानी: एनर्जी सेक्टर में उगा रिन्यूबल का सूरज: ‘सूर्य घर योजना’ से रफ्तार तो बढ़ी, पर राह अभी लंबी है
गुजरात और केरल में रूफटॉप सोलर में सबसे तेज़ी, राष्ट्रीय औसत कम
भारत में प्रधानमंत्री सूर्या घर योजना (PMSGY) ने रेज़िडेंशियल रूफटॉप सोलर सेक्टर में तेजी लायी है। एक साल में 4,946 मेगावॉट क्षमता स्थापित की गई और ₹9,280 करोड़ की सब्सिडी जारी हुई। गुजरात और केरल में इंस्टॉलेशन दर सबसे अधिक है, जबकि राष्ट्रीय औसत अभी 22.7% है। प्रमुख चुनौतियाँ हैं कम जागरूकता, कठिन फाइनेंस प्रक्रिया, सप्लाई चेन और शिकायत निवारण प्रणाली की कमज़ोरियाँ। Domestic Content Requirement और plug-and-play सोलर किट्स जैसी पहलें भविष्य में इंस्टॉलेशन को आसान बना सकती हैं।
भारत में अब छतें सिर्फ़ बारिश नहीं, सूरज भी पकड़ रही हैं। प्रधानमंत्री सूर्या घर योजना (PMSGY) ने देश के रेज़िडेंशियल रूफटॉप सोलर सेक्टर को नई दिशा दी है। लॉन्च के महज़ एक साल में 4,946 मेगावॉट क्षमता स्थापित की जा चुकी है, और अब तक ₹9,280 करोड़ (लगभग 1.05 बिलियन डॉलर) की सब्सिडी जारी हो चुकी है। लेकिन कहानी यहाँ खत्म नहीं होती — क्योंकि जहाँ रोशनी बढ़ रही है, वहीं कुछ साये भी साथ चल रहे हैं। तेज़ी आई, लेकिन असमानता बरकरार IEEFA और JMK Research की नई रिपोर्ट बताती है कि जुलाई 2025 तक 57.9 लाख घरों ने रूफटॉप सोलर के लिए आवेदन किया। यह मार्च 2024 की तुलना में चार गुना वृद्धि है। फिर भी, कुल 1 करोड़ इंस्टॉलेशन के लक्ष्य का सिर्फ 13.1% ही पूरा हो सका है। यानी उत्साह ज़रूर बढ़ा है, पर ज़मीन पर रफ्तार अभी सीमित है।
गुजरात और केरल इस रेस में सबसे आगे हैं। दोनों राज्यों का conversion ratio 65% से अधिक है — मतलब, वहाँ जितने लोग आवेदन करते हैं, उनमें से दो-तिहाई के घरों पर सोलर लग भी जाता है। इसका कारण साफ है: परिपक्व सोलर इकोसिस्टम, मज़बूत वेंडर नेटवर्क और उपभोक्ताओं में जागरूकता। इसके उलट, देश का औसत installation-to-application conversion ratio सिर्फ़ 22.7% है — यह बताता है कि इच्छुक घरों में से चार में से तीन को अभी भी रास्ता नहीं मिल पा रहा।
राज्य आगे बढ़ रहे हैं — अपने तरीके से

सपनों के बीच की हकीकत
घरेलू सामग्री और डिजिटल सुधार

आगे की दिशा: प्लग-एंड-प्ले सोलर
रिपोर्ट कहती है कि सोलर मार्केट में अभी तक एकरूप गुणवत्ता की कमी है। अगर मानकीकृत plug-and-play सोलर किट्स (जिसमें मॉड्यूल, इन्वर्टर, स्ट्रक्चर, और केबल एक पैक में हों) तैयार की जाएँ, तो इंस्टॉलेशन आसान और तेज़ हो सकता है। यही दृष्टिकोण भविष्य के सोलर विस्तार की कुंजी बन सकता है।
निष्कर्ष: रोशनी की यह यात्रा लंबी है, लेकिन दिशा सही है
PMSGY ने साबित किया है कि भारत की छतें अब सिर्फ़ धूप से नहीं, उम्मीद से भी भर रही हैं। सिर्फ़ एक साल में 4.9GW जोड़ना मामूली बात नहीं है। लेकिन अगर 2027 तक 30GW का लक्ष्य हासिल करना है, तो सब्सिडी से ज़्यादा ज़रूरत है — डिजिटल पारदर्शिता, मानकीकृत समाधान, और उपभोक्ता भरोसे की। जलवायु कार्रवाई की असली परीक्षा अब नीतियों में नहीं, बल्कि उन छतों पर होगी जहाँ कोई परिवार सूरज से अपनी पहली बिजली बना रहा होगा।
Related Posts

Latest News

