असम में मिली दुर्लभ ‘बेंट-टोएड गेको’ छिपकली, वैज्ञानिक भी हुए हैरान

उरपाद बील में पहली बार आधिकारिक रूप से दर्ज हुई दुर्लभ प्रजाति

असम में मिली दुर्लभ ‘बेंट-टोएड गेको’ छिपकली, वैज्ञानिक भी हुए हैरान
असम के उरपाद बील में दिखी दुर्लभ बेंट-टोएड गेको छिपकली।

असम के ग्वालपारा जिले स्थित उरपाद बील में दुर्लभ बेंट-टोएड गेको छिपकली देखी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहली बार है जब इस प्रजाति को राज्य में आधिकारिक रूप से दर्ज किया गया है।

ग्वालपारा (असम): असम के ग्वालपारा जिले स्थित उरपाद बील (झील) में दुर्लभ प्रजाति की बेंट-टोएड गेको छिपकली (साइर्टोडैक्टिलस बापमे) देखी गई है। इसे राज्य की समृद्ध जैव विविधता के लिए एक महत्वपूर्ण खोज माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रजाति पहली बार असम में आधिकारिक रूप से दर्ज की गई है।

शोधकर्ताओं और संरक्षणवादियों ने इस खोज को असम के वेटलैंड और वन पारिस्थितिकी तंत्र की समृद्धि का महत्वपूर्ण संकेत बताया है। उनका कहना है कि यह क्षेत्र अब भी कई दुर्लभ और कम ज्ञात प्रजातियों को सुरक्षित आश्रय प्रदान कर रहा है।

असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने इस खोज को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि असम की प्रकृति लगातार नए आश्चर्य प्रस्तुत कर रही है। मुख्यमंत्री ने लिखा कि उरपाद बील में बेंट-टोएड गेको का पहला पक्का रिकॉर्ड राज्य के इकोसिस्टम द्वारा समर्थित असाधारण जैव विविधता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के निरंतर संरक्षण प्रयास नाजुक आवासों को सुरक्षित रखने में मदद कर रहे हैं, जहां विभिन्न प्रजातियां फल-फूल रही हैं।

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उरपाद बील लंबे समय से अपने पारिस्थितिक महत्व के लिए जाना जाता है और यह कई जलीय एवं स्थलीय जीवों का प्राकृतिक आवास रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दुर्लभ गेको प्रजाति की मौजूदगी पर्यावरण संरक्षण और आवास सुरक्षा उपायों की सफलता को दर्शाती है।

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विशेषज्ञों ने बताया कि बेंट-टोएड गेको साइर्टोडैक्टिलस वंश से संबंधित है, जो विश्वभर में गेको की सबसे विविध प्रजातियों में गिना जाता है। इस समूह की कई प्रजातियां सीमित आवास क्षेत्रों में पाई जाती हैं और पर्यावरणीय बदलावों के प्रति अत्यंत संवेदनशील मानी जाती हैं।

संरक्षणवादियों ने पूर्वोत्तर भारत के वेटलैंड, जंगल और अन्य प्राकृतिक इकोसिस्टम की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि दुर्लभ और स्थानिक वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण के लिए निरंतर वैज्ञानिक अनुसंधान और पर्यावरणीय निगरानी बेहद आवश्यक है।

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Edited By: Mohit Sinha
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Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.

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