कोन आहे इ संजय सेठ नी जानौ थों
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महज 10 से 15 किलोमीटर की दूरी पर लोगों के मन टटोलने पर ये साफ हो जाता है, कि शहर से चंद दूरी पर भाजपा प्रत्याशी लोगों से जुड़ाव के मुद्दे पर कितने गरीब हैं पेश है हमारे वरीय संवाददाता चंदन चौधरी की खास रिर्पोट ……….
रांची: भाजपा ने रांची लोकसभा सीट से अपना प्रत्याशी तो मैदान में उतार दिया है, लेकिन बगैर जमीनी हकिकत को जाने मैदान में किसी को भी प्रत्याशी बनाकर उतार देना भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। ये हम नहीं कह रहे, बल्कि ये स्थानीय वोटरों की राय है। वोटरों के मन को टटोलने हम सोमवार को रांची से ही सटे कुछ स्लम एरिया में जा पहुंचे। लोगों के मन की बात जानने का प्रयास किया, लेकिन इस दौरान चौकाने वाले खुलासे हुये। ज्यादातर वोटरों ने कहा कि वे किसी संजय सेठ नाम के व्यक्ति को जानते ही नहीं हैं। कईयों ने ये तक कह डाला कि संजय सेठ का नाम तक नहीं सुने हैं।
जाहिर है कि पार्टी ने ऐसे व्यंतिव पर अपना दाव खेला है, जिन्हें महज कुछ दूरी पर ही लोग नही जानते। जाहिर है कि भाजपा प्रत्याशी की राह इस सर्वेक्षण के बाद कांटो भरी प्रतित होती है। इस स्लम बस्ती में 75 वर्षीय गोपाल मिर्धा, महेश उरांव, बिरेंद्र मुंडा, गोपाल, बबलू व अन्य सहित दर्जनों लोगों ने बात करने पर ये बात बताई वे संजय सेठ को नही जानते हैं। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी सुबोधकांत सहाय पर पूछे गये सवाल पर कई ग्रामीणों ने कहा कि हां इन्हें जानते हैं और एकाध बार यहां आये भी हैं।
एक सख्श जिसने कहा जानते हैं, लेकिन मिले नही
बनिया गांव में सिर्फ जेेक्रियस टोप्पों ही एक मात्र व्यक्ति ऐसे मिले, जिन्होंने संजय सेठ को पहचानने की बात स्वीकारी। कहा कि रांची से संजय सेठ चुनाव लड़ रहे है, ये जानते हैं, लेकिन संजय कौन है ? नहीं जानता। सुबोधकांत के बारे में उन्होंने कहा कि उनसे मिले हैं, तो जातने हैं।
कोन हउ इ संजय: शीला
राजधानी के मोरहाबादी के पास स्थित बनियां गांव की निवासी शीला मुंडा ने अप्रत्याशित प्रतिक्रिया दी और लोकल भाषा में कहती है, कि कोन हउ इ संजय सेठ, मोय त नामे नई सुइन हों। शीला कहती है, कि आज तक कभी भी इनसे नही मिले हैं। जब जानते ही नही तो वोट कैसे देंगे। कभी हमारे गांव नहीं आये। उसने कहा कि नरेंद्र मोदी को तो जानते हैं, लेकिन संजय सेठ को नहीं।

न देखे न सुने: रीना
बस्ती की रहने वाली रीना मुंडा ने कहा कि संजय सेठ का तो कभी नाम भी नहीं सुने है और न कभी देखें है। कौन है संजय नहीं जानते, लेकिन नरेंद्र मोदी के जानते है।
आयेंगे तो जान सकेंगे: सुभाष
बस्ती के ही सुभाष ने भी ऐसी ही अनभिज्ञता जाहिर की है। उनका कहना है कि संजय सेठ कभी हमारी बस्ती में आये ही नहीं है और न ही हम उनके बारे में कभी सुने है। बस्ती में आयेंगे तभी न हमलोग जान सकेंगे।
सरकार जमीनी हकीकत तो जान लेती: चांदनी
पहली बार वोट दे रही चांदनी भी सरकार से काफी नाराज है। वो कहती है, कि सरकार वादे तो बहुत करती है, लेकिन उसे पूरा नहीं करती। सरकार आकर देखेगी तब न मालूम चलेगा। बाथरूम तक नहीं हैं, अभी भी हमलोग अपने रिश्तेदारों के यहां ही शौच के लिए जाते हैं। चांदनी भी संयज सेठ को नही जानने की बात कहती है। वोट देने के मसले पर कहती है, कि बस्ती के लोग जिन्हें देंगे मैं भी उसी को दूंगी।
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Edited By: Samridh Jharkhand
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