Ranchi News: बीआईटी मेसरा और गेल इंडिया के बीच समझौता, पूरे कैंपस में बिछेगा PNG नेटवर्क
बीआईटी मेसरा परिसर में स्वच्छ, सुरक्षित और ऊर्जा-कुशल ईंधन उपलब्ध कराने के लिए गेल इंडिया के साथ समझौता
बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी), मेसरा ने अपने परिसर में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क विकसित करने के लिए गेल (इंडिया) लिमिटेड के साथ समझौता किया है। इस साझेदारी के तहत आवासीय क्वार्टरों, हॉस्टलों, मैस सुविधाओं और कैंटीनों को PNG नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
रांची: देश को गैस आधारित अर्थव्यवस्था की ओर आगे बढ़ाने के भारत सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी), मेसरा ने अपने परिसर में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क विकसित करने के लिए गेल (इंडिया) लिमिटेड के साथ समझौता किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य कैंपस में स्वच्छ, सुरक्षित और ऊर्जा-कुशल ईंधन की सुविधा उपलब्ध कराना है।
समझौते पर गुरुवार को बीआईटी मेसरा के सम्मेलन कक्ष में आयोजित कार्यक्रम के दौरान औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर बीआईटी मेसरा के कुलपति प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना, कुलसचिव डॉ. राजेश जैन, संस्थान के डीन सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। गेल (इंडिया) लिमिटेड की ओर से मुख्य महाप्रबंधक पंचानन हलदर, महाप्रबंधक निखिल कुमार तथा अन्य अधिकारी कार्यक्रम में शामिल हुए।आवासीय क्वार्टर, हॉस्टल और कैंटीन को मिलेगा PNG कनेक्शन

स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ कैंपस की दिशा में कदम
प्राकृतिक गैस को सुरक्षित, किफायती, सुविधाजनक, पर्यावरण के अनुकूल और आसानी से संभालने योग्य ईंधन माना जाता है। संस्थान के अनुसार PNG नेटवर्क की स्थापना से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और परिसर में अधिक टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी।
बीआईटी मेसरा के कुलसचिव डॉ. राजेश जैन ने कहा कि सात दशकों से अधिक समय से संस्थान उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षणिक एवं आवासीय परिसर के विकास पर लगातार काम कर रहा है। गेल (इंडिया) लिमिटेड के साथ यह साझेदारी स्वच्छ ऊर्जा समाधान, स्थिरता और परिचालन दक्षता के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगी। साथ ही इससे छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए बेहतर एवं पर्यावरण अनुकूल परिसर वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी।
यह साझेदारी बीआईटी मेसरा में आधुनिक उपयोगिता प्रणालियों को टिकाऊ परिसर विकास के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे संस्थान की जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन और पर्यावरण के प्रति जागरूक बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता भी मजबूत होगी।
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