Hazaribagh News: पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने खनिज राजस्व को लेकर राज्य सरकार को घेरा
MDMR बिल के आर्थिक प्रभावों पर की चर्चा
हजारीबाग में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने खनिज राजस्व के मुद्दे पर हेमंत सोरेन सरकार को घेरा। उन्होंने ओडिशा की तुलना में झारखंड के कम राजस्व प्राप्ति का आंकड़ा पेश करते हुए पारदर्शी खनन नीति और नई खदानों के आवंटन की मांग की।
हजारीबाग: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रविवार को हजारीबाग में प्रेस वार्ता के दौरान राज्य की खनिज संपदा और उससे होने वाले राजस्व को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। MDMR बिल पारित होने के बाद झारखंड के खनिज संसाधनों और संभावित राजस्व प्रभाव से जुड़े सवाल पर उन्होंने राज्य की मौजूदा खनन व्यवस्था पर भी निशाना साधा।
पत्रकारों ने बाबूलाल मरांडी से पूछा कि झारखंड के पास देश के बड़े हिस्से में खनिज भंडार मौजूद है। ऐसे में MDMR बिल के बाद राज्य के सामने किस तरह की आर्थिक चुनौती खड़ी हो सकती है?
‘खनिज संपदा के बावजूद राजस्व में पीछे झारखंड’
उन्होंने दावा किया कि पिछले छह वर्षों में झारखंड में एक भी नई कोयला खदान का आवंटन नहीं हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य में बालू के टेंडर की स्थिति पर भी सवाल उठाया।
बालू टेंडर और नई खदानों पर सरकार को घेरा
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य में खनिज संसाधनों से राजस्व बढ़ाने के लिए नई खदानों के आवंटन, पारदर्शी नीलामी और खनन गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था को केवल इसलिए सही नहीं ठहराया जा सकता कि खनिज संसाधन राज्य में प्रचुर मात्रा में हैं। संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और उनसे मिलने वाले राजस्व में वृद्धि राज्य के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
‘अन्य राज्यों से भी सीखने की जरूरत’
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि देश के कई राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारें हैं, लेकिन खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व के आंकड़े अलग-अलग हैं। ऐसे में झारखंड को भी दूसरे खनिज संपन्न राज्यों की नीतियों और व्यवस्थाओं का अध्ययन कर अपनी व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत है।
उन्होंने पारदर्शी नीलामी, नए खनन अवसर और बेहतर संसाधन प्रबंधन के जरिए राज्य का राजस्व बढ़ाने पर जोर दिया। MDMR बिल को लेकर बाबूलाल मरांडी के इस बयान के बाद झारखंड में खनिज संसाधनों, खनन नीति और राज्य के राजस्व को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं।
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