Explainer: संसद में कौन सा बड़ा बिल ला रही मोदी-शाह की जोड़ी? इंडी कैंप में मची जबरदस्त खलबली

Explainer: संसद में कौन सा बड़ा बिल ला रही मोदी-शाह की जोड़ी? इंडी कैंप में मची जबरदस्त खलबली

संसद का मानसून सत्र इस बार 11 से 13 अगस्त के बीच काफी गरमागरम रहने के आसार हैं. भारतीय जनता पार्टी ने पहले ही अपने सभी सांसदों के लिए व्हिप जारी करते हुए साफ कह दिया है कि उन्हें तीनों दिन सदन की कार्यवाही में शामिल होना अनिवार्य है. इसी तरह कांग्रेस पार्टी ने भी अपने सांसदों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है ताकि कोई भी अहम मौका हाथ से न निकले.

नई दिल्ली: लंबे समय से ये सवाल उठ रहे थे कि FCRA बिल आखिर कब पेश होगा, और डिलिमिटेशन बिल आएगा भी या नहीं. विपक्षी गठबंधन इंडिया के नेता बार-बार यही तंज कस रहे थे कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह कहीं नजर नहीं आ रहे. मगर अब यह सवाल शायद कोई नहीं पूछेगा, क्योंकि संसद में कुछ बड़ा होने वाला है, जिसकी भनक लगते ही विपक्षी खेमे में हलचल मच गई है. सभी दलों ने अपने सांसदों को स्पष्ट हिदायत दी है कि कोई भी सदन से गैरहाजिर न रहे, क्योंकि सरकार और भाजपा किसी बड़े कदम की पूरी रणनीति बनाकर बैठी नजर आ रही हैं.  

भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी सांसदों के नाम व्हिप जारी कर दिया है, जिसमें 11, 12 और 13 अगस्त, तीनों दिन संसद में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं कांग्रेस पार्टी ने भी अपने सांसदों को इन दिनों सदन में मौजूद रहने की हिदायत दी है. इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले कुछ दिनों में संसद के भीतर कोई बड़ी अधिनियम पास हो सकती है, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हुई है और लगातार व्हिप जारी किए जा रहे हैं.

विपक्ष के आक्रामक रुख का जवाब मोदी सरकार अब संख्याबल से देने की तैयारी में है, और अगले चार दिनों के भीतर कुछ ऐसा होने वाला है जो विपक्षी खेमे की चिंता बढ़ा सकता है. परिसीमन (डिलिमिटेशन) और विदेशी चंदे से जुड़े FCRA बिल को लेकर सरकार की तरफ से अभी तक कोई औपचारिक बयान नहीं आया है, लेकिन भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दलों ने व्हिप जारी कर अपने सांसदों को सदन में बने रहने के लिए कह दिया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन ने तो पहले ही यह रुख साफ कर दिया है कि वह किसी भी सूरत में FCRA बिल को पारित नहीं होने देगी, और यदि इसे पास कराने की स्थिति बनती भी है, तो इस पर फैसला इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर ही लिया जाएगा.

हालांकि, विपक्षी खेमे के भीतर से ही कुछ सांसद अब सरकार के इस बिल को लेकर नरम रुख दिखाते नजर आ रहे हैं. एनसीपी के शरद पवार गुट से जुड़े 8 सांसद कल संसद परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने वाले हैं. इससे यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर इसके पीछे मकसद क्या है? क्या मोदी सरकार बिल को पारित कराने के लिए जरूरी संख्याबल जुटाने में जुट गई है?

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एनसीपी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जैसे बारिश होने पर छाता या रेनकोट लेना स्वाभाविक बात है, वैसे ही देश के प्रधानमंत्री से मिलने जाने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी निभाते समय किंतु-परंतु करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि प्रधानमंत्री पद का सम्मान करना हर सांसद का फर्ज है. उनके मुताबिक, सांसद नीति-निर्माण से जुड़े विषयों पर चर्चा के लिए ही प्रधानमंत्री से मुलाकात करने जाते हैं, लेकिन आजकल किसी से मिलना भी गॉसिप का विषय बन जाता है, जो बेहद दुखद स्थिति है. उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि नीति-निर्माण जैसे गंभीर विषय को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, और उन जैसे सांसदों को इस रवैये से गहरा दुख पहुंचता है.

शरद पवार गुट की एनसीपी के सभी आठों लोकसभा सांसद आज संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट करेंगे. यह मुलाकात कई अलग-अलग विषयों को लेकर आयोजित की जा रही है. इस खबर के सामने आते ही महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. मगर असली सवाल यह है कि आखिर विपक्ष को FCRA और परिसीमन बिल से इतना ऐतराज क्यों है?

भाजपा सांसद मनोज तिवारी का कहना है कि जब महिला आरक्षण बिल लाया गया था, तब कुछ दबाव में इसका समर्थन किया गया था, जो सही भी था, लेकिन असली सवाल यह है कि यह बिल जमीन पर लागू कब होगा. उनके अनुसार, यह बिल तभी अमल में आ सकता है जब परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि लखनऊ जैसे शहर की आबादी 20 साल पहले जितनी थी, आज उससे कहीं ज्यादा हो चुकी है, जबकि संविधान के अनुसार हर लोकसभा सीट पर करीब 12 से 15 लाख की आबादी होनी चाहिए, मगर अब कई जगह यह आंकड़ा 40 लाख तक पहुंच गया है. उन्होंने बताया कि जिस क्षेत्र से वे खुद सांसद हैं, वहां मतदाताओं की संख्या 26 लाख है, ऐसे में बिना सीटों की संख्या बढ़ाए न्यायसंगत प्रतिनिधित्व संभव नहीं है, और सीटें तभी बढ़ेंगी जब परिसीमन होगा. उनका मानना है कि विपक्ष घुमा-फिराकर असल में महिलाओं के आरक्षण का ही विरोध कर रहा है, लेकिन देश के कई सांसद अब इस हकीकत को समझने लगे हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि महिला आरक्षण बिल जरूर पारित होगा, चाहे राहुल गांधी कुछ भी करें.

क्या सरकार जुटा रही है जरूरी संख्याबल?

विपक्षी खेमे में इस बात को लेकर बेचैनी है कि कहीं वे संसद में हंगामा करते रह जाएं और आखिरी क्षणों में मोदी सरकार कोई महत्वपूर्ण विधेयक पारित करा ले. हालांकि सरकार ने FCRA, परिसीमन और महिला आरक्षण बिल को लेकर अभी तक कोई औपचारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ये विधेयक सरकार के एजेंडे में सबसे ऊपर हैं. उनके अनुसार, दोनों बिल जरूर सदन में लाए जाएंगे, हालांकि इन्हें कब पेश किया जाएगा और कब पारित कराया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी आगे साझा की जाएगी.

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Edited By: Samridh Media Desk
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