बड़ा संदेश दे गया क्षत्रिय समागम, रांची में बृजभूषण सिंह और धनबाद मेयर संजीव सिंह का दिखा क्रेज
पहली बार रांची में हुआ क्षत्रिय गौरव एकता समागम
रांची में आयोजित क्षत्रिय गौरव एकता समागम ने सामाजिक एकजुटता और समरसता का बड़ा संदेश दिया। पुराना विधानसभा मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में झारखंड के सभी जिलों से भारी संख्या में लोग शामिल हुए।

रांची : रांची में पहली बार क्षत्रिय गौरव एकता समागम का आयोजन पुराना विधानसभा मैदान में रविवार को किया गया। समागम में भारी भीड़ उमड़ी। झारखंड के सभी जिलों से क्षत्रिय समाज के लोग समागम में पहुंचे थे। आकर्षण का केंद्र रहे गोंडा (उत्तर प्रदेश) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, सांसद लवली आनंद और धनबाद के मेयर संजीव सिंह। यह समागम बड़ा संदेश देकर गया है।
पूर्व एमएलसी प्रवीण सिंह और पूर्व सांसद सुनील सिंह की टोली ने छह महीने से जो मेहनत की थी, उसका नतीजा आज दिखा। प्रवीण सिंह के प्रयास से क्षत्रिय समाज को एकजुट करने में सफलता मिली है, लेकिन आगे चुनौती बड़ी है। समाज को एकजुट रखना और एकता कायम रखना होगा। समाज के विकास के लिए जो सोच है, उस पर कैसे काम हो और आगे कैसे बढ़ा जाए, यह भी बड़ी चुनौती है। रांची में जो उत्साह देखा गया, वह लंबे समय तक कैसे कायम रहे, यह भी महत्वपूर्ण है।
प्रवीण सिंह, सुनील सिंह, सत्यनारायण सिंह, रमेश सिंह व अभिषेक लाल, प्रकाश नाथ शाहदेव सहित इस मंच से जुड़े सभी लोगों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
समागम में दूसरी जातियों के खिलाफ कोई टीका-टिप्पणी नहीं की गई, सिर्फ अपने समाज के उत्थान की बात हुई। सभी वक्ताओं ने क्षत्रिय गौरव का इतिहास बताते हुए सामाजिक समरसता पर जोर दिया। यह बड़ी बात थी, आज की राजनीति से अलग। इसलिए संदेश बड़ा है।
मुख्य अतिथि बृजभूषण सिंह ने जोरदार भाषण दिया। उन्होंने क्षत्रिय समाज का इतिहास, वीरता और पराक्रम की चर्चा की। भगवान राम को अपना आदर्श मानते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि क्षत्रिय समाज को मिटाने की बहुत कोशिश की गई, लेकिन यह समाज न मिटा है और न कभी मिटेगा। हमारा इतिहास जिंदा है।
इतिहास देखना है तो राजस्थान और दिल्ली जाइए। दिल्ली में पांडवों का किला व पृथ्वीराज चौहान का किला, और राजस्थान में चित्तौड़गढ़ से लेकर हर जगह बड़े-बड़े राजा-महाराजाओं के किले हैं। उनकी विरासत हमारा इतिहास है। हमारा इतिहास गौरवशाली है, जिस पर समाज को गर्व है।
उन्होंने कहा कि हम सतयुग में थे, त्रेता में थे, द्वापर में थे और कलयुग में भी हैं। हमारे समाज के महापुरुषों पर रामायण और महाभारत लिखने वाले भी अमर हो गए। सभी ग्रंथ क्षत्रिय कुल के महापुरुषों पर लिखे गए।
सिंह ने कहा कि क्षत्रिय समाज अकेला चलना बंद करे। भगवान राम को आदर्श मानिए और सभी समाज और जातियों को साथ लेकर चलिए। उन्होंने कहा कि कर्म पर विश्वास कीजिए और काम कीजिए। कर्म नहीं करने वाले को भगवान भी मदद नहीं करते। दूसरों में कमी ढूंढने के बजाय अपनी कमी देखें।
उन्होंने अच्छी पुस्तकें और कविताएं पढ़ने की सलाह दी तथा बुरी संगति से बचने को कहा। उन्होंने एकजुटता और सामाजिक समरसता पर जोर दिया। उनका भाषण दार्शनिक अंदाज में था और लोगों ने तालियां बजाकर स्वागत किया।
शिवहर की सांसद लवली आनंद ने कहा कि क्षत्रिय एकता जरूरी है। एकता में ही शक्ति है। उन्होंने महिलाओं की राजनीति में भागीदारी पर जोर दिया और कहा कि आधी आबादी को उसका हक मिलना चाहिए। उन्होंने दहेज प्रथा खत्म करने और नशा मुक्ति पर भी जोर दिया।
बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि देश के लिए जब भी जरूरत पड़ी, क्षत्रिय समाज ने कुर्बानी दी है। उन्होंने झारखंड के प्रति अपना लगाव व्यक्त करते हुए कहा कि यहां से उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई।
क्षत्रिय गौरव एकता मंच के प्रदेश संयोजक प्रवीण सिंह ने कहा कि वे सितंबर से पूरे झारखंड का दौरा कर रहे थे। उन्होंने समाज के विभिन्न समूहों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया, जिसका परिणाम आज देखने को मिला। उन्होंने लड़कियों की शिक्षा पर जोर देते हुए रांची में छात्रावास बनाने की घोषणा की।
धनबाद के मेयर संजीव सिंह ने कहा कि जनता ने उनके परिवार पर भरोसा जताया है। उन्होंने बताया कि वे 8.5 वर्षों तक जेल में रहे और अब जनता ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी है।
पूर्व सांसद सुनील सिंह ने कहा कि अब तलवार का नहीं, बल्कि कलम और हल का समय है। इसी कारण अतिथियों का स्वागत कलम और हल देकर किया गया, जो शिक्षा और खेती का प्रतीक है।
समागम को पूर्व सांसद पी.एन. सिंह, पूर्व विधायक गिरिनाथ सिंह, हेमंत सिंह देव, मनोज सिंह, शारदा देवी, प्रेम प्रकाशनाथ शाहदेव, डॉ. अजय नाथ शाहदेव सहित कई लोगों ने संबोधित किया।
मंच का संचालन सत्यनारायण सिंह ने किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में रमेश सिंह, अभिषेक सिंह सहित कई लोगों ने भूमिका निभाई।
झारखंड में पहली बार इस तरह का आयोजन हुआ, जिसमें क्षत्रिय समाज की बड़ी भागीदारी रही। भारी भीड़ के बावजूद सभा स्थल पर अनुशासन बना रहा।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
