केंद्रीय श्रम कानून आंगनबाड़ी केंद्रों में लागू नहीं होने से भारत के भविष्य पर संकट: जे.पी. पांडेय
प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखकर उठाई मांग
भाजपा किसान मोर्चा नेता एवं आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के संयोजक जे.पी. पांडेय ने आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं को श्रम कानूनों का लाभ नहीं मिलने पर चिंता जताई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी को पत्र लिखकर कर्मचारी का दर्जा, न्यूनतम वेतनमान, पीएफ, पेंशन और ग्रेच्युटी लागू करने की मांग की है।
रांची: भाजपा किसान मोर्चा झारखंड प्रदेश के नेता सह झारखंड राज्य समाज कल्याण आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के संयोजक जय प्रकाश पांडेय ने भारत सरकार के नए श्रम कानूनों का स्वागत करते हुए कहा है कि देश के आंगनबाड़ी केंद्रों में अब तक श्रम अधिकार कानून लागू नहीं किया जाना अत्यंत दुखद है। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी को पत्र लिखकर आंगनबाड़ी कर्मियों की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है।
उन्होंने कहा कि देशभर में लगभग 28 लाख आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जहां करीब 56 लाख आंगनबाड़ी सेविकाएं एवं सहायिकाएं पिछले लगभग 50 वर्षों से सेवा दे रही हैं। इन केंद्रों में करोड़ों बच्चों के पोषण और भविष्य निर्माण का कार्य किया जा रहा है, लेकिन आज तक इन महिला कर्मियों को कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल पाया है।


पांडेय ने कहा कि जब आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं की आयु 62 वर्ष पूरी हो जाती है, तो उन्हें केंद्रों में कार्य करने से रोक दिया जाता है। इसके बावजूद उन्हें ग्रेच्युटी, पीएफ, पेंशन तथा अन्य सेवानिवृत्ति लाभ नहीं दिए जाते। ऐसे में वर्षों तक सेवा देने के बाद भी वे आर्थिक असुरक्षा और कठिनाइयों का सामना करने को मजबूर रहती हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी करने वाले सुपरवाइजर, सीडीपीओ, डीडब्ल्यूओ और अन्य अधिकारी सरकारी कर्मचारी हो सकते हैं, लेकिन लगभग 50 वर्षों से सेवा दे रही आंगनबाड़ी सेविकाएं और सहायिकाएं सरकारी कर्मचारी क्यों नहीं मानी जातीं।
उन्होंने कहा कि कुपोषण से लड़ने की जिम्मेदारी निभाने वाली आंगनबाड़ी कर्मियों की स्थिति स्वयं चिंताजनक बनी हुई है। यदि आंगनबाड़ी कर्मियों को ही पर्याप्त सुरक्षा और सम्मान नहीं मिलेगा, तो बच्चों के पोषण और विकास के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से हासिल करना कठिन होगा।
जे.पी. पांडेय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी से आग्रह किया कि केंद्रीय श्रम कानूनों तथा न्यायालयों के निर्देशों के अनुरूप देशभर की आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं को कर्मचारी का दर्जा, न्यूनतम वेतनमान, पीएफ, ग्रेच्युटी, पेंशन तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं प्रदान की जाएं।
उन्होंने कहा कि इससे न केवल वर्षों से शोषित और पीड़ित महिला कर्मियों को न्याय मिलेगा, बल्कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी। साथ ही नारी शक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.


