जीवनभर समाज के लिए लड़े, मृत्यु के बाद भी आएंगे काम; रिम्स में दान होगा रामकेश्वर मेहता का शरीर
जीवित रहते शपथ पत्र देकर चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए देहदान का लिया था संकल्प
पलामू जिले के हुसैनाबाद प्रखंड के दमदमी गांव निवासी समाजसेवी रामकेश्वर मेहता का रविवार को निधन हो गया। उन्होंने जीवित रहते ही देहदान का संकल्प लिया था और शपथ पत्र के माध्यम से अपना शरीर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए समर्पित करने की इच्छा जताई थी।
पलामू। शरीर नश्वर है, लेकिन समाज के लिए समर्पित जीवन अपने पीछे ऐसी विरासत छोड़ जाता है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देती है। पलामू जिले के हुसैनाबाद प्रखंड के दमदमी गांव निवासी करीब 70 वर्षीय समाजसेवी रामकेश्वर मेहता ने अपने जीवन में समाजहित के लिए संघर्ष किया और मृत्यु के बाद भी मानव सेवा का संकल्प निभाया। रविवार को उनका निधन हो गया। उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप उनके पार्थिव शरीर को चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के एनाटॉमी विभाग को दान किया जाएगा।
रामकेश्वर मेहता ने जीवित रहते ही देहदान का संकल्प लिया था। इसके लिए उन्होंने बाकायदा शपथ पत्र देकर अपना शरीर चिकित्सा शिक्षा एवं शोध के लिए समर्पित करने की इच्छा जताई थी। उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, उनका जन्म 5 मार्च 1956 को हुआ था और उनके पिता का नाम मुनीश्वर महतो था। निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए पार्थिव शरीर को रिम्स ले जाने की तैयारी शुरू कर दी है।अवैध उत्खनन के खिलाफ लंबे समय तक चलाया आंदोलन

मृत्यु के बाद भी समाज के काम आने की इच्छा
रामकेश्वर मेहता का देहदान का निर्णय उनके सामाजिक जीवन की सोच का ही विस्तार माना जा रहा है। उन्होंने अपने जीवनकाल में समाज के लिए संघर्ष किया और मृत्यु के बाद भी उनका शरीर चिकित्सा विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी हो, यह संकल्प लिया।
उनके निधन की खबर से दमदमी गांव सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। ग्रामीणों का कहना है कि रामकेश्वर मेहता ने जीवनभर समाज के हित में आवाज उठाई। उन्होंने केवल अपने जीवन में ही लोगों की भलाई के लिए काम नहीं किया, बल्कि मृत्यु के बाद भी समाज के काम आने का रास्ता चुना।
उनका देहदान समाज को यह संदेश देता है कि जीवन की सार्थकता केवल अपने लिए जीने में नहीं, बल्कि समाज और मानवता के लिए योगदान देने में है। रामकेश्वर मेहता का पार्थिव शरीर रिम्स के एनाटॉमी विभाग में चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान में उपयोग होगा, जबकि उनका सामाजिक संघर्ष और अंतिम संकल्प आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। उनका शरीर पंचतत्व में विलीन होने से पहले चिकित्सा शिक्षा का माध्यम बनेगा, लेकिन मानव सेवा का उनका संकल्प लंबे समय तक समाज में जीवित रहेगा।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
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