सिक्का गांव में मातम, एक ही परिवार के छह लोगों की मौत; सातवां सदस्य अब भी जिंदगी की जंग लड़ रहा
रिम्स में इलाज के दौरान महिला की मौत, परिवार का एक सदस्य अब भी भर्ती
पलामू जिले के पड़वा प्रखंड स्थित सिक्का गांव में एक ही परिवार के छह सदस्यों की मौत से क्षेत्र में शोक और दहशत का माहौल है। रिम्स में इलाजरत लाखो देवी ने मंगलवार देर रात दम तोड़ दिया, जबकि परिवार का एक अन्य सदस्य अब भी भर्ती है। प्रारंभिक जांच में सरसों के तेल में आर्जीमोन (कटैला) के बीजों की मिलावट के कारण ड्रॉप्सी बीमारी की पुष्टि हुई है।
पलामू: पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव के एक परिवार की महिला मुखिया लाखो देवी (पति स्व. कुलदीप मेहता) की मंगलवार की रात रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही इस परिवार में मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई है, जबकि परिवार का एक अन्य सदस्य सुनील कुमार मेहता अब भी रिम्स में भर्ती है और चिकित्सकीय निगरानी में उसका इलाज चल रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अब तक हुई सभी मौतों का कारण प्रारंभिक जांच में ड्रॉप्सी बीमारी माना गया है। हालांकि अंतिम पुष्टि के लिए सभी मृतकों की विसरा जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच और रांची स्थित फूड टेस्टिंग लैब की रिपोर्ट में सरसों के तेल में आर्जीमोन (कटैला/पीला धतूरा) के बीजों की मिलावट की पुष्टि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी दूषित तेल के सेवन से परिवार के सदस्य ड्रॉप्सी की चपेट में आए।


चिकित्सकों के अनुसार, सभी मरीजों में शरीर में सूजन आने के बाद उनकी हालत तेजी से बिगड़ती गई, जो ड्रॉप्सी बीमारी का प्रमुख लक्षण है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित मरीजों के उपचार के लिए विशेष चिकित्सकीय निगरानी की व्यवस्था की थी, लेकिन कई मरीजों की जान नहीं बचाई जा सकी।
पाटन के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. श्रवण कुमार ने बुधवार को बताया कि लाखो देवी की मौत की सूचना विभाग को मिल चुकी है। स्वास्थ्य विभाग पूरे गांव की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। पहले कराए गए व्यापक स्वास्थ्य सर्वे में इस परिवार के अलावा कोई अन्य व्यक्ति प्रभावित नहीं मिला था। इसके बावजूद एहतियात के तौर पर गांव में दोबारा घर-घर सर्वे कराया जाएगा, ताकि किसी अन्य संभावित मरीज की समय रहते पहचान की जा सके।
जांच में यह भी सामने आया है कि आर्जीमोन, जिसे स्थानीय भाषा में कटैला या पीला धतूरा कहा जाता है, पलामू क्षेत्र में बड़ी मात्रा में उगने वाला कांटेदार खर-पतवार है। आशंका है कि सरसों की कटाई के दौरान इसके बीज फसल में मिल गए और उसी से तैयार तेल के सेवन के कारण परिवार के सदस्य बीमार पड़ गए। जांच के लिए भेजे गए अन्य खाद्य पदार्थों में किसी प्रकार की मिलावट नहीं पाई गई है।
वर्ष 2011 के बाद देश में ड्रॉप्सी का यह पहला बड़ा मामला माना जा रहा है। एक ही परिवार में लगातार छह मौतों ने स्वास्थ्य विभाग के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। फिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की गहन जांच कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें विसरा जांच की अंतिम रिपोर्ट और रिम्स में भर्ती सुनील कुमार मेहता के स्वास्थ्य पर टिकी हैं।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
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