Pakur News: बाल शोषण और तस्करी के खिलाफ अमड़ापाड़ा में पुलिस की ट्रेनिंग, कानूनों की दी गई जानकारी

मानव तस्करी की रोकथाम और पीड़ित बच्चों के पुनर्वास पर भी प्रशिक्षण में हुई चर्चा

Pakur News: बाल शोषण और तस्करी के खिलाफ अमड़ापाड़ा में पुलिस की ट्रेनिंग, कानूनों की दी गई जानकारी

पाकुड़ के अमड़ापाड़ा में बच्चों को शोषण, तस्करी और हिंसा से बचाने के उद्देश्य से पुलिस कर्मियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। झारखंड विकास परिषद द्वारा संचालित ‘सुरक्षित बचपन के लिए दामिन पहल’ परियोजना के तहत संथाली पंचायत भवन में आयोजित प्रशिक्षण का उद्घाटन थाना प्रभारी अनूप रोशन भेगरा, प्रशिक्षक प्रेमचंद दास एवं परियोजना समन्वयक मनोरंजन सिंह ने किया।

पाकुड़:  बच्चों को शोषण, तस्करी और हिंसा से बचाने के उद्देश्य से झारखंड विकास परिषद द्वारा संचालित ‘सुरक्षित बचपन के लिए दामिन पहल’ परियोजना के अंतर्गत रविवार को संथाली पंचायत भवन, अमड़ापाड़ा में प्रखंड स्तरीय पुलिस कर्मियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

दीप प्रज्वलित कर किया गया कार्यक्रम का उद्घाटन

कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन थाना प्रभारी अमड़ापाड़ा अनूप रोशन भेगरा, प्रशिक्षक प्रेमचंद दास एवं परियोजना समन्वयक मनोरंजन सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। मंच पर झारखंड विकास परिषद के पदाधिकारी एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे। उद्घाटन के बाद परियोजना टीम द्वारा अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया।

बच्चों का हित सर्वोपरि : थाना प्रभारी

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए थाना प्रभारी अनूप रोशन भेगरा ने कहा कि पुलिस की भूमिका केवल अपराध दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में अपराध की रोकथाम और जागरूकता फैलाना भी पुलिस की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पुलिस कर्मियों को बाल संरक्षण, मानव तस्करी की रोकथाम एवं बच्चों से जुड़े कानूनी पहलुओं की व्यवहारिक जानकारी देना है।

उन्होंने कहा कि जब तक बच्चों के अधिकारों को नहीं समझेंगे, तब तक उनके सर्वोत्तम हित को सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। उन्होंने पुलिस कर्मियों से समुदाय के साथ संवेदनशीलता से पेश आने और बाल अधिकारों के उल्लंघन के किसी भी मामले में त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया।

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बाल संरक्षण कानूनों की दी गई जानकारी

प्रशिक्षण सत्र का संचालन प्रशिक्षक प्रेमचंद दास ने किया। उन्होंने पुलिस कर्मियों को विभिन्न बाल संरक्षण कानूनों की विस्तृत जानकारी दी। इसमें पोक्सो एक्ट 2012, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 तथा बंधित श्रम पद्धति (उत्सादन) अधिनियम 1976 के प्रावधानों की जानकारी दी गई।

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प्रशिक्षक ने बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों की रोकथाम, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, पीड़ित बच्चों के पुनर्वास, बाल विवाह रोकने में पुलिस एवं समुदाय की भूमिका तथा बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी के खिलाफ कार्रवाई से संबंधित विषयों पर जानकारी साझा की।

सामुदायिक पुलिसिंग पर दिया जोर

प्रेमचंद दास ने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से गांव-गांव में निगरानी समिति बनाकर बाल संरक्षण को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने पुलिस को ‘पहला रिस्पॉन्डर’ बताते हुए कहा कि समय पर हस्तक्षेप से कई बच्चों की जिंदगी बचाई जा सकती है। उन्होंने फोस्टर केयर, स्पॉन्सरशिप स्कीम, बाल देखभाल संस्थानों और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 जैसी सरकारी योजनाओं की भी जानकारी दी, ताकि जरूरतमंद बच्चों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

मानव तस्करी की रोकथाम पर भी हुई चर्चा

‘दामिन पहल’ परियोजना के समन्वयक मनोरंजन सिंह ने कहा कि झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यहां मानव तस्करी का खतरा अधिक है। प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिस कर्मियों को तस्करी के पैटर्न, बचाव और पीड़ितों के पुनर्वास की प्रक्रिया से अवगत कराना है। उन्होंने कहा कि पुलिस और समुदाय के एक साथ मिलकर काम करने से ही बच्चों को सुरक्षित बचपन दिया जा सकता है। कार्यक्रम में उपस्थित कार्यकर्ता किरानी मुर्मू ने कहा कि आज भी आदिवासी समुदाय में गरीबी, अशिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण बच्चों का शोषण होता है। उन्होंने कहा कि स्कूल, पंचायत और स्वयं सहायता समूहों के साथ मिलकर घर-घर जाकर लोगों को बाल विवाह और बाल श्रम को अपराध के रूप में समझाना होगा।

55 से अधिक पुलिस कर्मियों ने लिया प्रशिक्षण

प्रशिक्षण में अमड़ापाड़ा प्रखंड के विभिन्न थाना क्षेत्रों से आए 55 से अधिक पुलिस कर्मियों के अलावा झारखंड विकास परिषद के पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों और पंचायत प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने केस स्टडी, प्रश्नोत्तर और समूह चर्चा के माध्यम से अपनी शंकाओं का समाधान किया। प्रतिभागियों ने बाल संरक्षण से जुड़े कानूनों और प्रावधानों को समझने में गहरी रुचि दिखाई। कार्यक्रम के अंत में परियोजना टीम द्वारा सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन किया गया। समन्वयक मनोरंजन सिंह ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण आगे भी जारी रहेंगे, ताकि अमड़ापाड़ा को ‘बाल मैत्री प्रखंड’ बनाया जा सके।

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Edited By: Anshika Ambasta
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Anshika Ambasta covers local stories, trending topics, and news from the Jharkhand and Bihar desk at Samridh Jharkhand. With a focus on timely updates and impactful storytelling, she brings readers accurate and engaging news coverage. Passionate about journalism, she is dedicated to delivering stories that matter.

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