Pakur News: अंबाजोड़ा में दामिन पहल के तहत बाल संरक्षण पर आयोजित हुआ एक दिवसीय कार्यक्रम
पुलिस हेल्पलाइन 112 और 1098 पर दें सूचना
पाकुड़ के अंबाजोड़ा स्थित प्राथमिक विद्यालय में झारखंड विकास परिषद की "दामिन पहल" परियोजना के तहत बाल संरक्षण संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें पंचायत, SHG, आंगनबाड़ी और धार्मिक गुरुओं ने बाल विवाह, मानव तस्करी व बाल श्रम रोकने तथा 1098 हेल्पलाइन का उपयोग करने का संकल्प लिया।
पाकुड़: बच्चों को शोषण, तस्करी और बाल विवाह से बचाने के उद्देश्य से झारखंड विकास परिषद द्वारा संचालित "सुरक्षित बचपन के लिए दामिन पहल" परियोजना के अंतर्गत आज ग्राम अंबाजोड़ा के प्राथमिक विद्यालय में एक दिवसीय संवेदनशीलता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में आंगनबाड़ी सेविका/सहायिका, पंचायती राज संस्थान के सदस्य, स्वयं सहायता समूह/SHG, माता समिति, पैरालीगल वालंटियर - PLV एवं पारंपरिक धर्म गुरु सहित ग्राम स्तरीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।कार्यक्रम का उद्देश्य

संस्थानों के प्रतिनिधियों ने रखे विचार
स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष सुश्री असूनता मरांडी एवं आंगनबाड़ी सेविका कर्मिला मरांडी ने कहा, "हमारी SHG की महिलाएं गांव-गांव जाती हैं। इसलिए मानव तस्करी और दलालों की पहचान को लेकर हम लोग नियमित रूप से सक्रिय रहेंगे। अगर कोई बाहरी व्यक्ति बच्चों को बहला-फुसलाकर ले जाने की कोशिश करता है तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस के हेल्पलाइन नंबर 112/1098 पर देगे ।
विद्यालय प्रबंधन समिति की सदस्य सुश्री राखी हांसदा ने कहा, "हम विद्यालय प्रबंधन समिति की मासिक बैठक में बच्चों की उपस्थिति को अनिवार्य रूप से एजेंडा में रखेंगे। साथ ही अभिभावक-शिक्षक बैठक में माता-पिता को बच्चों को नियमित स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करेंगे। शिक्षित बच्चा ही सुरक्षित रह सकता है।"
पारंपरिक धर्म गुरु नुनुजी हांसदा ने कहा, "हमारे समाज में धर्म गुरु की बात को लोग मानते हैं। इसलिए हम पूजा-पाठ और गांव की बैठक में शिक्षा का महत्व, बाल तस्करी और बाल विवाह के दुष्परिणाम के बारे में लोगों को लगातार जागरूक करते रहेंगे। हमारा धर्म भी यही कहता है कि बच्चों की रक्षा करना सबसे बड़ा पुण्य है।"
प्रशिक्षण एवं चर्चा सत्र
"दामिन पहल" परियोजना के समन्वयक मनोरंजन सिंह द्वारा प्रशिक्षण सत्र का संचालन किया गया। सत्र में निम्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई:
1. ग्राम स्तरीय संस्थानों की भूमिका: आंगनबाड़ी, पंचायत, SHG, स्कूल प्रबंधन समिति और धार्मिक नेताओं की संयुक्त जिम्मेदारी।
2. बाल संरक्षण कानून: पोक्सो एक्ट, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, बाल श्रम निषेध अधिनियम की जानकारी।
3. मानव तस्करी की पहचान और रोकथाम: तस्करी के तरीके, दलालों की पहचान, और 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन का उपयोग।
4. सरकारी योजनाएं: फोस्टर केयर, स्पॉन्सरशिप, किशोरी सशक्तिकरण योजना से जरूरतमंद बच्चों को जोड़ना।
5. रिपोर्टिंग तंत्र: किसी भी बाल अधिकार उल्लंघन की सूचना पंचायत, थाना और जिला बाल संरक्षण इकाई को देने की प्रक्रिया।
सिंह ने कहा कि जब आंगनबाड़ी, पंचायत, SHG, स्कूल और धर्म गुरु एक साथ मिलकर काम करेंगे, तभी गांव को "बाल मैत्री गांव" बनाया जा सकेगा।
सहभागिता और संकल्प
कार्यक्रम में अंबाजोड़ा गांव के लगभग 80 प्रतिभागियों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे अपने-अपने संस्थान के माध्यम से बाल संरक्षण के कार्यों को आगे बढ़ाएंगे। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन संस्था के कार्यकर्ता किरानी मुर्मू द्वारा किया गया।
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