Aryabhatta Ka Zero Review: हिमांश कोहली ने दमदार अभिनय से जीता दिल
प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव और संघर्ष को संवेदनशीलता से दिखाती है फिल्म
'आर्यभट्ट का जीरो' एक प्रेरणादायक पारिवारिक फिल्म है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं, असफलताओं और सामाजिक दबाव के बीच संघर्ष कर रहे युवाओं की कहानी को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। हिमांश कोहली ने अपने अभिनय से किरदार में जान डाल दी है, जबकि निर्देशक कमल चंद्रा ने कहानी को सादगी और संवेदनशीलता के साथ पर्दे पर उतारा है।
नई दिल्ली: प्रतियोगी परीक्षाओं, बेरोजगारी और सामाजिक दबाव के बीच युवाओं के संघर्ष को केंद्र में रखकर बनी फिल्म 'आर्यभट्ट का जीरो' 7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज़ हो रही है। निर्देशक कमल चंद्रा की यह फिल्म केवल एक युवक की सफलता और असफलता की कहानी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, पारिवारिक रिश्तों और लगातार प्रयास करते रहने की प्रेरणा भी देती है। करीब 1 घंटा 54 मिनट की इस फिल्म में हिमांश कोहली ने अपने करियर का प्रभावशाली अभिनय किया है, जबकि रवि किशन, सोनाली सेहगल, दर्शना बानिक, नीरज सूद, शिल्पा शिंदे और राजेश शर्मा ने भी अपने किरदारों के साथ न्याय किया है।
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी उत्तराखंड के रहने वाले ब्रह्मगुप्त श्रीवास्तव उर्फ बग्गू (हिमांश कोहली) के इर्द-गिर्द घूमती है। साधारण परिवार का बग्गू जीवन में बड़ा मुकाम हासिल करना चाहता है, लेकिन हर मोड़ पर उसे असफलताओं का सामना करना पड़ता है। प्रेमिका की शादी किसी अफसर से हो जाने के बाद वह यूपीएससी पास कर अधिकारी बनने का सपना देखता है, लेकिन किस्मत और परिस्थितियां बार-बार उसके रास्ते में रुकावट बनती हैं। समाज और रिश्तेदार उसे ताने देते हुए 'आर्यभट्ट का जीरो' कहने लगते हैं। इसके बाद उसकी जिंदगी किस दिशा में जाती है, यही फिल्म की मुख्य कहानी है।
निर्देशन और पटकथा

अभिनय ने जीता दिल
तकनीकी पक्ष भी मजबूत
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर भावनात्मक दृश्यों को मजबूती देता है। उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को कैमरे में आकर्षक ढंग से कैद किया गया है। संपादन कसा हुआ है और फिल्म शुरुआत से अंत तक अपनी गति बनाए रखती है। संगीत भी कहानी के अनुरूप प्रभाव छोड़ता है।
फाइनल वर्डिक्ट
'आर्यभट्ट का जीरो' ऐसी फिल्म है, जो बताती है कि असफलता किसी व्यक्ति की अंतिम पहचान नहीं होती। यह युवाओं को संघर्ष जारी रखने, खुद पर भरोसा रखने और परिस्थितियों से हार न मानने का संदेश देती है। दमदार अभिनय, भावनात्मक कहानी और संतुलित निर्देशन के कारण यह फिल्म मनोरंजन के साथ प्रेरणा भी देती है।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
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