Koderma News: देशव्यापी केमिस्ट हड़ताल का भारी असर, झुमरी तिलैया समेत पूरे जिले में दवा दुकानें रहीं बंद
ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स का आह्वान
कोडरमा जिला अंतर्गत झुमरी तिलैया सहित सभी प्रखंडों में ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी कंपनियों की मनमानी के खिलाफ केमिस्टों की देशव्यापी हड़ताल का व्यापक असर देखा गया। कोडरमा केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले दवा व्यवसायियों ने विशाल रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। संघ के पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार से जीएसआर 817(ई) और जीएसआर 220(ई) अधिसूचनाओं को वापस लेने, भारी डिस्काउंट पर रोक लगाने तथा शेड्यूल एच व नशीली दवाओं की ऑनलाइन सप्लाई बंद करने की पुरजोर मांग की।
कोडरमा: ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ बुधवार को झुमरी तिलैया सहित पूरे जिले में दवा दुकानदारों का आक्रोश सड़कों पर उमड़ पड़ा। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर जिले के सभी प्रखंडों में दवा दुकानें बंद रहीं। सुबह से ही बाजारों में मेडिकल स्टोरों के शटर गिरे नजर आए और दवा व्यवसायियों ने रैली निकालकर अपनी मांगों को बुलंद किया। बंदी के कारण मरीजों और उनके परिजनों को दवा के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि आपातकालीन सेवाओं को जारी रखा गया था।
कोडरमा केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के सदस्य सबसे पहले गौरीशंकर मोहल्ला स्थित संघ कार्यालय के पास एकत्रित हुए। वहां से मांगों से लिखे बैनर लेकर रैली निकाली गई। रैली गौरीशंकर मोहल्ला, रजगड़िया रोड, डॉक्टर गली होते हुए स्टेशन रोड और झंडा चौक तक पहुंची। पूरे रास्ते दवा व्यवसायियों ने ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में जोरदार नारेबाजी की और सरकार से कठोर कदम उठाने की मांग की।संघ के अध्यक्ष सतीश कुमार ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री न तो देशहित में है और न ही छोटे दवा कारोबारियों के हित में। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय मेडिकल स्टोरों का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है और मरीजों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ हो सकता है। उन्होंने बताया कि बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं की उपलब्धता लोगों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
बिना चिकित्सकीय सलाह ऑनलाइन दवा बिक्री से स्वास्थ्य पर मंडरा रहा गंभीर खतरा

मांगें नहीं मानी गईं तो और उग्र होगा आंदोलन, दी चेतावनी
संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और अधिक व्यापक तथा धारदार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दवा व्यवसायियों का यह संघर्ष केवल व्यापार बचाने का नहीं, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। दवा कारोबारियों ने कहा कि नारकोटिक्स, एंटीबायोटिक और अनुसूची एच तथा एच-वन की दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर सख्त नियम लागू किए जाएं।
साथ ही फर्जी पर्चियों और बिना भौतिक सत्यापन के हो रही दवा आपूर्ति पर भी कठोर कार्रवाई की मांग उठाई गई।दवा दुकानदारों ने अपनी चार प्रमुख मांगों में बिना नियमों के चल रही ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक, जीएसआर 220(ई) और जीएसआर 817(ई) को वापस लेने, ई-फार्मेसी के लिए कड़े नियम बनाने तथा ऑनलाइन कंपनियों द्वारा दिए जा रहे भारी छूट पर नियंत्रण लगाने की मांग की। बंदी के कारण शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से दवा लेने पहुंचे मरीजों को परेशानी हुई।
कई लोगों को जरूरी दवाओं के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। हालांकि कुछ दुकानों द्वारा आपातकालीन सेवाएं जारी रखे जाने से गंभीर मरीजों को थोड़ी राहत मिली। मौके पर कोषाध्यक्ष राकेश कुमार, संयुक्त सचिव अश्विनी चोना और संगठन सचिव हरजीत सिंह,शैलेश जैन, राजेश कुमार, संजीत कुमार, सुबोध वर्णवाल, रवि कुमार, अंकित गुप्ता, दयानंद प्रसाद, उपेंद्र मोदी, दीपक कुमार, अनिल जैन, अभिषेक कुमार, कासिम, सुरेश वर्णवाल, सन्नी कुमार,संदीप कुमार सहित बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित थे। वहीं बीएसएसआरयू ने भी बंदी का समर्थन किया। मौके पर अध्यक्ष सुनील वर्णवाल और सचिव दिलीप सिन्हा समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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