फुलजोरी मौजा में खनन को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश, डीसी के निर्देश पर माइनिंग इंस्पेक्टर ने किया निरीक्षण
ग्रामीणों ने उपायुक्त को आवेदन देकर खनन कार्य रोकने की मांग की
जामताड़ा जिले के फुलजोरी मौजा में प्रस्तावित पत्थर खनन और क्रशर संचालन को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने उपायुक्त को आवेदन देकर खनन कार्य पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे पर्यावरण, खेती-बाड़ी और क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत को नुकसान पहुंचेगा।
जामताड़ा : जिले के चालना पंचायत अंतर्गत फुलजोरी ग्राम में पत्थर खनन एवं क्रशर संचालन को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। ग्रामीणों ने उपायुक्त को आवेदन सौंपकर खनन कार्य पर रोक लगाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि फुलजोरी मौजा में पुनः पत्थर खनन और क्रशर संचालन शुरू करने की तैयारी की जा रही है, जिससे क्षेत्र के पर्यावरण, खेती-बाड़ी और प्राकृतिक संतुलन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
ग्रामीणों ने आवेदन में कहा है कि फुलजोरी क्षेत्र में इससे पूर्व भी पत्थर खदान संचालित की गई थी। खदान का कार्यकाल पूर्ण होने के बाद उसे बंद कर दिया गया था, लेकिन अब फिर से खनन कार्य शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि हरे-भरे पहाड़ों को खत्म करना यहां की प्राकृतिक विरासत और पहचान को मिटाने जैसा है। उन्होंने कहा कि फुलजोरी की पहाड़ियां ही यहां की पहचान और धरोहर हैं। यदि पहाड़ ही नहीं बचेंगे, तो झारखंड की अस्मिता और प्राकृतिक स्वरूप पर संकट खड़ा हो जाएगा।


ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर पर्यावरण एवं ग्रामीण हितों को ध्यान में रखते हुए उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
क्या कहते हैं अधिकारी
माइनिंग इंस्पेक्टर अखिलेश कुमार ने बताया कि कालेश्वरी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा उक्त खदान को लीज पर लिया गया है। उन्होंने कहा कि पूर्व उपायुक्त रवि आनंद के कार्यकाल में ही पूरी प्रक्रिया पूरी कर कंपनी को खदान लीज पर आवंटित की गई थी। सारी प्रक्रिया वैध तरीके से की जा रही है।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.


