JPSC-JSSC परीक्षाओं में सुधार के लिए आजसू पार्टी ने सौंपा 10 सूत्री माँग पत्र
OMR धांधली रोकने को E-विकल्प प्रणाली लागू हो
आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव संजय मेहता ने युवाओं की माँगों को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय को 10 सूत्री विस्तृत चार्टर ऑफ डिमांड्स सौंपा। इसमें 14वीं JPSC व JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने, CBI जाँच कराने, अमेरिका के ETS-OTI मॉडल लागू करने तथा OMR धांधली रोकने के लिए E-विकल्प प्रणाली अपनाने की प्रमुख माँगें शामिल हैं।
जमशेदपुर: आजसू पार्टी ने सरकार को जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं से संबंधित माँग पत्र सौंपा है। पार्टी के महासचिव संजय मेहता ने माँग पत्र मुख्यमंत्री कार्यालय को दिया है। संजय मेहता ने बताया की छात्रों से संवाद कर उनकी मांगों और भावनाओं से हमने सरकार को अवगत कराया है। पार्टी छात्रों के सभी माँग के साथ खड़ी है। जब तक माँग पूरी नहीं होगी आंदोलन जारी रहेगा। पार्टी छात्रों के माँग के साथ खड़ी है और हर मुद्दे पर उनका समर्थन करती है। पार्टी ने इससे पूर्व जेपीएससी कार्यालय घेराव, राजभवन घेराव, गवर्नर से मुलाक़ात कर छात्रों की माँग से अवगत कराया था।
आजसू के डिमांड चार्टर में क्या है?
झारखंड के युवा अभ्यर्थियों की ओर से मुख्यमंत्री, झारखंड सरकार को एक विस्तृत चार्टर ऑफ डिमांड्स सौंपा गया है। इसमें झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) एवं झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में बार-बार हो रहे पेपर लीक, धांधली, अनियमितताओं, विलंब और विवादित बाहरी एजेंसियों की भूमिका को लेकर आ रही समयस्याओं के समाधान का रास्ता भी बताया गया है। पेपर लीक के कारण लाखों मेधावी युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है। युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने तथा परीक्षा प्रणाली पर जन-विश्वास बहाल करने की माँग आजसू द्वारा प्रमुखता से की गई है।

चार्टर की 10 प्रमुख माँगें:
1. 14वीं जेपीएससी पीटी (PT) परीक्षा एवं जेपीएससी/जेएसएससी की सभी वर्तमान विवादित परीक्षाओं को तुरंत रद्द किया जाए।
टीडीपीएल (TDPL) एजेंसी द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं तथा राज्य की जिन भी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, अनियमितता या धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए। सीबीआई जाँच हो।
JSSC CGL की विवादित परीक्षा को पूर्णतः रद्द किया जाए। इसकी नियुक्ति प्रक्रिया की CBI जांच कर दोषियों को सजा दी जाए। अभय तिवारी नाम का व्यक्ति जिस भी परीक्षा में पास हुआ है उन सभी परीक्षा को रद्द किया जाए।
JPSC - JSSC की सभी परीक्षाओं का कट ऑफ जारी किया जाए।
रद्द परीक्षाओं का एक नया और पारदर्शी समयबद्ध कार्यक्रम घोषित कर पुनः निष्पक्ष आयोजन सुनिश्चित किया जाए।
प्रभावित अभ्यर्थियों को हुई मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए पूर्ण क्षतिपूर्ति दी जाए तथा आगामी परीक्षाओं में आयु सीमा (Age Relaxation) में उचित छूट दी जाए।
2. समयबद्ध सीबीआई (CBI) जाँच और कठोर कार्रवाई
JPSC, JSSC एवं अन्य राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षाओं में हुई सभी अनियमितताओं की जाँच बिना विलंब के केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए। सरकार इसकी अनुशंसा अतिशीघ्र करे।
CBI को अधिकतम 6 महीने के भीतर अपनी अंतिम जाँच रिपोर्ट राज्य सरकार एवं जनता के समक्ष प्रस्तुत करने की वैधानिक बाध्यता तय की जाए। जाँच को लंबा न खींचा जाए।
दोषियों के सजा के लिए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना हो।
जाँच के दौरान दोषी अधिकारियों, ठेकेदारों, बिचौलियों एवं संदिग्ध एजेंसियों के विरुद्ध त्वरित एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
3. JPSC एवं JSSC को तत्काल भंग कर पुनर्गठन
वर्तमान आयोगों (JPSC एवं JSSC) को भंग किया जाए। देशभर के स्वतंत्र विशेषज्ञों (सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, प्रख्यात शिक्षाविदों, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों एवं पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों) की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए, जो नए सिरे से आयोगों की संरचना और पारदर्शी 'मानक संचालन प्रक्रिया' (SOP) तैयार करे। जिसमें राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन हो। नए आयोगों में किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप पूरी तरह प्रतिबंधित हो। सदस्यों का चयन पारदर्शी तरीके से हो।
4. पेपर लीक विरोधी कठोर कानून का सख्त अनुपालन
झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम और निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023 को और अधिक सख्त बनाते हुए उसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए।
दोषियों और माफियाओं की संपत्ति कुर्क/ज़ब्त करने का कड़ा प्रावधान जोड़ा जाए।
अमेरिकी Educational Testing Service (ETS) - Office of Testing Integrity (OTI) मॉडल की तर्ज पर संदिग्ध उम्मीदवारों का स्कोर रद्द करने, आजीवन प्रतिबंध लगाने और मामले को तुरंत कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सौंपने के कानूनी अधिकार शामिल किए जाएँ।
5. निश्चित वार्षिक परीक्षा कैलेंडर एवं अधिकारियों की जवाबदेही
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तर्ज पर प्रत्येक वर्ष का एक निश्चित परीक्षा कैलेंडर (Fixed Annual Exam Calendar) जारी हो। निर्धारित तिथि पर ही परीक्षा, परिणाम और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए। परीक्षा कैलेंडर का पालन किया जाए। परीक्षा कैलेंडर का उल्लंघन होने या निर्धारित समय पर परीक्षा न करा पाने की स्थिति में आयोग के अध्यक्ष एवं जिम्मेदार पदाधिकारियों को सीधे सेवा से बर्खास्त (Dismiss) करने का प्रावधान हो।
6. अभ्यर्थियों के नुकसान की पूर्ण भरपाई एवं मुआवजा
सरकार, आयोग या ठेका एजेंसियों की विफलता, लापरवाही अथवा धांधली के कारण परीक्षा रद्द या स्थगित होने पर अभ्यर्थियों को हुए आर्थिक और समय के नुकसान का मुआवजा दिया जाए। पीड़ित अभ्यर्थियों के लिए 1 महीने के भीतर पारदर्शी मुआवजा नीति घोषित कर उसका वितरण सुनिश्चित किया जाए।
7.. ETS विश्व की सबसे बड़ी परीक्षा संस्था है।
जो GRE, TOEFL आदि परीक्षाएँ संचालित करती है। इसकी परीक्षा पूरे विश्व में होती है।Educational Testing Service (ETS) की परीक्षा पद्धति की विश्वसनीयता अनुकरणीय है। इसकी Office of Testing Integrity (OTI) एक समर्पित सुरक्षा और पारदर्शिता जाँच प्रभाग है। जो बहु-स्तरीय (multi-pronged) दृष्टिकोण पर कार्य करता है। झारखंड सरकार अध्ययन के बाद ऐसे पद्धति को अपनाए जिससे परीक्षा की पारदर्शिता बरक़रार रहे।
ETS-OTI (अमेरिका) मॉडल पर आधारित परीक्षा सुरक्षा प्रणाली
अमेरिका की Educational Testing Service (ETS) तथा इसके Office of Testing Integrity (OTI) के चार मुख्य स्तंभों को परीक्षा प्रणाली में शामिल किया जाए। Prevention, Detection, Communication & Score Review, Response का पालन हो।
रोकथाम (Prevention): सुरक्षित प्रश्नपत्र डिज़ाइन, आधुनिक परीक्षा केंद्रों का चयन, बायोमेट्रिक एवं फेशियल रिकग्निशन, जियो-लोकेशन ट्रैकिंग, एआई (AI) आधारित लाइव प्रॉक्टरिंग और इंटरनेट की निरंतर निगरानी आदि पद्धति को अपनाया जाए।
समस्या के पहचान करने की प्रणाली विकसित हो। किस बिंदु पर बार - बार समस्या आ रही है इसका पता लगाया जाए। बिना किसी शिकायत के भी परीक्षा की शुद्धता जाँचने हेतु औचक ऑडिट (Random Quality Check) की व्यवस्था की जाए। स्कोर ट्रेंड्स का सांख्यिकीय विश्लेषण, हैंडराइटिंग व फोटो मिलान, और संदिग्ध अंक वृद्धि का तकनीकी परीक्षण सुनिश्चित हो।
संदिग्ध स्कोर मिलने पर दो-चरणीय समीक्षा (प्रारंभिक समीक्षा व रिव्यू बोर्ड)। पुष्टि होने पर तुरंत स्कोर रद्द करना, पुलिस कार्रवाई और पारदर्शी सार्वजनिक सूचना। समस्या की समीक्षा हो। पिछले 25 सालों की हर समस्या, अनियमितता की सूक्ष्म समीक्षा की जाए।
गलती पकड़े जाने पर स्कोर रद्द हो, उम्मीदवार पर प्रतिबंध लगे, आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई की जाए। हर गलती पर आयोग की प्रतिक्रिया तीव्र हो। आयोग अपने सभी सोशल मीडिया और वेबसाइट पर पारदर्शी तरीके से सूचनाओं का प्रसार करे।
8. आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर रोक - आयोग स्वयं करे संचालन
प्रश्नपत्र निर्माण, प्रिंटिंग, परीक्षा आयोजन, OMR सीट मूल्यांकन और परिणाम जारी करने जैसे संवेदनशील कार्यों को किसी एक निजी बाहरी एजेंसी को न सौंपा जाए।
UPSC के मॉडल की तर्ज पर JPSC और JSSC परीक्षाओं का संपूर्ण संचालन स्वयं अपनी देखरेख और गोपनीयता में करें, ताकि एजेंसियाँ अनियमितता करके बच न सकें। कोई भी गोपनीय कार्य निजी कंपनियों को न सौंपा जाए।
9. E-विकल्प (Question Not Attempted) प्रणाली
सभी बहुविकल्पीय (MCQ) परीक्षाओं में A, B, C, D के साथ अनिवार्य E-विकल्प लागू किया जाए।
उत्तर न देने की स्थिति में अभ्यर्थी अनिवार्य रूप से 'E' गोला भरेंगे।
कोई भी गोला न भरने या एक से अधिक भरने पर 0.25 अंकों की नेगेटिव मार्किंग की जाए।
कुल प्रश्नों के 10% से अधिक प्रश्न पूरी तरह खाली छोड़ने वाले अभ्यर्थियों को अयोग्य (Disqualify) घोषित किया जाए। इससे OMR शीट में बाद में होने वाले फेरबदल की गुंजाइश खत्म होगी।
10. अन्य आवश्यक डिजिटल एवं ढांचागत सुधार
सभी परीक्षा केंद्रों में लाइव CCTV कवरेज, बॉडी कैमरा और राज्यस्तरीय केंद्रीकृत कंट्रोल रूम से निगरानी हो।परीक्षा समाप्ति के तुरंत बाद प्रश्नपत्र एवं उत्तर कुंजी ऑनलाइन जारी कर 72 घंटे के भीतर आपत्ति निवारण व्यवस्था बनाई जाए। अभ्यर्थियों की समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु स्वतंत्र शिकायत निवारण हेल्पलाइन (Helpline) स्थापित हो। आयोग की वेबसाइटों को अत्यंत सुरक्षित, आधुनिक और पारदर्शी बनाया जाए, जहाँ अभ्यर्थी अपने विस्तृत डिजिटल स्कोरकार्ड रोल नंबर डाल कर देख सकें। हर परीक्षा का कट ऑफ कोटिवार जारी किया जाए। आरक्षण रोस्टर का पालन हो। ऐसी पद्धति विकसित की जाये जिससे समानता का अधिकार सुरक्षित रहे और अधिक झारखंडी छात्रों का चयन हो।
संपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया की वार्षिक स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर प्रस्तुत की जाए। संजय मेहता ने कहा की 14 वीं जेपीएससी की पीटी की वैधानिकता पूर्णतः सवालों को घेरे में है। इस विषय में अब एक स्पष्ट माँग है की पीटी को रद्द कर। पुनः परीक्षा तभी आयोजित हो जब एक बेहतर सुरक्षा और पारदर्शी परीक्षा संचालन विकसित हो जाए। इसे सरकार एक माह के भीतर करे। आजसू ने कहा है की झारखंड का युवा राज्य के विकास की रीढ़ है। यदि पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली स्थापित नहीं की गई, तो युवाओं का प्रतिभा-पलायन और असंतोष राज्य के भविष्य के लिए अत्यंत चिंताजनक होगा। राज्य के हालात बिगड़ रहे हैं। आजसू ने तुरंत माँगों को पूर्ण करने की माँग की है।
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