प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को टेम्पू में ढोया, नवजात की मौत से बढ़ा जनआक्रोश

आपात स्थिति में तड़पती रही प्रसव पीड़िता

प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को टेम्पू में ढोया, नवजात की मौत से बढ़ा जनआक्रोश
(टेम्पू में प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला और रास्ते में सामान्य सवारियां बैठाता वाहन चालक)

चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड स्थित शिवराजपुर गांव में समय पर ममता वाहन न मिलने के कारण प्रसव पीड़िता को टेम्पू से अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां बाद में इलाज में देरी और रेफरल के दौरान नवजात की मौत हो गई। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था, ममता वाहन के जीपीएस मॉनिटरिंग और अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिनोद कुमार 

चतरा: गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित और समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए संचालित ममता वाहन व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। लावालौंग प्रखंड के शिवराजपुर गांव की प्रसव पीड़िता कर्मी देवी को कथित तौर पर ममता वाहन की सुविधा नहीं मिलने के कारण टेम्पू से सिमरिया रेफरल अस्पताल ले जाना पड़ा। इस दौरान प्रसव पीड़ा से कराहती महिला को लेकर जा रहा टेम्पू रास्ते में सवारियां बैठाता और उतारता रहा। घटना का वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है।

प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को टेम्पू में ढोया, नवजात की मौत से बढ़ा जनआक्रोश

बताया जाता है कि शिवराजपुर निवासी बिरेन्द्र रविदास की पत्नी कर्मी देवी को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ी। परिजनों के अनुसार ममता वाहन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें निजी टेम्पू का सहारा लेना पड़ा। आरोप है कि गंभीर हालत में महिला को सुरक्षित तरीके से ले जाने के बजाय टेम्पू में बैठाकर अस्पताल ले जाया गया। रास्ते में भी वाहन सामान्य सवारी वाहन की तरह यात्रियों को बैठाता और उतारता रहा।

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आखिर किसके लिए है ममता वाहन?

ममता वाहन का उद्देश्य ही गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान सुरक्षित एवं समय पर अस्पताल पहुंचाना है। ऐसे में यदि प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को टेम्पू या अन्य निजी साधन का सहारा लेना पड़े, तो ममता वाहन के संचालन और निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार ममता वाहन के लिए फोन करने के बावजूद वाहन समय पर नहीं पहुंचते। यदि यह शिकायत सही है तो संबंधित अधिकारियों को यह जांचना चाहिए कि वाहन वास्तव में किन मरीजों के लिए और किस समय संचालित हो रहे हैं।

20 अगस्त की घटना ने बढ़ाई चिंता

परिजनों के अनुसार कर्मी देवी को 20 अगस्त को प्रसव के लिए सिमरिया रेफरल अस्पताल लाया गया था। परिजनों ने अस्पताल में चिकित्सकीय व्यवस्था और उपचार को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि समुचित इलाज नहीं मिलने के बाद महिला को आनन-फानन में लातेहार ले जाना पड़ा। इसी दौरान नवजात की मौत हो गई।

हालांकि नवजात की मौत के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि और निष्पक्ष जांच जरूरी है। यह भी जांच का विषय है कि अस्पताल पहुंचने के बाद महिला और नवजात को किस समय उपचार मिला, उस समय ड्यूटी पर कौन-कौन से चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे और मरीज को आगे रेफर करने का निर्णय कब लिया गया।

बायोमेट्रिक, ड्यूटी रोस्टर और ममता वाहन का GPS खंगालने की मांग

मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्थानीय लोगों ने संबंधित अस्पताल की चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति, ड्यूटी रोस्टर, मरीज का उपचार रिकॉर्ड और रेफरल से जुड़े दस्तावेज की जांच कराने की मांग की है।

इसके साथ ही ममता वाहन के कॉल रजिस्टर, GPS लोकेशन, मरीज को लेने का समय, अस्पताल पहुंचने का समय और वाहन संचालन से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच होनी चाहिए। इससे स्पष्ट हो सकता है कि घटना के समय ममता वाहन कहां था और उसे मरीज तक पहुंचने में देरी क्यों हुई।

कुंदा की घटना के बाद फिर उठे सवाल

ममता वाहन व्यवस्था को लेकर इससे पहले भी कुंदा में सवाल उठ चुके हैं। 26 अप्रैल 2026 को कुंदा पीएचसी के ममता वाहन के कथित रूप से बारात में इस्तेमाल किए जाने और गर्भवती महिला के मोटरसाइकिल से अस्पताल पहुंचने की खबर सामने आई थी। अब लावालौंग की घटना ने एक बार फिर इस व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कमीशन के आरोपों की भी हो निष्पक्ष जांच

स्थानीय स्तर पर ममता वाहन और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कथित कमीशनखोरी एवं अनियमितता के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में प्रशासन को आरोपों की जांच दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर करानी चाहिए। यदि सरकारी राशि का भुगतान हुआ है और उसके अनुरूप मरीजों को सेवा नहीं मिली, तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

अब सवाल सिर्फ एक टेम्पू में प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला का नहीं है। सवाल उस सरकारी व्यवस्था की जवाबदेही का है, जिस पर गरीब और ग्रामीण परिवार आपात स्थिति में भरोसा करते हैं। प्रशासन यदि मामले में स्वतः संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराता है, तो न केवल घटना की सच्चाई सामने आएगी बल्कि भविष्य में किसी अन्य गर्भवती महिला को ऐसी स्थिति से गुजरने से भी बचाया जा सकेगा।

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Edited By: Anjali Sinha
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Anjali Sinha covers Jharkhand local news, breaking stories, and trending updates at Samridh Jharkhand. She focuses on ground reports, regional developments, and timely news coverage to keep readers informed with accurate and engaging stories. Passionate about journalism, she brings attention to stories that matter to the community.

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