भ्रष्टाचार का दाग या आजादी का जश्न? आलमगीर आलम की जमानत पर बाबूलाल मरांडी का 'एक्स' पर बड़ा धमाका
भ्रष्टाचार के मामलों में कानून का हाथ लंबा
झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि यह केवल स्वास्थ्य के आधार पर मिली राहत है, निर्दोष होने का प्रमाण नहीं। मरांडी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा मनाए जा रहे जश्न की आलोचना करते हुए ₹32 करोड़ की नकद बरामदगी और टेंडर कमीशन घोटाले की याद दिलाई।
रांची: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आलमगीर आलम को बेल मिलने और इसपर कांग्रेसियों द्वारा मनाए जा रहे जश्न पर को लेकर सोशल मीडिया के एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि यह केवल उम्र और बीमारी के आधार पर कड़ी शर्तों के साथ मिली अंतरिम राहत है, अंतिम फैसला नहीं।
https://twitter.com/i/status/2054865283077062951

साथ ही मरांडी ने कहा कि याद रखिए, जमानत मिल जाना निर्दोष होने का प्रमाण नहीं होता। मुकदमा अभी बाकी है, अदालतें अभी बाकी हैं और कानून की प्रक्रिया अभी लंबी चलेगी। सत्ता, संपर्क और संसाधनों के दम पर कुछ समय की राहत तो मिल सकती है, लेकिन ऐसे मामलों का दाग आसानी से नहीं मिटता। अगर भरोसा न हो तो लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक और कानूनी सफर को देख लीजिए। सत्ता गई, उम्र ढली, स्वास्थ्य बिगड़ा, लेकिन पुराने मामलों की परछाई आज भी पीछा नहीं छोड़ रही। भ्रष्टाचार के मामलों में अदालत की दस्तक देर से जरूर आती है, पर आती जरूर है।
