प्रेत आत्माओं का मेला: पितृपक्ष में गया की प्रेतशिला पर उमड़ती है अकाल मृतकों की पुकार

रात ढलते ही सन्नाटे में गूँजती है अकाल मृतकों की अदृश्य चीख

प्रेत आत्माओं का मेला: पितृपक्ष में गया की प्रेतशिला पर उमड़ती है अकाल मृतकों की पुकार
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समृद्ध डेस्क: हर साल पितृपक्ष में बिहार के गया में स्थित विष्णुपद मंदिर और प्रेतशिला पर्वत पर दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु आते हैं। मान्यता है कि जिनकी अकाल मृत्यु होती है, उनके लिए गया की यात्रा और प्रेतशिला पर्वत पर श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को मोक्ष और शांति मिलती है। यहां पर विशेष रूप से प्रेतशिला पर्वत पर मृत्यु तिथि के अनुसार तर्पण, पिंडदान और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है, और इस अवसर पर गया धार्मिक आस्था का केंद्र बन जाता है.

प्रेतशिला पर्वत पर श्रद्धालुओं की भीड़

पितृपक्ष के दौरान गया में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर परिसर और प्रेतशिला पर्वत पर विशेष रूप से पिंडदान और तर्पण के लिए लोग पहुंचते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पितृपक्ष के प्रथम दिन से ही 676 विशेष धार्मिक ट्रेन और हजारों बसें श्रद्धालुओं को लेकर यहां पहुंचती हैं। गेस्ट हाउस, धर्मशाला और होटल पूरी तरह भरे रहते हैं। प्रशासन भी इस दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं को बनाए रखने के लिए सतर्क रहता है.

पिंडदान एवं तर्पण की विधि
सांझ होते ही बंद हो जाता है बाजार

मान्यता है कि पितृपक्ष के समय सूर्यास्त के बाद यहां कोई बाजार नहीं खुलता। स्थानीय लोग और श्रद्धालु इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि पर्वत या मंदिर परिसर में रात को कोई पूजा या तर्पण नहीं किया जाए.

भावनाओं से जुड़ी तस्वीरें

गया के घाट एवं प्रेतशिला पर श्रद्धालु अपने दिवंगत परिजनों की तस्वीरें तथा उनकी यादें लेकर आते हैं। पूजा के दौरान इन तस्वीरों के सामने तर्पण एवं पिंडदान किया जाता है। श्रद्धालु अपने दिल की व्यथा मंदिर के पुजारी को सुनाते हैं और उनके लिए ईश्वर से शांति की प्रार्थना करते हैं।

प्रशासनिक दिशा-निर्देश

पितृपक्ष मेले के दौरान प्रशासन ने विशेष सुरक्षा इंतजाम किए हैं। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए अस्थाई भोजनालय, चिकित्सा शिविर, ट्रैफिक नियंत्रण, पुलिस एवं वालंटियर्स की टीम तैनात की गई है। बाहरी राज्यों से आए श्रद्धालुओं के लिए रेल, बस सेवा और धर्मशालाओं की सुविधाएं बढ़ाई गई हैं।

निष्कर्ष: आस्था, परंपरा और वर्तमान का संगम

पितृपक्ष और गया से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान आज भी करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। जगह-जगह श्रद्धालुओं की भीड़, पुरोहितों का मार्गदर्शन, प्रशासन का सहयोग और स्थानीय समुदाय की सक्रियता इस पूरे अनुष्ठान को सफल बनाती है। ‘गया में भूखी हैं प्रेत आत्माएं’ जैसी मान्यताओं ने पितृपक्ष के धार्मिक स्वरूप को और भी खास बना दिया है.

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Edited By: Samridh Media Desk
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