राजस्थान के मिश्रोली में मिला करोड़ों साल पुराना भू-विरासत का खजाना
राजस्थान के झालावाड़ जिले के मिश्रोली क्षेत्र में स्थित दुर्लभ बेसाल्टिक ज्वाइंट्स को भू-विरासत का महत्वपूर्ण खजाना माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इन चट्टानों का निर्माण करीब 6.5 करोड़ वर्ष पहले ज्वालामुखी लावे के ठंडा होने से हुआ था। देश में केवल कुछ ही स्थानों पर इस प्रकार की प्राकृतिक संरचनाएं देखने को मिलती हैं। भारतीय सांस्कृतिक निधि (इन्टेक) ने इस क्षेत्र को भू-विरासत सूची में शामिल किया है। इन दुर्लभ चट्टानों की सुरक्षा के लिए यहां निजी खनन पर रोक लगा दी गई है।
Rajasthan Geo Heritage: राजस्थान के झालावाड़ जिले के मिश्रोली कस्बे में दर्शनीय स्तम्भाकार बेसाल्टिक ज्वाइंट्स को विरासत का अटूट खजाना माना जा रहा है। भारतीय सांस्कृतिक निधि (इन्टेक) विशेषज्ञों के अनुसार, इस भू-विरासत का निर्माण 6.5 करोड़ वर्ष पहले यहां ज्वालामुखी लावे से हुआ था। देश में अन्य चार-पांच स्थानों पर ही ऐसी दुर्लभ संरचनायें पाई गई हैं। इस क्षेत्र में बेसाल्ट चट्टानों को कीमती भू-विरासत मानते हुये इसके निजी खनन पर रोक लगा दी गई है।
ये खूबसूरत दिखने वाले प्राकृतिक सघन स्तम्भ महीन दानेदार गहरे, काले एवं ग्रे रंग के पत्थर से लावा शीतलीकरण एवं मैन्यूफेक्चरिंग प्रक्रिया से निर्मित हुये हैं। ये चट्टाने 2 से 25 फीट लंबाई में हैं। इनकी बनावट चतुष्कोणीय से षटकोणीय तक है। इस दुर्लभ चट्टानी क्षेत्र को भारतीय सांस्कृतिक निधी (इन्टेक) ने भू-विरासत की सूची में शामिल किया है।

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