Monsoon Update: 47°C की झुलसाती गर्मी के बीच राहत कब? जानें मानसून और बारिश का नया अपडेट
देशभर में लू और भीषण गर्मी का कहर जारी है। जानें मानसून कब आएगा, IMD का नया अपडेट और बारिश से राहत कब मिलेगी।
Monsoon Update: उत्तर-पश्चिम से लेकर मध्य भारत तक, पूरब से लेकर प्रायद्वीपीय इलाकों तक- हर तरफ एक ही हाल है। लू के थपेड़े, उबलती सड़कें और राहत का कोई अता-पता नहीं। जिस मानसून से सबको उम्मीद थी, वो भी वक्त पर नहीं आया। आम आदमी के मन में बस एक सवाल है यह आग कब बुझेगी?
कहां-कहां कितनी गर्मी?
उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत, उत्तर प्रदेश और उत्तरी प्रायद्वीपीय भारत के बड़े हिस्सों में तापमान 43 से 47 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज हो रहा है। बाकी अधिकांश इलाकों में भी पारा 40 से 43 डिग्री के बीच बना हुआ है। दिल्ली की बात करें तो 25 मई की रात पिछले करीब 14 साल की सबसे गर्म रात बन गई। इससे पहले 19 मई को दिल्ली के सफदरजंग स्टेशन पर इस सीजन का सबसे ऊंचा तापमान 45.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ था - जो सामान्य से करीब 4.7 डिग्री अधिक था। यह मई 2026 का पहला आधिकारिक हीटवेव दिन घोषित हुआ।
लू की चपेट में कौन-कौन से राज्य?

2026 की गर्मी इतनी खतरनाक क्यों है?
मौसम विशेषज्ञ इस असामान्य गर्मी के पीछे तीन बड़ी वजहें बता रहे हैं।
पहली वजह है अल नीनो। प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ऊपर चला जाने की वजह से पूरे मौसम तंत्र पर असर पड़ रहा है। दूसरी वजह है पूर्व-मानसूनी बारिश का न होना, जिससे जमीन की ऊपरी परत बहुत तेजी से गर्म हो रही है। तीसरी और बेहद अहम वजह है बढ़ता शहरीकरण - घनी इमारतें, कम होते पेड़ और पक्की सड़कें गर्मी को घंटों तक थामे रखती हैं और रात को भी ठंडक नहीं आने देतीं।
मानसून आएगा कब?
यही सबसे बड़ा सवाल है। मौसम विभाग ने पहले उम्मीद जताई थी कि दक्षिण-पश्चिम मानसून 26 मई को केरल में दस्तक दे देगा - यानी सामान्य तारीख 1 जून से पांच दिन पहले। लेकिन वो तारीख आई और निकल गई। मानसून नहीं आया।
अब नई संभावित खिड़की 2 से 4 जून बताई जा रही है, जो सामान्य तारीख से एक से तीन दिन देर है और पहले जताई गई उम्मीद से पूरे एक हफ्ते पीछे। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो-तीन दिनों में अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के कुछ हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने लगेंगी।
लेकिन उत्तर भारत तक पहुंचने में अभी काफी वक्त है। मानसून केरल से दिल्ली तक पहुंचने में आमतौर पर चार से छह हफ्ते लेता है। दिल्ली में मानसून के जून के आखिरी हफ्ते तक पहुंचने का अनुमान है। और अल नीनो के चलते इस बार मानसून के सामान्य से कमजोर रहने की भी आशंका जताई जा रही है।
राहत कब और कैसे?
अच्छी खबर यह है कि लंबे इंतजार के बाद कुछ राहत दिखने लगी है। 28 मई को एक नया और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना है। इससे एक दिन पहले 27 मई को दक्षिण पंजाब, उत्तर राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में एक चक्रवाती परिसंचरण बनेगा जो 27 से 31 मई तक दिल्ली के करीब बना रहेगा।
इस दौरान 28 से 31 मई के बीच धूल भरी आंधी और तेज बारिश होने के आसार हैं। दिल्ली-एनसीआर में 28 मई से लू में कमी आने का अनुमान है। मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में 28 से 29 मई के बाद तापमान में 2 से 4 डिग्री की गिरावट दर्ज होने की उम्मीद है। 31 मई और 1 जून से अधिकांश इलाकों में लू की चेतावनी खत्म होने की संभावना है।
इन बातों का ध्यान रखें
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए जरूरी सलाह जारी की है। दोपहर 12 से 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें। खूब पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें। हल्के और सूती कपड़े पहनें। बुजुर्ग, बच्चे और बाहर काम करने वाले मजदूर खास सावधानी बरतें।
उत्तर-पूर्व भारत, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में अगले कुछ दिनों में बारिश और आंधी की संभावना है, इसलिए वहां भी सतर्क रहना जरूरी है।
फिलहाल अगले दो-तीन दिन कठिन हैं - लेकिन 28 से 29 मई के बाद मौसम पलटेगा। जब तक मानसून उत्तर भारत तक नहीं पहुंचता, यही पश्चिमी विक्षोभ इस झुलसाती गर्मी से कुछ राहत देने वाला है।
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