एक टैंकर में कितना होता है Crude Oil? भारत में इससे कितने घंटे चलता है इंतजाम, जानकर चौंक जाएंगे आप
एक जहाज में लाखों बैरल कच्चा तेल लाया जाता है, लेकिन क्या यह भारत की एक दिन की जरूरत पूरी कर सकता है? या फिर देश को रोज कई टैंकरों की जरूरत पड़ती है? जानिए VLCC जैसे बड़े टैंकर की क्षमता, भारत की तेल खपत और रिजर्व से जुड़ी पूरी जानकारी विस्तार से।
नई दिल्ली: दुनियाभर में तेल संकट की चिंता एक बार फिर तेज हो गई है। इसी बीच 18 अप्रैल को टैंकर शिप देश गरिमा ने हॉर्मुज स्ट्रेट पार किया और यह जहाज 22 अप्रैल को मुंबई पहुंचने वाला है। ऐसे में यह सवाल भी अहम हो जाता है कि एक टैंकर में आखिर कितना कच्चा तेल लादा जा सकता है और उससे भारत की कितनी जरूरत पूरी हो सकती है।
क्रूड ऑयल को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए अलग-अलग तरह के जहाजों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें ULCC, VLCC, Suezmax, Aframax, Panamax और Coastal Tanker शामिल हैं। इन सभी में ULCC सबसे बड़ा माना जाता है, जबकि दुनिया भर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल VLCC का होता है। आम तौर पर एक VLCC की क्षमता करीब 2 लाख मीट्रिक टन मानी जाती है, हालांकि इसमें लगभग 1.80 लाख से 3.20 लाख मीट्रिक टन तक तेल ले जाया जा सकता है। बैरल के हिसाब से यह मात्रा लगभग 13 लाख से 23 लाख बैरल तक बैठती है।

अगर एक औसत VLCC में करीब 20 लाख बैरल तेल लादा जाता है, तो यह भारत की एक दिन की जरूरत के मुकाबले कम पड़ता है। यानी देश की रोजाना जरूरत पूरी करने के लिए लगभग 3 VLCC टैंकर के बराबर तेल चाहिए होगा।
फ़ोटो: Suezmax टैंकर खास तौर पर स्वेज नहर से गुजरने के लिए डिजाइन किया गया है।
भारत अपने भंडार में भी आपात स्थिति के लिए तेल जमा रखता है। सामान्य तौर पर देश के पास करीब 74 दिन की जरूरत के बराबर तेल रखने की क्षमता बताई जाती है, यानी लगभग 40 करोड़ बैरल। पेट्रोलियम मंत्रालय की 26 मार्च की अपडेट में कहा गया था कि भारत के पास करीब 60 दिन की आपूर्ति के लायक तेल उपलब्ध है। इसके बाद सरकार की तरफ से रिजर्व को लेकर कोई नई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
