'ठोस कदम नहीं उठाए तो पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करेंगे', सुप्रीम कोर्ट की MP सरकार को फटकार, जानिए पूरा मामला

'ठोस कदम नहीं उठाए तो पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करेंगे', सुप्रीम कोर्ट की MP सरकार को फटकार, जानिए पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट (IS: SCI)

चंबल में लगातार हो रहे अवैध खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करने जैसे सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। अब इस मामले ने प्रशासन और पर्यावरण सुरक्षा दोनों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

नई दिल्ली: देश के सबसे संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्रों में से एक राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट कहा कि राज्य अपनी कमजोरियों या संसाधनों की कमी का हवाला देकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि राज्य सरकार ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में यह स्वीकार किया था कि उसके वन अधिकारी रेत माफिया से मुकाबला करने के लिए पर्याप्त हथियार और संसाधनों से लैस नहीं हैं, जबकि माफिया आधुनिक हथियारों और वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अदालत ने इसे प्रशासनिक विफलता का संकेत बताया।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि ऐसी स्थिति न केवल कानून व्यवस्था को कमजोर करती है, बल्कि अवैध गतिविधियों, हिंसा और पर्यावरणीय नुकसान को भी बढ़ावा देती है। अदालत ने यह भी कहा कि प्रवर्तन एजेंसियों को पर्याप्त सुरक्षा और संसाधन न देना शासन व्यवस्था के मूल सिद्धांतों पर चोट के समान है।

कोर्ट ने तीन राज्यों, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया है कि अवैध खनन वाले मार्गों पर हाई-रिजॉल्यूशन और वाई-फाई सक्षम CCTV कैमरे लगाए जाएं, ताकि खनन गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा सके। साथ ही मशीनों और वाहनों में GPS ट्रैकिंग लगाने जैसे तकनीकी उपायों पर भी जोर दिया गया है।

Read More.. कोयला माफिया पर ED का शिकंजा, 159 करोड़ की संपत्ति कुर्क, हवाला और फर्जी कंपनियों का बड़ा खुलासा

अदालत ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि राज्य सरकारें जल्द ठोस कदम नहीं उठाती हैं, तो पैरामिलिट्री बल की तैनाती, खनन पर पूर्ण प्रतिबंध और भारी जुर्माने जैसे कठोर आदेश जारी किए जा सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 मई को तय की गई है।

Read More.. EXPLAIN: दो-तिहाई बहुमत नहीं, फिर भी बिल पेश, क्या सरकार ने पहले से तय कर रखी थी सियासी चाल?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस सख्ती का मुख्य उद्देश्य चंबल क्षेत्र की जैव विविधता और दुर्लभ जीवों जैसे घड़ियाल और गंगा डॉल्फिन के प्राकृतिक आवास को बचाना है, क्योंकि अनियंत्रित खनन से नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है

Edited By: Samridh Desk

Latest News

EXPLAIN: दो-तिहाई बहुमत नहीं, फिर भी बिल पेश, क्या सरकार ने पहले से तय कर रखी थी सियासी चाल? EXPLAIN: दो-तिहाई बहुमत नहीं, फिर भी बिल पेश, क्या सरकार ने पहले से तय कर रखी थी सियासी चाल?
साहिबगंज में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, दीपक दुबे होंगे नए डीसी
हजारीबाग को मिला नया कप्तान: अमन कुमार ने संभाली कमान, कानून-व्यवस्था मजबूत करने पर फोकस
महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष का विरोध, नारी सशक्तिकरण पर चोट : धनंजय पुटूस
Ramgarh News: नए डीसी ऋतुराज ने संभाली कमान, विकास पर फोकस
Koderma News: मंजुला शर्मा मेमोरियल एकेडमी डोमचांच में प्रतिभा सम्मान समारोह का भव्य आयोजन
'ठोस कदम नहीं उठाए तो पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करेंगे', सुप्रीम कोर्ट की MP सरकार को फटकार, जानिए पूरा मामला
कोडरमा व्यवहार न्यायालय में ई-कोर्ट सर्विस का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
Chaibasa News: बहन की शादी से 4 दिन पहले युवक ने की खुदकुशी, गांव में पसरा मातम
Giridih News: कुएं में मिले दो बच्चियों के शव, पूरे गांव में पसरा मातम
Jamshedpur News: सेवाव्रती नील संघ क्लब में बांग्ला नववर्ष उत्सव, गीत-संगीत से गूंजा माहौल
थार एक्सीडेंट नहीं, प्यार और गुस्से ने रचा खूनी प्लान, पुलिस ने किया बड़ा खुलासा