'ठोस कदम नहीं उठाए तो पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करेंगे', सुप्रीम कोर्ट की MP सरकार को फटकार, जानिए पूरा मामला
चंबल में लगातार हो रहे अवैध खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करने जैसे सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। अब इस मामले ने प्रशासन और पर्यावरण सुरक्षा दोनों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
नई दिल्ली: देश के सबसे संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्रों में से एक राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट कहा कि राज्य अपनी कमजोरियों या संसाधनों की कमी का हवाला देकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि राज्य सरकार ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में यह स्वीकार किया था कि उसके वन अधिकारी रेत माफिया से मुकाबला करने के लिए पर्याप्त हथियार और संसाधनों से लैस नहीं हैं, जबकि माफिया आधुनिक हथियारों और वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अदालत ने इसे प्रशासनिक विफलता का संकेत बताया।

अदालत ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि राज्य सरकारें जल्द ठोस कदम नहीं उठाती हैं, तो पैरामिलिट्री बल की तैनाती, खनन पर पूर्ण प्रतिबंध और भारी जुर्माने जैसे कठोर आदेश जारी किए जा सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 मई को तय की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सख्ती का मुख्य उद्देश्य चंबल क्षेत्र की जैव विविधता और दुर्लभ जीवों जैसे घड़ियाल और गंगा डॉल्फिन के प्राकृतिक आवास को बचाना है, क्योंकि अनियंत्रित खनन से नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है
