झारखंड में अचानक बढ़ी भीषण गर्मी की असली वजह क्या है, समझिए आसान भाषा में

झारखंड में अचानक बढ़ी भीषण गर्मी की असली वजह क्या है, समझिए आसान भाषा में
झारखंड में अचानक बढ़ी भीषण गर्मी की असली वजह क्या है ? (इलस्ट्रेटर इमेज)

क्या आपको भी लग रहा है कि झारखंड में अचानक गर्मी कुछ ज़्यादा ही तेज हो गई है? आखिर अप्रैल में ही तापमान इतना क्यों बढ़ गया और हीटवेव जैसी स्थिति कैसे बन गई? आइए आसान भाषा में समझते हैं इसके पीछे की असली वजह।

रांची: झारखंड में अप्रैल के तीसरे हफ्ते में गर्मी ने अचानक तीखा रूप ले लिया है। भारतीय मौसम विभाग के ताज़ा बुलेटिन के मुताबिक राज्य में 20 से 22 अप्रैल 2026 के बीच हीटवेव की स्थिति बनी रहने की संभावना रही, जबकि 21 अप्रैल के लिए भी झारखंड में heat wave warning जारी थी। IMD की रिपोर्ट में Jharkhand को उन राज्यों में शामिल किया गया है जहां इस अवधि में तापमान और अधिक बढ़ने की आशंका जताई गई थी।

मौसम विभाग के आंकड़े भी इस गर्मी की तीव्रता को साफ दिखाते हैं। झारखंड के दैनिक मौसम बुलेटिन के अनुसार 20 अप्रैल की सुबह दर्ज तापमान में रांची का अधिकतम तापमान 40.1°C, जमशेदपुर का 42.6°C, डाल्टनगंज का 43.8°C और बोकारो-थर्मल का 42.2°C दर्ज हुआ। यही नहीं, कई जगहों पर तापमान सामान्य से काफी ऊपर रहा, जिससे यह साफ है कि यह सिर्फ “गर्मी का मौसम” नहीं, बल्कि सामान्य से कहीं ज्यादा तीखा गर्म दौर है।

इस अचानक बढ़ी गर्मी की सबसे बड़ी वजह है पूर्वी भारत में तापमान का तेज़ उछाल और लंबे समय तक बने रहने वाला शुष्क मौसम। IMD के अनुसार 19 से 21 अप्रैल के बीच पूर्वी भारत में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि की संभावना थी, और उसी दौरान झारखंड सहित पूर्वी हिस्सों में हीटवेव की चेतावनी जारी रही। यानी वातावरण पहले से ही गर्म था, ऊपर से तापमान को नीचे लाने वाली बारिश या बादल नहीं थे।

रांची मौसम केंद्र के बुलेटिन में यह भी दिखा कि राज्य के कई हिस्सों में dry weather बना रहा और बारिश लगभग नहीं के बराबर हुई। जब बादल कम होते हैं, हवा में नमी घटती है और सूरज की किरणें जमीन को सीधे और तेजी से गर्म करती हैं। यही वजह है कि दिन चढ़ने के साथ तापमान बहुत तेजी से ऊपर चला जाता है और लोगों को लू जैसी स्थिति महसूस होने लगती है।

IMD के व्यापक पूर्वानुमान में भी यह साफ कहा गया कि झारखंड सहित कई राज्यों में heatwave conditions की संभावना है। 20 अप्रैल की रात जारी बुलेटिन में झारखंड को हीटवेव प्रभावित राज्यों की सूची में रखा गया था, जबकि 21 अप्रैल के बुलेटिन में भी राज्य के लिए गर्मी की चेतावनी बनी रही। इसका मतलब है कि यह स्थिति किसी एक दिन की नहीं, बल्कि कई दिनों से जमा हो रहे मौसमी दबाव का नतीजा है।

सरल भाषा में समझें तो झारखंड में गर्मी इसलिए अचानक बहुत ज्यादा लगी क्योंकि अप्रैल के इस हिस्से में मौसम ने तीन काम एक साथ किए। पहला, सूरज की सीधी तपिश बढ़ गई। दूसरा, बारिश और बादलों ने राहत नहीं दी। तीसरा, लगातार शुष्क और गर्म हवा ने तापमान को नीचे नहीं आने दिया। जब ये तीनों बातें एक साथ हो जाएं, तो गर्मी “सामान्य” नहीं रहती, वह हीटवेव बन जाती है। IMD भी heatwave को किसी क्षेत्र के सामान्य तापमान की तुलना में असामान्य रूप से अधिक तापमान की अवधि मानता है, और उसके असर को बढ़ाने वाले कारकों में मौसम की अनुकूल परिस्थितियां शामिल होती हैं।

फिलहाल मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि अगले कुछ दिनों तक राज्य में गर्मी से पूरी राहत मिलना आसान नहीं होगा, हालांकि कुछ हिस्सों में गरज-चमक और आंशिक बारिश की संभावना अलग-अलग बुलेटिनों में जताई गई है। यानी राहत आ सकती है, लेकिन यह हर जगह एक साथ नहीं मिलेगी।

Edited By: Samridh Desk

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