बिना खाना खाए इंसान कितने दिन तक जिंदा रह सकता है? डॉक्टर ने बताया शरीर का पूरा विज्ञान
क्या आपने कभी सोचा है कि बिना खाना खाए इंसान कितने दिन तक जीवित रह सकता है? जानिए डॉक्टर के अनुसार शरीर में होने वाले बदलाव और इससे जुड़े वैज्ञानिक तथ्य।
हेल्थ डेस्क: यह सवाल शायद कभी न कभी आपके मन में भी आया होगा कि अगर कोई इंसान खाना खाना बंद कर दे तो वह कितने दिनों तक जीवित रह सकता है? ग्रेटर नोएडा स्थित NIIMS मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के मेडिसिन विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सुमोल रत्न के अनुसार इसका कोई एक निश्चित जवाब नहीं है, क्योंकि यह पूरी तरह से व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति की आयु, शारीरिक वजन, पहले से चली आ रही बीमारियां, शरीर में वसा की मात्रा और सबसे अहम बात यह कि उसे पानी मिल रहा है या नहीं इन सब बातों पर यह तय होता है कि वह व्यक्ति कितने समय तक जीवित रह सकता है। यदि पानी की आपूर्ति बनी रहे, तो सामान्य परिस्थितियों में एक इंसान लगभग एक से दो महीने तक जीवित रह सकता है। हालांकि इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि वह पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य अवस्था में रहेगा।
शरीर में कब और कैसे शुरू होते हैं बदलाव?
हमारा शरीर एक बेहद चतुर और जटिल तंत्र की तरह काम करता है। जैसे ही भोजन मिलना बंद होता है, शरीर तुरंत हार नहीं मानता बल्कि अपने भीतर संग्रहित ऊर्जा को उपयोग में लाने लगता है। शुरुआती अवस्था में शरीर पहले से उपलब्ध ग्लूकोज का इस्तेमाल करता है। उसके बाद यकृत (लिवर) और मांसपेशियों में भंडारित ग्लाइकोजन को ऊर्जा में परिवर्तित किया जाने लगता है। यह भंडार लगभग 24 घंटों के भीतर तेजी से समाप्त होने लगता है।

पानी न मिले तो और भी खतरनाक होती है स्थिति
पहले 24 घंटों में क्या महसूस होता है?

दूसरे से तीसरे दिन क्या होता है?
दूसरे और तीसरे दिन तक शरीर वसा को ऊर्जा के मुख्य स्रोत के रूप में उपयोग में लाने लगता है। कुछ लोगों में भूख की तीव्रता थोड़ी कम हो सकती है, परंतु शारीरिक कमजोरी बढ़ती जाती है। इस अवस्था में सांस से एक अलग प्रकार की गंध आने लगती है, जिसका कारण शरीर में कीटोन्स (Ketones) का निर्माण होना है। यही प्रक्रिया लंबे उपवास या कीटो डाइट के दौरान भी देखी जाती है।
एक सप्ताह के बाद शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
एक सप्ताह से अधिक समय तक भोजन न मिलने पर शरीर में विटामिन, खनिज और प्रोटीन की गंभीर कमी उत्पन्न होने लगती है। वजन में तेज गिरावट, मांसपेशियों का कमजोर होना और दैनिक कार्य करने में असमर्थता जैसे लक्षण प्रकट होने लगते हैं। इस समय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर पड़ जाती है, जिससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
इस अवस्था में शरीर के लगभग सभी अंग प्रभावित होने लगते हैं। हृदय की मांसपेशियां क्षीण होने लगती हैं, जिसके फलस्वरूप धड़कन अनियमित या धीमी हो सकती है। रक्तचाप में गिरावट आती है और बार-बार चक्कर आने की समस्या होने लगती है। इसके अलावा गुर्दे और यकृत की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है। शरीर का तापमान गिरने लगता है और व्यक्ति को लगातार ठंड का अनुभव होता रहता है।
हार्मोनल बदलाव भी होते हैं गंभीर
लंबे समय तक भूखे रहने पर हार्मोन्स पर भी व्यापक प्रभाव पड़ता है। महिलाओं में मासिक धर्म बाधित हो सकता है, जबकि पुरुष और महिला दोनों में विभिन्न प्रकार के हार्मोनल असंतुलन देखने को मिल सकते हैं।
जब जान का खतरा बन जाती है भुखमरी
स्थिति तब अत्यंत खतरनाक हो जाती है जब शरीर के पास ऊर्जा के लिए उपयोग योग्य न तो वसा बचती है और न ही मांसपेशियां। इस अवस्था में हृदय, मस्तिष्क, फेफड़े और गुर्दे जैसे अत्यावश्यक अंग सुचारु रूप से कार्य करने में असमर्थ हो जाते हैं। व्यक्ति अत्यधिक दुर्बल हो जाता है, चलना-फिरना कठिन हो जाता है और बेहोशी तक की नौबत आ सकती है। यदि समय पर उचित उपचार और पोषण नहीं दिया गया तो अंग विफलता, गंभीर संक्रमण या हृदय गति रुकने जैसी जानलेवा स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
लंबे समय बाद खाना खिलाने में भी बरतनी होती है सावधानी
यह जानना भी बेहद जरूरी है कि यदि कोई व्यक्ति कई दिनों तक भूखा रहा हो, तो उसे एकदम से अधिक मात्रा में भोजन नहीं देना चाहिए। ऐसा करने पर शरीर में "रिफीडिंग सिंड्रोम" (Refeeding Syndrome) नामक गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस स्थिति में शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स में अचानक और तेज बदलाव होते हैं, जिससे हृदय, मस्तिष्क और अन्य अंगों पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है। इसी कारण चिकित्सकों की निगरानी में धीरे-धीरे और संतुलित आहार देकर ऐसे व्यक्ति को सामान्य स्थिति में लाया जाता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय या लंबे उपवास से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
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