कॉकरोच जनता पार्टी की सोशल मीडिया पर धूम, क्या 2029 चुनाव भी लड़ेगी? जानिए पूरा मामला
कॉकरोच जनता पार्टी नाम का व्यंग्यात्मक X हैंडल सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी।
Cockroach Janata Party: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक नाम खूब गूंज रहा है "कॉकरोच जनता पार्टी"। नाम सुनकर पहले तो हंसी आती है, फिर उत्सुकता जागती है कि आखिर ये है क्या? और जब पता चलता है कि बड़े-बड़े नेता इसे फॉलो कर रहे हैं, तो सवाल और गहरा हो जाता है।
CJI के एक बयान से हुई शुरुआत
बात कुछ दिन पहले की है जब सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से कर दी। उनका कहना था कि ऐसे युवा अपनी नौकरी में कुछ खास नहीं कर पाते। बाद में उन्होंने सफाई दी कि उनका इशारा फर्जी डिग्री लेकर घूमने वालों की तरफ था। लेकिन इंटरनेट की दुनिया में मीम्स और ट्रोलिंग का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
असल में क्या है ये 'पार्टी'?
मेंबरशिप की शर्तें भी हैं गजब

24 घंटे में 10,000 फॉलोअर्स
इस व्यंग्य की धार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज 24 घंटे के भीतर इसे 10,000 से ज्यादा लोगों ने फॉलो किया। अब तक इसके 33,000 से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं - जिन्हें यह हैंडल प्यार से "कॉकरोच" ही कहता है!
कॉकरोच जनता पार्टी का मेनिफेस्टो: मजेदार भी, तीखा भी!
जिस पार्टी का नाम ही इतना अनोखा हो, उसका मेनिफेस्टो भला साधारण कैसे होता। कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना घोषणापत्र भी उसी चुटीले और व्यंग्यात्मक अंदाज में पेश किया है, जिसके लिए यह हैंडल जाना जा रहा है।
खुद को बताया- Secular, Socialist, Democratic और Lazy!
पार्टी अपनी पहचान चार शब्दों में करती है- सेक्युलर, सोशलिस्ट, डेमोक्रेटिक और... लेजी! यानी आलसीपन को भी यहाँ गर्व के साथ अपनाया गया है।
मेनिफेस्टो के अहम वादे
इस 'पार्टी' ने कुछ ऐसे वादे किए हैं जो सुनने में हल्के-फुल्के लगते हैं, लेकिन इनके पीछे एक तीखा सामाजिक संदेश भी छुपा है —
- रिटायर्ड चीफ जस्टिस को राज्यसभा नहीं- सेवानिवृत्ति के बाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को राज्यसभा की सीट न दी जाए।
- महिलाओं को 50% आरक्षण- संसद में महिलाओं की भागीदारी 33 नहीं, पूरे 50 प्रतिशत होनी चाहिए।
- दलबदलुओं पर 20 साल का बैन- जो नेता पार्टी बदलें, उन्हें अगले 20 साल तक कोई भी चुनाव लड़ने का अधिकार न हो।
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