Sahebganj news: नन्हें मिचेल जॉन सोरेन का कमाल, बने फुटबॉल खिलाड़ियों के आइकॉन
5 साल की उम्र में 1000 जगलिंग, अब पंजाब की अकादमी में मिला 10 साल का फ्री स्कॉलरशिप
साहिबगंज के कोटालपोखर का नन्हा फुटबॉलर मिचेल जॉन सोरेन आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। मात्र 5 साल की उम्र में 1000 से अधिक जगलिंग करने वाले मिचेल के टैलेंट को देखकर पंजाब की प्रतिष्ठित मिनर्वा फुटबॉल अकादमी ने उन्हें 10 साल की 100% स्कॉलरशिप प्रदान की है। यूट्यूब पर वायरल हुए उनके स्किल्स और पिता जॉनसन सोरेन की मेहनत के दम पर मिचेल अब भारतीय फुटबॉल के बड़े मंच पर अपनी चमक बिखेरने को तैयार हैं।
साहिबगंज: जिले के बरहरवा प्रखंड अंतर्गत कोटालपोखर के एक छोटे से क्षेत्र से आने वाले प्रतिभाशाली बाल फुटबॉलर मिचेल जॉन सोरेन ने बहुत कम उम्र में ही अपनी मेहनत और लगन से बड़ी पहचान बनानी शुरू कर दी है। मिचेल ने मात्र 3 साल की उम्र से ही अपने पिता जॉनसन सोरेन के साथ फुटबॉल की ट्रेनिंग शुरू कर दी थी। उनके पिता झारखंड डायनमोज फुटबॉल अकादमी के कोच हैं, और मिचेल बचपन से ही उनके साथ मैदान में जाकर अपने से बड़े खिलाड़ियों के साथ अभ्यास करते थे। सिर्फ 4 साल की उम्र में ही मिचेल ने बॉल फीलिंग, जगलिंग और ड्रिब्लिंग जैसे कठिन कौशल सीख लिए थे। 5 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते उन्होंने 1000 से अधिक बार जगलिंग करना शुरू कर दिया, जो उनकी असाधारण प्रतिभा को दर्शाता है।
उनकी मेहनत और टैलेंट को देखकर उनके पिता उन्हें बेहतर ट्रेनिंग के लिए कोलकाता के ईस्ट बंगाल क्लब लेकर गए। वहां मिचेल ने प्रशिक्षण शुरू किया और अंडर-8 ब्लू क्यूब टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए 9 मैचों में 17 गोल दागकर सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बने।हालांकि, ईस्ट बंगाल क्लब में एक समस्या यह थी कि वहां सप्ताह में केवल तीन दिन ही ट्रेनिंग होती थी। मिचेल सप्ताह में चार दिन स्कूल जाते थे और तीन दिन कोलकाता जाकर ट्रेनिंग लेते थे। जब वे घर पर रहते थे, तब सुबह चार बजे जेडीएफए फुटबॉल अकादमी में अभ्यास करते थे, उसके बाद स्कूल जाते और दोपहर 2 बजे छुट्टी के बाद अपने स्कूल ग्राउंड में फिर से अभ्यास करते थे।


Related Posts

