1921 में बनी 33,750 गैलन की रेलवे टंकी बनी बरहरवा की पहचान, हेरिटेज घोषित करने की मांग
33,750 गैलन पानी संग्रहण की थी क्षमता
साहेबगंज के बरहरवा रेलवे स्टेशन के पास स्थित 1921 में बनी 33,750 गैलन क्षमता वाली ऐतिहासिक रेलवे वाटर टंकी आज भी रेलवे के गौरवशाली इतिहास की गवाह बनी हुई है। ईस्ट इंडियन रेलवे द्वारा निर्मित यह टंकी भाप इंजन के दौर में ट्रेनों को पानी उपलब्ध कराने का प्रमुख केंद्र थी।
साहेबगंज: बरहरवा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म से थोड़ी दूर खड़ी लाल ईंटों की यह टंकी सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं है। यह बरहरवा के गौरवशाली रेल इतिहास की कहानी कहती है। 1921 में ईस्ट इंडियन रेलवे द्वारा बनाई गई यह 33,750 गैलन की टंकी आज 104 साल बाद भी मौसम की मार झेलते हुए खड़ी है। 1920 के दशक में बरहरवा जंक्शन पूर्वी भारत का सबसे व्यस्त जंक्शनों में से एक था। कोलकाता से उत्तर-पूर्व और बिहार-झारखंड को जोड़ने वाले मार्ग यहीं से गुजरते थे। उस समय सभी ट्रेनें भाप के इंजन से चलती थीं। हर 100-150 किलोमीटर पर इंजन में पानी भरना अनिवार्य था। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए रेलवे ने बरहरवा में इस विशाल टंकी का निर्माण कराया। टंकी से पाइप के जरिए सीधे इंजन में पानी भरा जाता था। रेलकर्मियों के अनुसार, एक बार में कई इंजन यहां पानी भरते थे।
टंकी की सबसे खास बात इसकी बनावट है। नीचे का हिस्सा लाल ईंटों से बना, मेहराबदार डिजाइन, जो भूकंपरोधी माना जाता था। ऊपर का टैंक लोहे का है, जिस पर आज भी "33750 GALLONS E.I.R 1921" लिखा साफ दिखता है। इस टंकी में 33,750 गैलन यानी लगभग 1.53 लाख लीटर पानी जमा रखने की क्षमता है। कहते हैं ये टंकी बिना रुके 10-12 इंजन को पानी दे देती थी। उस समय ये बरहरवा की शान थी।
1960-70 के दशक में डीजल और 2020 के बाद इलेक्ट्रिक इंजन आने के पश्चात भाप इंजन बंद हो गए। इसके साथ ही इस टंकी की जरूरत भी खत्म हो गई। धीरे-धीरे रखरखाव बंद हुआ और अब यह सिर्फ एक धरोहर बनकर रह गई है। टंकी के चारों तरफ अब दुकानें और मकान बन गए हैं, लेकिन टंकी अपनी जगह पर अडिग है।


Susmita Rani is a journalist and content writer associated with Samridh Jharkhand. She regularly writes and reports on grassroots news from Jharkhand, covering social issues, agriculture, administration, public concerns, and daily horoscopes. Her writing focuses on factual accuracy, clarity, and public interest.
Related Posts

Latest News

