Ranchi News: डीएसपीएमयू में ‘प्रवाह’ व्याख्यान श्रृंखला के तहत भारतीय ज्ञान प्रणाली पर चर्चा

200 से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी

Ranchi News: डीएसपीएमयू में ‘प्रवाह’ व्याख्यान श्रृंखला के तहत भारतीय ज्ञान प्रणाली पर चर्चा
(डीएसपीएमयू के रवींद्र नाथ टैगोर सभागार में ‘प्रवाह’ व्याख्यान श्रृंखला का उद्घाटन करते कुलपति डॉ. राजीव मनोहर एवं अतिथि)

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची में 'प्रवाह' व्याख्यान श्रृंखला के तहत 'भारतीय ज्ञान प्रणाली' पर विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ। कुलपति डॉ. राजीव मनोहर की अध्यक्षता और प्रो. मनिंद्र नाथ ठाकुर के मुख्य आतिथ्य में 200 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।

रांची: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के राजनीति विज्ञान विभाग एवं IQAC के संयुक्त तत्वावधान में ‘प्रवाह—A Flow of Ideas, A Current of Conversations, A Confluence of Perspectives’ व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत “Indian Knowledge System: Creative Dialogue on Intellectual Traditions in the 21st Century” विषय पर  प्रथम विशेष व्याख्यान का आयोजन  विश्वविद्यालय के रविन्द्र नाथ टैगोर सभागार में किया गया। इस विशेष व्याख्यान श्रृंखला की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ राजीव मनोहर ने की, जबकि मुख्य वक्ता के तौर पर जेएनयू, नई दिल्ली के सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज के डॉ मनिंद्र नाथ ठाकुर आमंत्रित थे। 

कार्यक्रम के अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति डॉ राजीव मनोहर ने सर्वप्रथम कहा कि प्रवाह, एक विशेष व्याख्यान श्रृंखला की शुरुआत विश्वविद्यालय का  एक सकारात्मक प्रयास है, और विषय भी काफी प्रासंगिक है। इसके उपरांत उन्होंने इंडियन नॉलेज सिस्टम (Indian Knowledge System - IKS) या भारतीय ज्ञान प्रणाली के विषय में कहा कि यह प्राचीन भारत से विकसित हुई वह समग्र और वैज्ञानिक ज्ञान व्यवस्था है, जो दर्शन, विज्ञान, कला, तकनीक और जीवन जीने की शैली का समन्वय करती है। यह प्रकृति, समाज और अध्यात्म के बीच संतुलन पर आधारित है। 

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उन्होंने आगे इसके प्रमुख क्षेत्र और विषय जैसे, चार वेद, उपनिषद, पुराण और छह वेदांग पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह केवल किताबों तक ही सीमित नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन का हिस्सा है। इसका उद्देश्य मनुष्य का सर्वांगीण और नैतिक विकास करना है। यह 'वसुधैव कुटुंबकम्' और 'सर्वे भवंतु सुखिनः' के कल्याणकारी भाव पर टिकी है। इसके उपरांत

कार्यक्रम में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के Centre for Political Studies के प्रोफेसर डॉ. मनीन्द्र नाथ ठाकुर ने मुख्य वक्ता के रूप में अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की व्यापकता, विविधता और संवादधर्मिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली किसी एक परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभिन्न बौद्धिक, दार्शनिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं के निरंतर संवाद और सह-अस्तित्व से विकसित हुई है।

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अपने व्याख्यान में प्रो. ठाकुर ने भारतीय ज्ञान परंपरा को 21वीं सदी की चुनौतियों के संदर्भ में समझने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली की वास्तविक शक्ति उसकी बहुलता, संवाद, सहिष्णुता और विभिन्न विचार परंपराओं के बीच अंतर्संबंध में निहित है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को ज्ञान को केवल सूचना के रूप में नहीं, बल्कि निरंतर प्रश्न, संवाद और चिंतन की प्रक्रिया के रूप में देखने का आह्वान किया। कार्यक्रम का स्वागत संबोधन डॉ. अभय कृष्ण सिंह, सदस्य, IQAC द्वारा किया गया। उन्होंने मुख्य वक्ता एवं उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए व्याख्यान श्रृंखला की अकादमिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

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कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. सूची संतोष बरवार, डॉ. रीना नंद, डॉ. मनीषा शाहदेव, डॉ. बी.के. सिन्हा, डॉ. खुर्शीद अख्तर, डॉ. शालिनी लाल, डॉ. गीतांजलि सिंह सहित विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे। व्याख्यान में 200 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम की संयोजक एवं विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शमा सोनाली ने ‘प्रवाह’ व्याख्यान श्रृंखला के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस व्याख्यान श्रृंखला का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के बीच समकालीन मुद्दों पर विचार-विमर्श, बौद्धिक संवाद और विभिन्न दृष्टिकोणों के आदान-प्रदान के लिए एक सशक्त अकादमिक मंच उपलब्ध कराना है।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. शमा सोनाली, विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभाग, DSPMU, रांची ने धन्यवाद ज्ञापन (Vote of Thanks) प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य वक्ता, विश्वविद्यालय प्रशासन, IQAC, उपस्थित शिक्षकगण एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम की सफलता में सभी के सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। यह जानकारी पीआरओ डॉ राजेश कुमार सिंह ने दी।

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Edited By: Anjali Sinha
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